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सेवा क्षेत्र के विकास के लिए योजनाबध्द उपाय

1991 के बाद सरकार ने सेवा क्षेत्र के विकास के लिए कई उपाय किये जिसमे कुछ उप-सेवा क्षेत्र को अनियंत्रित करना प्रमुख है।
Sep 10, 2014 14:36 IST
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1991 के बाद सरकार ने सेवा क्षेत्र के विकास के लिए कई उपाय किये जिसमें कुछ उप-सेवा क्षेत्र को अनियंत्रित करना प्रमुख है। प्रिटं मीडिया में 26 प्रतिशत से लेकर सूचना प्रोधौगिकी,बीपीओ,बुनियादी ढांचागत क्षेत्र, ई-कार्मस क्रियाकलाप आदि क्षेत्रों मे 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गयी। सेवा क्षेत्र के विकास के लिए सरकार ने अनेक उपाय किये।

यह पहचानते हुए कि सूचना प्रौधोगिकी के इस युग में वैश्विक अर्थव्यावस्था से जुड़ने के लिए सस्ती एंव सब तक पहुचने वाली टेलीकोम सुविधाएं बहुत आवश्यक हैं, अनेक सुधार किये गये जैसे नेशनल टेलीकॉंम पॉलिसी-1994,नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी-2012,नयी टेलीकॉम पॉलिसी-1999,ब्रॉड बैंड पॉलिसी-2004। सूचना प्रौधोगिकी से संबध्द सेवाओं,पर्यटन,व्यापार,बैंकिंग,बीमा तथा रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रगति के लिए अतिरिक्त कदम उठाये गये।

ग्लोबल सर्विस लोकेशन इंडेक्स के मुताबिक भारत विदेशी निवेश के लिए सबसे प्रमुख स्थान है। भविष्य में इसके और अधिक बढ़ने के आसार हैं क्योंकि  वैश्विक सूचना प्रौधोगिकी संबध्द सेवाओं की केवल दस प्रतिशत पहुँच है और सूचना प्रौधोगिकी बाज़ार ने इस सही ढंग से समझा है। बाकी 90 प्रतिशत को अभी पूरा किया जाना है।