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कंसोल बांड या परपेचुअल बॉन्ड क्या होता और इसे वॉर बांड क्यों कहा जाता है?

Hemant Singh

बॉन्ड क्या होता है? (What is a Bond)

साधारण शब्दों में बांड एक ऐसा लिखित दस्तावेज होता है जो इसे खरीदने वाले को एक निश्चित अवधि के लिए फिक्स रिटर्न देता है. जब आप कोई बांड खरीदते हैं, तो आप एक निर्धारित ब्याज दर पर एक निश्चित अवधि के लिए किसी कंपनी या सरकार को अपना पैसा  उधार देने के लिए सहमत होते हैं. बदले में वह कंपनी आपको एक फिक्स रिटर्न हर साल देने का वायदा करती है.

जब बांड किसी निजी कंपनी द्वारा जारी किया जाता है तो इसे कॉर्पोरेट बांड  (Corporate Bonds) कहते हैं. इस प्रकार के बांड पर ज्यादा रिटर्न मिलता है लेकिन रिस्क भी ज्यादा होता है.

दूसरी ओर यदि सरकार द्वारा बांड जारी किया जाता है तो इसे गवर्नमेंट बांड (Government Bonds) कहते हैं और इन बांड्स पर रिटर्न कम मिलता है लेकिन सिक्यूरिटी ज्यादा होती है.

परपेचुअल बॉन्ड क्या होता है? (What is a Perpetual Bond)

साधारण बॉन्ड, जितनी अवधि के लिए खरीदा जाता है उसकी प्रिंसिपल अमाउंट को बांड जारी करने वाला व्यक्ति लौटा देता है साथ ही तय अवधि तक फिक्स्ड रिटर्न भी देता है.
लेकिन परपेचुअल बॉन्ड इससे अलग होता है, इसमें कोई परिपक्वता अवधि नहीं होती है, साथ ही जो संस्था बांड जारी करता है वो परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद भी प्रिंसिपल अमाउंट को नहीं लौटाता है. लेकिन यदि बांड जारी करने वाला चाहे तो उस बांड को वापस  खरीद सकता है.

यदि परपेचुअल बॉन्ड जारी करने वाला इस बांड को वापस नहीं खरीदता है तो बांड धारक को इस बांड पर फिक्स रिटर्न हमेशा मिलता रहेगा. यह एक प्रकार से इक्विटी बांड भी होता है क्योंकि इक्विटी में आपको तब तक शेयर मिलता रहता है जब तक आप शेयर अपने पास रखते हैं.

क्या परपेचुअल बॉन्ड को रिडीम किया जा सकता है? (Can Perpetual Bonds be Redeemed)

इसे निवेशक की मर्जी के अनुसार रिडीम नहीं किया जा सकता है हाँ यदि जारी करने वाला चाहे तो इसे रिडीम किया जा सकता है.
इसके उलट यदि आप इसे किसी और व्यक्ति को बेच दो तो आपको प्रिंसिपल अमाउंट मिल सकता है.

इस प्रकार परपेचुअल बॉन्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह इसके खरीदार को बहुत लम्बे समय या फिर अनंतकाल तक एक तय ब्याज या रिटर्न देता रहेगा.

इसे वॉर बांड क्यों कहा जाता है? (Why Perpetual Bond is called War Bond)

दरअसल ब्रिटिश ट्रेजरी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1917 में युद्ध का खर्चा वहन करने के लिए परपेचुअल बॉन्ड जारी किये थे जिन पर 5% की दर से अभी भी ब्याज दिया जा रहा है. हालाँकि ब्रिटिश सरकार ने इस परपेचुअल बॉन्ड के 10% बांड वापस खरीद लिए हैं अर्थात अब इन 10% परपेचुअल बॉन्ड धारकों को हर साल कोई ब्याज नहीं मिलेगा.

इसी प्रकार के परपेचुअल बॉन्ड, South Sea Bubble of 1720 के दौरान ब्रिटिश सरकार ने जारी किये थे. दरअसल इस समय फ़्रांस और ब्रिटेन के बीच युद्ध चल रहा था और पैसे की तंगी की वजह से ब्रिटिश सरकार ने South Sea नाम कि कंपनी से कुछ मिलियन पाउंड उधार ले लिए और उसे परपेचुअल बॉन्ड जारी कर दिए थे और साउथ अमेरिका में व्यापार करने की मोनोपोली भी दे दी थी. ये बांड अभी तक चलता आ रहा है और ब्रिटिश गवर्नमेंट अभी तक ब्याज चुका रही है.

वर्तमान में भारत सरकार का खजाना भी कोरोना की लड़ाई में काफी खाली हो चुका है इसलिए ऐसी ख़बरें आ रहीं हैं कि भारत सरकार भी कोरोना बांड की मदद से बाजार ने 12 हजार करोड़ रुपये उठाने पर विचार कर रही है जो कि परपेचुअल बॉन्ड पैसा ही हो सकता है.

उम्मीद है कि इस लेख को पढने के बाद आपको समझ आ गया होगा कि परपेचुअल बॉन्ड क्या होता है क्यों जारी किया जाता है और कैसे काम करता है?

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