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भारत में आय असमानता के बारे में 14 रोचक तथ्य

इस लेख में हम ऑक्सफैम इंडिया रिपोर्ट- 2018 से 14 रोचक तथ्यों को प्रकाशित कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आय असमानता तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2017 में दुनिया भर में 2,043 अरबपति, जबकि भारत में 101 अरबपति थे.

भारत की धनाढ्यता का दूसरा पक्ष यह है कि यहाँ पर 70 मिलियन लोग अत्यन्त गरीबी में जीवनयापन करते हैं. हालाँकि दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोग नाइजीरिया में (87 मिलियन) रहते हैं. विश्व स्तर पर अत्यन्त गरीब उन लोगों को माना जाता है जो कि एक दिन में 1.90 डॉलर से कम कमाते हैं.

आय, धन और उपभोग के सभी मानकों पर, भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक है और इनकी मानकों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है.
आइये अब जानते हैं कि ऑक्सफैम इंडिया रिपोर्ट 2018 के मुख्य तथ्य क्या है;

1. भारत ने वित्त वर्ष 2017 में 17 नए अरबपति जोड़े थे, इस प्रकार भारत में अरबपतियों की संख्या 101 हो गयी है. वित्त वर्ष 2000 में देश में अरबपतियों की संख्या 9 थी.

2. भारत का 73% धन सिर्फ सबसे अमीर 1% अमीर व्यक्तियों के पास है.

3. पिछले साल उत्पन्न धन का 73% हिस्सा सबसे अमीर एक प्रतिशत अमीरों के हाथों में चला गया था.

4. पिछले साल भारत के 67 करोड़ लोगों की आमदनी में सिर्फ 1% की वृद्धि हुई थी. जबकि भारत के अरबपतियों की संपत्ति में 4891 करोड़ करोड़ की वृद्धि हुई थी जो कि 15,778 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,676 करोड़ रुपये हो गयी है.

डॉलर दुनिया की सबसे मज़बूत मुद्रा क्यों मानी जाती है?

5. ध्यान देने योग्य दिलचस्प बात यह है कि 4891 रुपये भारत के सभी राज्यों के “स्वास्थ्य और शिक्षा” का 85% बोझ उठाने के लिए पर्याप्त है.

6. भारत के अरबपतियों में से 37% के पास विरासत में मिली संपत्ति है. ये लोग देश में अरबपतियों के पास मौजूद कुल संपत्ति के 51% हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं.

7.  भारत के कुल 101 अरबपतियों में से 51 की उम्र 65 वर्ष से ऊपर है और इनकी कुल संपत्ति 10,544 अरब रुपये है.

8. अगले 20 वर्षों में, दुनिया के सबसे अमीर 500 लोग अपने उत्तराधिकारियों को 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के संपत्ति का हस्तांतरण कर देंगे जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद से भी ज्यादा है.

9. अनुमान है कि वर्ष 2018 और 2022 के बीच, भारत में हर दिन 70 नए करोड़पति पैदा होंगे.

10. भारत में केवल 4 महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन इसलिए अरबपति हैं क्योंकि उनको अरबों की संपत्ति विरासत में मिली है.

11. ग्रामीण भारत में मजदूरी करने वाला व्यक्ति यदि किसी कंपनी के टॉप पोस्ट पर बैठे व्यक्ति के बराबर धन कमाना चाहता है तो उसे 941 साल लगेंगे.

12. एक शीर्ष भारतीय कंपनी में सर्वश्रेष्ठ वेतन वाला कर्मचारी 17.5 दिन में इतना धन कम लेता है कि ग्रामीण भारत में न्यूनतम मजदूरी कमाने वाला व्यक्ति इतने ही धन के लिए 50 साल काम करेगा.

13. दुनिया भर में, महिलाएं हमेशा पुरुषों से कम कमाती हैं और इन में से ज्यादातर सबसे कम वेतन वाली नौकरियों में हैं. तुलनात्मक रूप से, 10 अरबपतियों में से 9 पुरुष हैं. भारत में, केवल चार महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन विरासत में मिली संपत्ति के कारण अरबपति हैं.

14. भारत की 1.3 अरब की आबादी में से 70 मिलियन अर्थात 5% आबादी अत्यंत गरीबी अर्थात 1.90 डॉलर प्रतिदिन से कम में गुजारा कर रही है.

उपर्युक्त आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अमीर और अमीर हो रहा है और गरीब और गरीब. इसके पीछे मुख्य कारण सरकार की अमीरों के पक्ष में बनायीं गयी नीतियां हैं. जैसे भारत की लगभग 55% जनसंख्या कृषि में लगी हुई है और पूरे देश के किसानों की लोन माफ़ी सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 0.5% है जबकि बड़े कॉर्पोरेट घरानों को करोड़ों की सब्सिडी दी जाती है और तो और उनको दिया गया लोन भी नहीं बसूला जाता है जबकि किसान यदि लोन ना चुका पाए तो उसके घर की कुर्की कर ली जाती है.

अमीरी और गरीबी की इस खाई को पाटने के लिए सरकार को प्रगतिशील प्रत्यक्ष कराधान लगाना होगा जिससे कि अमीर पर अधिक कर भार पड़े और गरीब पर कम. इसके अलावा संपत्ति के हस्तांतरण पर अधिक कर लगाने की भी जरुरत है और इससे जुटाया गया धन गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना होगा. यदि सरकार अमीर और गरीब के बीच अंतर की खाई को ख़त्म करने में सफल हो गयी तो भारत का विकास अधिक समावेशी, और चहुमुखी कहा जायेगा.

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इस लेख में हम ऑक्सफैम इंडिया रिपोर्ट- 2018 से 14 रोचक तथ्यों को प्रकाशित कर रहे हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आय असमानता तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2017 में दुनिया भर में 2,043 अरबपति, जबकि भारत में 101 अरबपति थे.

भारत की धनाढ्यता का दूसरा पक्ष यह है कि यहाँ पर 70 मिलियन लोग अत्यन्त गरीबी में जीवनयापन करते हैं. हालाँकि दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोग नाइजीरिया में (87 मिलियन) रहते हैं. विश्व स्तर पर अत्यन्त गरीब उन लोगों को माना जाता है जो कि एक दिन में 1.90 डॉलर से कम कमाते हैं.

आय, धन और उपभोग के सभी मानकों पर, भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक है और इनकी मानकों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है.

आइये अब जानते हैं कि ऑक्सफैम इंडिया रिपोर्ट 2018 के मुख्य तथ्य क्या है;

1. भारत ने वित्त वर्ष 2017 में 17 नए अरबपति जोड़े थे, इस प्रकार भारत में अरबपतियों की संख्या 101 हो गयी है. वित्त वर्ष 2000 में देश में अरबपतियों की संख्या 9 थी.
2. भारत का 73% धन सिर्फ सबसे अमीर 1% व्यक्तियों के पास है.
3. पिछले साल उत्पन्न धन का 73% हिस्सा सबसे अमीर एक प्रतिशत अमीरों के हाथों में चला गया था.

4. पिछले साल भारत के 67 करोड़ लोगों की आमदनी में सिर्फ 1% की वृद्धि हुई थी. जबकि भारत के अरबपतियों की संपत्ति में 4891 करोड़ करोड़ की वृद्धि हुई थी जो कि 15,778 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,676 करोड़ रुपये हो गयी है.
5. ध्यान देने योग्य दिलचस्प बात यह है कि 4891 रुपये भारत के सभी राज्यों के “स्वास्थ्य और शिक्षा” का 85% बोझ उठाने के लिए पर्याप्त है.

6. भारत के अरबपतियों में से 37% के पास विरासत में मिली संपत्ति है. ये लोग देश में अरबपतियों के पास मौजूद कुल संपत्ति के 51% हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं.
 7. भारत में केवल 4 महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन इसलिए अरबपति हैं क्योंकि उनको अरबों की संपत्ति विरासत में मिली है.

8. अगले 20 वर्षों में, दुनिया के सबसे अमीर 500 लोग अपने उत्तराधिकारियों को 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के संपत्ति का हस्तांतरण कर देंगे जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद से भी ज्यादा है.

9. अनुमान है कि वर्ष 2018 और 2022 के बीच, भारत में हर दिन 70 नए करोड़पति पैदा होंगे.

10. भारत के कुल 101 अरबपतियों में से 51 की उम्र 65 वर्ष से ऊपर है और इनकी कुल संपत्ति 10,544 अरब रुपये है.

11. ग्रामीण भारत में मजदूरी करने वाला व्यक्ति यदि किसी कंपनी के टॉप पोस्ट पर बैठे व्यक्ति के बराबर धन कमाना चाहता है तो उसे 941 साल लगेंगे.

12. एक शीर्ष भारतीय कंपनी में सर्वश्रेष्ठ वेतन वाला कर्मचारी 17.5 दिन में इतना धन कम लेता है कि ग्रामीण भारत में न्यूनतम मजदूरी कमाने वाला व्यक्ति इतने ही धन के लिए 50 साल काम करेगा.

 

 

 

 

13. दुनिया भर में, महिलाएं हमेशा पुरुषों से कम कमाती हैं और इन में से ज्यादातर सबसे कम वेतन वाली नौकरियों में हैं. तुलनात्मक रूप से, 10 अरबपतियों में से 9 पुरुष हैं. भारत में, केवल चार महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन विरासत में मिली संपत्ति के कारण अरबपति हैं.

14. भारत की 1.3 अरब की आबादी में से 70 मिलियन अर्थात 5% आबादी अत्यंत गरीबी अर्थात 1.90 डॉलर प्रतिदिन से कम में गुजारा कर रही है.

उपर्युक्त आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अमीर और अमीर हो रहा है और गरीब और गरीब. इसके पीछे मुख्य कारण सरकार की अमीरों के पक्ष में बनायीं गयी नीतियां हैं. जैसे भारत की लगभग 55% जनसंख्या कृषि में लगी हुई है और पूरे देश के किसानों की लोन माफ़ी सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 0.5% है जबकि बड़े कॉर्पोरेट घरानों को करोड़ों की सब्सिडी दी जाती है और तो और उनको दिया गया लोन भी नहीं बसूला जाता है जबकि किसान यदि लोन ना चुका पाए तो उसके घर की कुर्की कर ली जाती है.

अमीरी और गरीबी की इस खाई को पाटने ले लिए सरकार को प्रगतिशील प्रत्यक्ष कराधान लगाना होगा जिससे कि अमीर पर अधिक कर भर पड़े और गरीब पर कम. इसके अलावा संपत्ति के हस्तांतरण पर अधिक कर लगाने की भी जरुरत है और इससे जुटाया गया धन गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना होगा. यदि सरकार अमीर और गरीब के बीच अंतर की खाई को ख़त्म करने में सफल हो गयी तो भारत का विकास अधिक समावेशी, समग्र और चहुमुखी विकास कहा जायेगा.


भारत की धनाढ्यता का दूसरा पक्ष यह है कि यहाँ पर 70 मिलियन लोग अत्यन्त गरीबी में जीवनयापन करते हैं. हालाँकि दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोग नाइजीरिया में (87 मिलियन) रहते हैं. विश्व स्तर पर अत्यन्त गरीब उन लोगों को माना जाता है जो कि एक दिन में 1.90 डॉलर से कम कमाते हैं.
आय, धन और उपभोग के सभी मानकों पर, भारत दुनिया के सबसे असमान देशों में से एक है और इनकी मानकों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है.
आइये अब जानते हैं कि ऑक्सफैम इंडिया रिपोर्ट 2018 के मुख्य तथ्य क्या है;
1. भारत ने वित्त वर्ष 2017 में 17 नए अरबपति जोड़े थे, इस प्रकार भारत में अरबपतियों की संख्या 101 हो गयी है. वित्त वर्ष 2000 में देश में अरबपतियों की संख्या 9 थी.
2. भारत का 73% धन सिर्फ सबसे अमीर 1% व्यक्तियों के पास है.
3. पिछले साल उत्पन्न धन का 73% हिस्सा सबसे अमीर एक प्रतिशत अमीरों के हाथों में चला गया था.
4. पिछले साल भारत के 67 करोड़ लोगों की आमदनी में सिर्फ 1% की वृद्धि हुई थी. जबकि भारत के अरबपतियों की संपत्ति में 4891 करोड़ करोड़ की वृद्धि हुई थी जो कि 15,778 करोड़ रुपये से बढ़कर 20,676 करोड़ रुपये हो गयी है.
5. ध्यान देने योग्य दिलचस्प बात यह है कि 4891 रुपये भारत के सभी राज्यों के “स्वास्थ्य और शिक्षा” का 85% बोझ उठाने के लिए पर्याप्त है.
6. भारत के अरबपतियों में से 37% के पास विरासत में मिली संपत्ति है. ये लोग देश में अरबपतियों के पास मौजूद कुल संपत्ति के 51% हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं.
7. भारत में केवल 4 महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन इसलिए अरबपति हैं क्योंकि उनको अरबों की संपत्ति विरासत में मिली है.
8. अगले 20 वर्षों में, दुनिया के सबसे अमीर 500 लोग अपने उत्तराधिकारियों को 2.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के संपत्ति का हस्तांतरण कर देंगे जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद से भी ज्यादा है.
9. अनुमान है कि वर्ष 2018 और 2022 के बीच, भारत में हर दिन 70 नए करोड़पति पैदा होंगे.
10. भारत के कुल 101 अरबपतियों में से 51 की उम्र 65 वर्ष से ऊपर है और इनकी कुल संपत्ति 10,544 अरब रुपये है.
11. ग्रामीण भारत में मजदूरी करने वाला व्यक्ति यदि किसी कंपनी के टॉप पोस्ट पर बैठे व्यक्ति के बराबर धन कमाना चाहता है तो उसे 941 साल लगेंगे.
12. एक शीर्ष भारतीय कंपनी में सर्वश्रेष्ठ वेतन वाला कर्मचारी 17.5 दिन में इतना धन कम लेता है कि ग्रामीण भारत में न्यूनतम मजदूरी कमाने वाला व्यक्ति इतने ही धन के लिए 50 साल काम करेगा.
13. दुनिया भर में, महिलाएं हमेशा पुरुषों से कम कमाती हैं और इन में से ज्यादातर सबसे कम वेतन वाली नौकरियों में हैं. तुलनात्मक रूप से, 10 अरबपतियों में से 9 पुरुष हैं. भारत में, केवल चार महिला अरबपति हैं और उनमें से तीन विरासत में मिली संपत्ति के कारण अरबपति हैं.
14. भारत की 1.3 अरब की आबादी में से 70 मिलियन अर्थात 5% आबादी अत्यंत गरीबी अर्थात 1.90 डॉलर प्रतिदिन से कम में गुजारा कर रही है.
उपर्युक्त आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अमीर और अमीर हो रहा है और गरीब और गरीब. इसके पीछे मुख्य कारण सरकार की अमीरों के पक्ष में बनायीं गयी नीतियां हैं. जैसे भारत की लगभग 55% जनसंख्या कृषि में लगी हुई है और पूरे देश के किसानों की लोन माफ़ी सकल घरेलू उत्पाद का सिर्फ 0.5% है जबकि बड़े कॉर्पोरेट घरानों को करोड़ों की सब्सिडी दी जाती है और तो और उनको दिया गया लोन भी नहीं बसूला जाता है जबकि किसान यदि लोन ना चुका पाए तो उसके घर की कुर्की कर ली जाती है.
अमीरी और गरीबी की इस खाई को पाटने ले लिए सरकार को प्रगतिशील प्रत्यक्ष कराधान लगाना होगा जिससे कि अमीर पर अधिक कर भर पड़े और गरीब पर कम. इसके अलावा संपत्ति के हस्तांतरण पर अधिक कर लगाने की भी जरुरत है और इससे जुटाया गया धन गरीबों के शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर खर्च करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देना होगा. यदि सरकार अमीर और गरीब के बीच अंतर की खाई को ख़त्म करने में सफल हो गयी तो भारत का विकास अधिक समावेशी, समग्र और चहुमुखी विकास कहा जायेगा.

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