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पीएसएलवी सी-40 के बारे में 10 रोचक तथ्य

विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय प्रमोचन वाहनों में से एक ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन (पीएसएलवी) है. यह 20 वर्षों से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है. आइये इस लेख के माध्यम से पीएसएलवी सी-40 के बारे में कुछ रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.
Feb 9, 2018 18:35 IST
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Amazing facts about PSLV C-40
Amazing facts about PSLV C-40

भारत सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इन्कोकस्पार) का गठन 1962 में किया था. इन्कोुस्पाबर ने डॉ. विक्रम साराभाई के साथ तिरुवनंतपुरम में थुंबा भूमध्यथरेखीय राकेट प्रमोचन केंद्र (टर्ल्सा) वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए स्थाबपना की. ये हम सब जानते है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation, ISRO) भारत का राष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थान है. इसका मुख्यालय कर्नाटक राजधानी बंगलुरू में है. इस संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है. इस अन्तरिक्ष सम्बंधी कार्यक्रमों में मुख्य तौर पर उपग्रह, प्रमोचक यान, परिज्ञापी राकेट और भू-प्रणालियां हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की स्थाहपना 1969 में की गई थी.
विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय प्रमोचन वाहनों में से एक ध्रुवीय उपग्रह प्रमोचन वाहन (पीएसएलवी) है. यह 20 वर्षों से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है. इसने कई ऐतिहासिक मिशनों के लिए उपग्रहों का प्रमोचन किया है जैसे चंद्रयान-1, मंगल कक्षित्र मिशन, आईआरएनएसएस आदि. आइये इस लेख के माध्यम से पीएसएलवी सी-40 के बारे में कुछ रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.
पीएसएलवी सी-40 के बारे में 10 रोचक तथ्य
1. इसरो ने एक साथ 31 सैटेलाइट अंतरिक्ष में लॉन्चउ किए. जिसमें एक माइक्रोसेटेलाइट, नैनो उपग्रह, साथ ही छः देशों के 3 माइक्रोसेटेलाइटस और 25 नैनोसेटेलाइट और सबसे भारी उपग्रह कार्टोसैट 2 सीरीज भी पीएसएलवी-सी 40 अंतरिक्ष में शामिल है. पीएसएलवी के साथ 1332 किलो वजनी 31 उपग्रह एकीकृत किए गए हैं ताकि उन्हें प्रेक्षपण के बाद पृथ्वी की ऊपरी कक्षा में तैनात किया जा सके.
2. पीएसएलवी-सी 40 के सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि छह अन्य देशों - कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए गए हैं.
3. क्या आप जानते हैं कि 28 अंतर्राष्ट्रीय सह यात्री उपग्रहों में से 19 अमेरिका, पांच दक्षिण कोरिया और एक-एक कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और फिनलैंड के हैं.

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4. कार्टोसैट 2 सीरीज मिशन 710 किलोग्राम का पृथ्वी अवलोकन के लिए प्राथमिक उपग्रह है. इसके साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं.
5. 4.4 मीटर लंबा ध्रुवीय उपग्रह लॉन्च वाहन (पीएसएलवी-सी 40) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 9.29 a.m. पर प्रक्षेपित किया गया.
6. कार्टोसैट 2 सैटेलाइट निगरानी उपग्रह है और इससे तटीय क्षेत्रों और शहरों की निगरानी के लिए इस्तेकमाल किया जाएगा. इसमें हाईरेजुलेशन कैमरा लगा है जिससे खींची फोटो का इस्तेममाल किया जाएगा. इसको चार स्तगर पर लॉन्चट किया गया.
7. काटरेसेट-2 सीरीज मिशन के साथ सह यात्री उपग्रह भी है जिसमें 100 किलोग्राम का माइक्रो और 10 किलोग्राम का नैनो उपग्रह भी शामिल हैं.
8. इन 28 अंतरराष्ट्रीय उपग्रहों को इसरो और एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच हुए व्यापारिक समझौतों के तहत प्रक्षेपित किया गया. यह 100वां उपग्रह कार्टोसेट -2 श्रृंखला का तीसरा उपग्रह होगा.
9. काटरेसेट-2 सीरीज मिशन पांच साल की अवधि के लिए पृथ्वी की परिक्रमा करेगा.
10. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है. 31 अगस्त 2017 को भी इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नेविगेशन उपग्रह को वितरित करने में असफल रहा था.
ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि इसरो भारत का मज़बूत प्रक्षेपण केंद्र है. यह अब इतना परिपक्वी हो गया है कि प्रक्षेपण की सेवाएं अन्यह देशों को भी उपलब्धा कराता है. इसरो की व्या वसायिक शाखा एंट्रिक्स , भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन विश्व  भर में करती है.

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