Search

1833 ई. का चार्टर अधिनियम

1833 ई. का चार्टर अधिनियम इंग्लैंड में हुई औद्योगिक क्रांति का परिणाम था ताकि इंग्लैंड में मुक्त व्यापार नीति के आधार पर बड़ी मात्रा में उत्पादित माल हेतु बाज़ार के रूप में भारत का उपयोग किया जा सके| अतः 1833 का चार्टर अधिनियम उदारवादी संकल्पना के आधार पर तैयार किया गया था| इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा| लॉर्ड विलियम बेंटिक को “ब्रिटिश भारत का प्रथम गवर्नर जनरल” बनाया गया|
Nov 16, 2015 15:16 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon

1833 ई. का चार्टर अधिनियम इंग्लैंड में हुई औद्योगिक क्रांति का परिणाम था ताकि इंग्लैंड में मुक्त व्यापार नीति के आधार पर बड़ी मात्रा में उत्पादित माल हेतु बाज़ार के रूप में भारत का उपयोग किया जा सके| अतः चार्टर अधिनियम उदारवादी संकल्पना के आधार पर तैयार किया गया था| ब्रिटिश संसद के इस अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को अगले बीस वर्षों तक भारत पर शासन करने का अधिकार प्रदान कर दिया गया|

चार्टर अधिनियम की विशेषतायें

• इस अधिनियम द्वारा कंपनी के अधीन क्षेत्रों व भारत के उपनिवेशीकरण को वैधता प्रदान कर दी गयी|

• इस अधिनियम द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक कंपनी का दर्जा समाप्त कर दिया गया  और वह अब केवल प्रशासनिक निकाय मात्र रह गयी थी|

• बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा| लॉर्ड विलियम बेंटिक को “ब्रिटिश भारत का प्रथम गवर्नर जनरल” बनाया गया|

• सपरिषद गवर्नर जनरल को कंपनी के नागरिक व सैन्य संबंधों के नियंत्रण, अधीक्षण और निर्देशित करने की शक्ति प्रदान की गयी| केंद्रीय सरकार का राजस्व वृद्धि और व्यय पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया गया| अतः सभी वित्तीय व प्रशासनिक शक्तियों का केन्द्रीकरण गवर्नर जनरल के हाथों में कर दिया गया|

• गवर्नर जनरल की परिषद् के सदस्यों की संख्या,जिसे पिट्स इंडिया एक्ट द्वारा घटाकर तीन कर दिया गया था, को पुनः बढ़ाकर चार कर दिया|