विभिन्न सूचकांकों और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट में भारत की रैंक (2019-20)

विभिन्न देशों को उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, व्यापार और व्यवसाय वातावरण आदि के आधार पर हर साल कई अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्ट और इंडेक्स में रैंक दी जाती है. इस लेख में हमने विश्व बैंक, आईएमएफ और विश्व आर्थिक मंच जैसे कुछ प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट प्रकाशित की है और इनमें भारत की स्थिति भी बतायी है.

1. मानव विकास सूचकांक (HDI) रैंक 2019 (HDI Ranking 2019)

मानव विकास सूचकांक ((HDI), दुनिया भर में कुछ मापदंडों के आधार पर मानव विकास की स्थिति बताता है. यह सूचकांक, देश के मानव विकास की रैंकिंग को तय करने के लिए तीन मापदंडों का उपयोग करता है. ये मापदंड हैं;

i. जीवन प्रत्याशा सूचकांक

ii. शिक्षा सूचकांक: इसमें शामिल है; a. विद्यालय सूचकांक के औसत वर्ष b. विद्यालय सूचकांक के प्रत्याशित वर्ष

iii. जीवन स्तर

मानव विकास सूचकांक (HDI) को 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक द्वारा विकसित किया गया था और बाद में भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने इसमें मदद की थी.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) हर साल HDI रिपोर्ट जारी करता है. यूएनडीपी द्वारा 24 अक्टूबर, 2019 को नवीनतम एचडीआई रिपोर्ट 2020 जारी की गई थी. इस नवीनतम रिपोर्ट का शीर्षक था;“Beyond income,Beyond averages,Beyond Today:Inequalities in Human Development in the 21st Century”

वर्ष 2019 में भारतीय HDI रैंक: 129 (पिछले साल की तुलना में एक रैंक बेहतर)

कुल देशों ने भाग लिया; 189

टॉप स्थिति: नॉर्वे

सबसे निचले स्थान पर: बुरुंडी

नोट: मानव विकास रिपोर्ट ने 2010 में एक असमानता-समायोजित मानव विकास सूचकांक (IHDI) शुरू किया था. वर्ष 2019 में, भारत की IHDI रैंक 130 है.

2. ग्लोबल टैलेंट कॉम्पिटिटिव इंडेक्स (GTCI) 2020

यह सूचकांक बिजनेस स्कूल INSEAD द्वारा Addeco और Google के सहयोग से जारी किया गया है. इस वर्ष यह रिपोर्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में ग्लोबल टैलेंट पर आधारित है.

भारतीय रैंक: 72

कुल भाग लेने वाले देश: 132

टॉप रैंक : स्विट्जरलैंड

3. ईज ऑफ़ डूइंग बिज़नस रैंक 2019 (Ease of doing Business Rank 2019):-

यह रिपोर्ट हर साल विश्व बैंक द्वारा प्रकाशित की जाती है. इसे 2002 में शुरू किया गया था. यह रिपोर्ट मूल रूप से रिपोर्ट करती है कि किसी देश में कितनी आसानी से व्यवसाय शुरू किया जा सकता है? यदि किसी देश में लालफीताशाही और सरकारी अनुमोदन जैसी बहुत अधिक बाधाएं हैं, तो उस देश की रैंकिंग निश्चित रूप से कम होगी.

भारत इस रैंकिंग में बहुत अच्छी तरक्की कर रहा है. 2019 में भारतीय रैंक 63वें स्थान पर है जो कि पिछले वर्ष की रैंकिंग से 14 स्थान का सुधार है. वर्ष 2017 से 2020 तक, न्यूजीलैंड शीर्ष स्थान पर है और सिंगापुर इसी अवधि में दूसरे स्थान पर है.

4.ग्लोबल प्रतियोगी रिपोर्ट 2019 (Global Competitive Report 2019):-

यह रिपोर्ट हर साल विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी की जाती है. प्रतिस्पर्धात्मक रिपोर्ट 2019 में भारत 10 पायदान नीचे खिसक गया और 68वें स्थान पर रहा.  वर्ष 2019 की रैंकिंग में 141 देशों ने भाग लिया था.

सिंगापुर इस रैंकिंग में सबसे ऊपर है जबकि इसके बाद अमेरिका और हांगकांग का नंबर है. यह रिपोर्ट पहली बार 2004 में प्रकाशित हुई थी. 
रिपोर्ट इन 12 पैरामीटर्स के आधार पर बनाई गयी गई है. ये इस प्रकार हैं;

1. उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण

2. अच्छा स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा

3. नवाचार

4. उचित बुनियादी ढाँचा

5. सबसे परिष्कृत उत्पादन प्रक्रियाओं का उपयोग करके नए माल का उत्पादन

6. मौजूदा तकनीक का दोहन करने की क्षमता

7. संस्थागत सपोर्ट 

8. स्थिर वृहद आर्थिक ढांचा

9. कुशल वस्तु बाजार

10. कुशल श्रम बाजार

11. विकसित वित्तीय बाजार

12. घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाजारों का आकार

5. ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2020 (Global gender Gap Report 2020)

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स, देश में लैंगिक समानता को मापने के लिए बनाया गया एक सूचकांक है. ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट पहली बार 2006 में प्रकाशित हुई थी. 2020 की रिपोर्ट (2019 में प्रकाशित) 153 देशों पर आधारित है.

यह रिपोर्ट हर साल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF)  द्वारा प्रकाशित की जाती है. इसके चार पैरामीटर्स हैं जिनके आधार पर रैंकिंग जारी की जाती है.

1. राजनीतिक सशक्तीकरण

2. आर्थिक भागीदारी और अवसर

3. शिक्षा प्राप्ति

4. स्वास्थ्य और उत्तरजीविता

भारतीय रैंक: 112 (पिछले वर्ष से 4 स्थान नीचे). भारत पड़ोसी देश जैसे चीन, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश से पीछे है. आइसलैंड (पहली रैंक) सबसे अधिक लिंग-तटस्थ देश है जबकि यमन सबसे कम है इसका मतलब है कि यमन में सबसे अधिक लैंगिक असमानता है   और महिलाओं के साथ बहुत भेदभाव होता है.

6. वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट 2000 (World Economic Outlook Report 2000):-

यह रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी की जाती है. यह रिपोर्ट वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन के बारे में आईएमएफ की भविष्यवाणी पर आधारित होती है. अप्रैल 2020 की विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था के 3% सिकुड़ने का अनुमान है.

आईएमएफ ने अनुमान लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2020 में 1.9% की दर से बढ़ेगी, जबकि 2021 में यह दर 7.4% होगी. भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ IMF में मुख्य अर्थशास्त्री हैं और भारत में वर्तमान आर्थिक सुधारों की काफी आलोचक मानी जातीं हैं.

ये थीं दुनिया के शीर्ष संस्थानों द्वारा प्रकाशित कुछ महत्वपूर्ण रिपोर्टें और उनमें भारत की रैंकिंग. ये रिपोर्ट और रैंकिंग विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसलिए परीक्षार्थियों को इस लेख को ध्यान से पढ़ने की जरूरत है.

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