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भारतनेट परियोजना क्या है और इसकी क्या विशेषताएं हैं?

क्या आपने भारतनेट परियोजना के बारे में सुना है? यह परियोजना क्या है? इसकी क्या विशेषताएं हैं, कितने चरणों में इसको पूरा किया जाएगा, इसका क्या उद्देश्य है, इत्यादि को जानने के लिए आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

भारतनेट परियोजना (BharatNet Project) नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) का नया ब्रांड नाम है जिसे सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए अक्टूबर, 2011 में लॉन्च किया गया था. 2015 में इसका नाम बदलकर भारत नेट रखा गया था. इसका उद्देश्य देश के 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को 100 एमबीपीएस कनेक्टिविटी की गति से जोड़ना है.

हम आपको बता दें कि 8 जनवरी, 2018 को भारतनेट परियोजना का पहला चरण सरकार द्वारा पूरा कर लिया गया है यानी की देश में तकरीबन 1 लाख ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछ चुका है. साथ ही इसके दूसरे चरण में भी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी और मार्च 2019 तक इसको पूरा करने की संभावना है.

भारतनेट परियोजना के बारे में

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारतनेट विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड संपर्क करने का कार्यक्रम है. इसको मेक इन इंडिया के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है. यानी कि इसमें कोई भी विदेशी कंपनी का सहयोग नहीं लिया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट का प्रथम उद्देश्य था की मौजूदा ओप्टिकल फाइबर नेटवर्क को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाना. क्या आपको पता है कि सरकार ने इस नेत्व्रोक को दूरसंचार सेवा के लिए उपलब्ध करवाया है और ग्रामीण क्षेत्रों में देता, आवाज और वीडियो के माध्यम से संचरण आराम से हो सके एक ऐसे नेटवर्क की परिकल्पना की है. इसके लिए राज्य और निजी क्षेत्रों के साथ साझेदारी करके ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में नागरिकों या लोगों को सस्ती ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करना है.

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अब सवाल उठता है कि फाइबर ऑप्टिक्स क्या होता है?

संचार करने के लिए कांच या प्लास्टिक की धागों का फाइबर के रूप में उपयोग करने की एक तकनीक को फाइबर ऑप्टिक्स कहते हैं. यह किसी केबल के अंदर कांच के धागे का एक बंडल होता है जिसमें प्रत्येक फाइबर प्रकाश की तरंगों पर मिश्रित संदेशों को प्रेषित करने के लिए सक्षम होता है.

परियोजना के चरण

पहले चरण में अंडरग्राउंड ऑप्टिक फाइबर केबल (OFC) लाइनों के द्वारा ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को एक लाख ग्राम पंचायत उपलब्ध कराया गया है. दिसंबर 2017 तक पहले चरण को पूरा करलिया गया है.

दूसरा चरण भूमिगत फाइबर, पावर लाइनों, रेडियो और उपग्रह मीडिया पर फाइबर का इष्टतम मिश्रण का उपयोग करके देश में सभी 1.5 लाख ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. यह मार्च 2019 करने की अंतिम तिथि है. चरण-2 में सफल करने के लिए, बिजली के ध्रुवों पर OFC लगाने को भी शामिल किया गया है साथ ही इसमें राज्यों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी. यह भारतनेट रणनीति का एक नया हिस्सा है क्योंकि एरियल OFC द्वारा कनेक्टिविटी के तरीके में कम लागत, तेज कार्यान्वयन, आसान रखरखाव और मौजूदा पावर लाइन आधारभूत संरचना के उपयोग सहित कई फायदे हैं. ग्राम पंचायतों में नागरिकों को वाई-फाई हॉटस्पॉट कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रस्ताव दिया गया था.

2019 से 2023 तक तीसरे चरण में, अत्याधुनिक, फ्यूचर प्रूफ नेटवर्क, जिलों और ब्लॉक के बीच फाइबर समेत, अनावश्यकता प्रदान करने के लिए रिंग टोपोलॉजी के साथ बनाया जाएगा.

इस प्रोजेक्ट की फंडिंग किसके द्वारा की जा रही है?

भारतनेट को यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) के माध्यम से वित्त पोषित किया जा रहा है जिसमें लगभग 20,100 करोड़ की फंडिंग होगी. यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) की स्थापना ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में किफायती और उचित कीमतों पर लोगों को 'बेसिक' टेलीग्राफ सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने के मौलिक उद्देश्य से की गई थी. इसके बाद मोबाइल सेवाओं, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में OFC जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण सहित सभी प्रकार की टेलीग्राफ सेवाओं तक पहुंच को सक्षम करने के लिए सब्सिडी समर्थन प्रदान करने के लिए दायरा बढ़ाया गया है.

तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा कि भारत नेट परियोजना क्या है और इसको कितने चरणों में पूरा किया जाएगा.

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