क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां क्या होतीं है और इनकी रेटिंग का क्या मतलब होता है?

क्रेडिट रेटिंग किसी भी देश, संस्था या व्यक्ति आदि की कर्ज लेने या उसे चुकाने की क्षमता का मूल्यांकन होती है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां परोक्ष रूप से यह बतातीं है कि देश, संस्था या व्यक्ति आर्थिक रूप से कितना मजबूत है और उसको कितना कर्ज देना खतरनाक है या नही. अर्थात वह कितना कर्ज चुकाने की क्षमता रखता है.

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि किसी देश, संस्था या व्यक्ति की रेटिंग बनाते समय ये कम्पनियाँ कोई निश्चित फार्मूला नहीं अपनाती हैं बल्कि अपने अनुभवों और आंकड़ों का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन रेटिंग कम्पनियाँ रेटिंग देते समय देश, कम्पनी या व्यक्ति की लेनदारियों, देनदारियों, कुल संपत्ति, बाजार में साख, उनकी वृद्धि दर इत्यादि का विश्लेषण अवश्य करतीं हैं.
वर्तमान में भारत में 4 क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां काम कर रही हैं;
1. क्रिसिल (CRISIL)
2. इक्रा (ICRA)
3. केअर (CARE)
4. डीसीआर इंडिया (DCR India)
भारत में विभिन्न क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा आबंटित विभिन्न प्रकार के क्रेडिट रेटिंग की तालिका नीचे दी गई हैं;

आइये अब जानते हैं कि किस रेटिंग का क्या मतलब है?

  रेटिंग

  रेटिंग का अर्थ

  AAA

  देश, कंपनी या व्यक्ति निवेश करना सबसे सुरक्षित और लाभदायक  

  AA

  देश, कंपनी या व्यक्ति में अपने वादों को पूरा करने की काफ़ी क्षमता है

  A

  देश, कंपनी या व्यक्ति के पास अपने वादों को पूरा करने की क्षमता पर बदली विपरीत परिस्थितियों का असर पड़ सकता है

 BBB

  देश, कंपनी या व्यक्ति में अपने वादों को पूरा करने की क्षमता लेकिन विपरीत आर्थिक हालात से प्रभावित होनी की ज़्यादा गुंजाइश

 CC  

  देश, कंपनी या व्यक्ति वर्तमान में बहुत कमज़ोर

 D

  देश, कंपनी या व्यक्ति उधार लौटाने में असफल

अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की बात की जाये तो इस समय रेटिंग की दुनिया में तीन बड़े नाम हैं.
1. स्टैण्डर्ड एंड पूअर
2. मूडीज़
3. फ़िच
इनमे सबसे पुरानी एजेंसी है स्टैण्डर्ड एंड पूअर जिसकी नींव 1860 में हेनरी पूअर ने रखी थी. मूड़ीज़ की स्थापना, वर्ष 1909 में जॉन मूडी नाम के व्यक्ति ने की थी. तीसरी प्रसिद्द रेटिंग एजेंसी है फिंच; जो कि स्टैण्डर्ड एंड पूअर और मूडीज़ का छोटा रूप है. आज दुनिया के रेटिंग व्यवसाय का क़रीब 40% कारोबार स्टैण्डर्ड एंड पूअर और मूडीज़ के कब्जे में है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का महत्व क्यों बढ़ा है?
यदि किसी देश को अच्छी रेटिंग मिल जाती है तो पूरे विश्व के निवेशक उस देश में निवेश करने के लिए उत्साहित हो जाते हैं क्योंकि उनको यह विश्वास हो जाता है वे जहाँ पर निवेश करने जा रहे हैं वहां पर उनको अच्छा रिटर्न मिलेगा और उनका पैसा भी सुरक्षित रहेगा.

यही बात किसी कम्पनी या व्यक्ति के बारे में लागू होती है. यदि किसी कम्पनी की रेटिंग, एजेंसियों द्वारा अच्छी कर दी गयी है तो उस कम्पनी को बाजार से पैसे उधर लेने में परेशानी नही होगी साथ ही बाजार में अच्छी छवि के कारण इसके शेयर बाजार में महंगे बिकेंगे. यही कारण है कि देश, कंपनी औए व्यक्ति हमेशा अच्छी रेटिंग की खोज में रहते है.

ज्ञातव्य है कि नवम्बर 2017 में मूडीज ने भारत की रैंकिंग को 13 वर्षों के इंतजार के बाद Baa3 से बेहतर करके Baa2 कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अब भारत की अर्थव्यवस्था हलचल से मुक्त अर्थात “स्टेबल” है और यहाँ पर बड़ी मात्रा में निवेश किया जा सकता है.

सारांश के तौर यह कहा जा सकता है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां बाजार की कार्यप्रणाली में बहुत ही अहम् रोल निभातीं हैं. लेकिन यह बात भी सच है कि निवेशकों को इन कंपनियों द्वारा दी गयी रैंकिंग को आँख बंद करके नही मानना चाहिए क्योंकि साल 2007 की आर्थिक मंदी के दौरान इन कंपनियों ने जिन कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं को बहुत अच्छी रेटिंग दी हुई थी वे भी दिवालिया घोषित हो गयी थीं.

महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न कंपनियों का चुनाव कैसे किया जाता है?

Continue Reading
Advertisement

Related Categories

Popular