ऑपरेशन ब्लू स्टार: इंदिरा गांधी की राजनीतिक हत्या का मुख्य कारण

ऑपरेशन ब्लू स्टार को स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे खराब अध्यायों में से एक माना जाता है। 06 जून1984 को सिख इतिहास में भयावह दिवस के रूप में माना गया है. लोगों का मानना है कि इस दिन उनकी धार्मिक भावनाओं को भंग किया गया था. सुरक्षा एजेंसियों का भी मानना है कि अलगाववादी ताकतों से निपटने के लिए उनके पास इसके अतिरिक्त कोई और विकल्प नहीं था. इस लेख में ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की राजनीतिक हत्या का मुख्य कारण के बारें में अध्ययन करेंगे.


ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या हैं?


Source: www.amp-img01.ibnlive.in
ऑपरेशन ब्लू स्टार अमृतसर में सिख धर्म के सबसे पवित्र मंदिर हरिमंदिर साहिब परिसर से विद्रोहियों, आतंकवादियों या फिर खालीस्थान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 में चलाया गया एक अभियान था.
उस समय पिंजाब में अलगाववादी ताकतें भिंडरावाले के नेतृत्व में सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था. भिंडरावाले ने मंदिर को अपना निवास स्थान और अपना मुख्यालय अप्रैल 1983 में बना लिया था. इसलिए इन सब घटनाओं से निपटने के लिए ऑपरेशन को लाया गया था.

दुनिया के 11 ऐसे देश जिनके पास अपनी सेना नही है
अब सवाल यह उठता है कि ऑपरेशन ब्लू स्टार लाने के पीछे कौन था?
ऑपरेशन ब्लू स्टार का आदेश किसने दिया था? कैबिनेट सचिवालय, गृह और रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनके पास कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है जिसमें बताया गया हो कि 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर में सैन्य कार्रवाई मौखिक रूप से या किसी लिखित आर्डर के आधार पर की गई थी। 33 साल बाद भी ऑपरेशन ब्लूस्टार एक विवादास्पद विषय बना हुआ है.
ऑपरेशन ब्लू स्टार का उदेश्य क्या था?


Source: www.allaboutsikhs.com
ऑपरेशन ब्लू स्टार के दो घटक थे. पहला ऑपरेशन मेटल (Operation Metal) था, जो स्वर्ण मंदिर परिसर तक सीमित था.
ऑपरेशन मेटल के बाद संचालन की दुकान थी, जिसमें सशस्त्र बलों ने संदिग्धों को पकड़ने के लिए पंजाब के ग्रामीण इलाकों पर छापा मारा था.
दूसरा घटक ऑपरेशन वुडरोस (Operation Woodrose) था, आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए पूरे पंजाब में शुरू किया गया था.

भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना
ऑपरेशन ब्लू स्टार का इतिहास


Source: www.sikhmuseum.com
प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के आदेशों के तहत, भारतीय सेना ने सिख चरमपंथी धार्मिक नेता, जनरैल सिंह भिंडरावाले और उनके सशस्त्र अनुयायियों को बाहर निकालने के लिए अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के परिसर में घुसपैठ किया. पिछले दो सालों में भिंडरावाले ने अपने राजनीतिक दावे को बहुत स्पष्ट कर दिया था. वह चाहता था कि भारत सरकार आनंदपुर प्रस्ताव पारित करे और सिखों के लिए एक अलग राज्य खलिस्तान के गठन के लिए सहमती दे.
1982 से, सिख धर्म के कट्टरपंथी नेता पर्याप्त समर्थन हासिल करने में कामियाब रहे और 1983 के मध्य तक गोला बारूद और उनके अनुयायियों के साथ स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर एक बेस स्थापित किया. ऑपरेशन ब्लू स्टार को 1 जून और 6 जून 1984 के बीच भिंडरावाले और उसकी मांगों से छुटकारा पाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था.


Source: www.greaterkashmir.com
जब भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर और उसके आसपास के इलाकों को किलाबन्द  किया, तब इंदिरा गांधी ने उन्हें बाहर निकालने की योजना के बारे में भारतीय सेना से परामर्श करने का निर्णय लिया. गुरुद्वारा से जुड़े धार्मिक भावनाओं और हताहतों को देखते हुए तत्कालीन सेना के उप-प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल एस.के.सिन्हा ने इस हमले के खिलाफ जवाब देने का सोचा. इसके तुरंत बाद, जनरल एस.के.सिन्हा का तबादला हो गया और जनरल अरुण श्रीधर वैद्य को भारतीय सेना का चीफ नियुक्त किया, जिन्होनें ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना और नेतृत्व को संभाला.

7 ऐसे ऐतिहासिक केस जिसके कारण भारतीय कानून में बदलाव हुए


Source:www.sikhsiyasat.net
भारतीय सेना ने 2 जून की रात को आक्रमण किया और 3 जून को पंजाब राज्य में कर्फ्यू लगाया गया, संचार और यात्रा की सभी लाइनें बंद कर दी गईं थी। ऑपरेशन के परिणामस्वरूप भिंडरावाले की मौत हुई और सेना, नागरिकों और आतंकवादियों के बीच इसे एक आकस्मिक दुर्घटना कहा गया। स्वर्ण मंदिर पर हुए हमले कि सिखों ने दुनिया भर में आलोचना की और कई सिख प्रशासनिकों ने अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया था।
ब्लू स्टार ऑपरेशन के बाद के परिणाम  


Source: www. qph.ec.quoracdn.net.com
- ऑपरेशन ब्लू स्टार के प्रतिशोध में कई लोग मारे गए.
- प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की दो सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी और दिल्ली में सिख विरोधीयों के द्वारा काफी दंगे हुए.
- 13 वीं सेना प्रमुख, जनरल ए.एस वैद्य,  जो ऑपरेशन देख रहे थे, उनकी सेवानिवृत्ति के बाद पुणे में हत्या कर दी गई थी।
- कनिष्का, मॉन्ट्रियल से दिल्ली तक आने वाली ए.आई उड़ान182 को बम से उड़ा दिया गया और सभी 329 लोग मारे गए.
जून 1984 का ऑपरेशन आधुनिक भारतीय इतिहास में सबसे विवादास्पद घटनाओं में से एक है। जिसे 33 सालों के बाद भी भुलाया नहीं जा सका है और उस रात की टीस अब भी लोगों के दिलों में महसूस की जा सकती है.

रॉ के 7 प्रमुख ऑपरेशन

Related Categories

Popular

View More