भारत की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति क्या है?

भारतीय अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों अर्थात प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्र में बांटा गया है. प्राथमिक क्षेत्र में कृषि, मत्स्य पालन और सहयोगी गतिविधियां शामिल हैं. माध्यमिक क्षेत्र "उद्योग" क्षेत्र से संबंधित है और “विनिर्माण क्षेत्र” को माध्यमिक क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है. तीसरा सेक्टर तृतीयक क्षेत्र है जिसमें “सेवा क्षेत्र” को गिना जाता है.

भारतीय अर्थव्यवस्था का 17% हिस्सा प्राथमिक क्षेत्र से, 25% हिस्सा माध्यमिक क्षेत्र से आता है जबकि सबसे बड़ा हिस्सा तृतीयक क्षेत्र से 59% आता है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत "औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग" (DIPP) ने 4 नवंबर, 2011 को भारत की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति (NMP) को अधिसूचित किया था. इस नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान को 25% तक बढ़ाना और देश में 100 मिलियन नौकरियां पैदा करना है. इस लेख में भारत की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति के मुख्य बिन्दुओं के बारे में बताया गया है.
आज के समय में, चीन को दुनिया में विनिर्माण क्षेत्र में लीडर के रूप में जाना जाता है. चीन का विनिर्माण क्षेत्र इसकी अर्थव्यवस्था में लगभग 34% योगदान दे रहा है. सस्ता श्रम उपलब्ध होने के कारण यहाँ उत्पाद निर्माण की लागत कम आती है. यही कारण है कि भारतीय बाजार, चीन में निर्मित सस्ते उत्पादों से भरा हुआ है, खासकर खिलौनों के क्षेत्र में तो चीन के उत्पादों का भारत सहित पूरे विश्व में एकाधिकार सा हो गया है.


भारत के नीति निर्माता भी चीन की तर्ज पर ही भारत में विनिर्माण क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं ताकि देश की अर्थव्यवस्था का तीव्र विकास होने के साथ-साथ रोजगार के पर्याप्त अवसर सृजित किये जा सकें.
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान करीब 16% है जो कि भारत में मौजूद संभावनाओं की तुलना में बहुत कम है. एशिया महाद्वीप के लगभग सभी देशों में विनिर्माण क्षेत्र का अर्थव्यवस्था में बहुत अच्छा योगदान है.

भारत की नयी विनिर्माण नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि औद्योगिक विकास में राज्यों की भागीदारी जरूर हो. केंद्र सरकार, सक्षम नीतिगत ढांचा तैयार करेगी जिसमे सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रोत्साहन प्रदान किया जायेगा.

राष्ट्रीय विनिर्माण नीति का एक अन्य उद्येश्य ग्रामीण युवाओं को जरूरी कौशल प्रदान करके “रोजगार के योग्य” (employable) बनाना है. भारत पूरी दुनिया में सबसे युवा देश है. यहाँ 15 से 24 वर्ष की उम्र की जनसँख्या 18% है जबकि 24 से 54 वर्ष की जनसँख्या 42% के लगभग है. विश्व में अधिकत्तर देशों की जनसँख्या की औसत उम्र बूढी होती जा रही है लेकिन भारत में ऐसा नही है. इसलिए भारत के विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बहुत से नए और प्रशिक्षित हाथ तैयार हो रहे हैं.

ऐसी उम्मीद है कि अगले दशक तक 220 मिलियन से अधिक लोग भारत के श्रम बल में जुड़ जायेंगे जिसमे कम से कम 110 मिलियन लोगों को विनिर्माण क्षेत्र में योगदान मिलेगा.
राष्ट्रीय विनिर्माण नीति के महत्वपूर्ण उपकरण इस प्रकार हैं;
1. लघु और मध्यम उद्यमों के विकास को बढ़ावा मिलेगा.

2.युवा कार्य बल के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण और कौशल विकास के उपाय

3. व्यापार नियमों का विवेकीकरण और सरलीकरण

4. इकाइयों को बंद करने के लिए सरल और त्वरित प्रक्रिया

5. हरित प्रौद्योगिकी सहित प्रौद्योगिकी विकास के लिए वित्तीय और संस्थागत तंत्र.

राष्ट्रीय निवेश और विनिर्माण क्षेत्र (NIMZs), विनिर्माण नीति के लिए महत्वपूर्ण साधन हैं. इन क्षेत्रों (NIMZs) को बड़े "एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप" के रूप में माना गया है. अब तक 14 क्षेत्रों (NIMZs) को सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है.

इस प्रकार "भारत की राष्ट्रीय विनिर्माण नीति" की मदद से सरकार अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र के योगदान को भी सेवा क्षेत्र की तरह बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है. सेवा क्षेत्र इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माना जाता है.
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): विस्तृत जानकारी

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