भारत किन देशों से सबसे ज्यादा हथियार आयात करता है?

विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत का सैन्य बजट कुल जीडीपी का 2.4% है. वित्त वर्ष 2017-18 के लिए रक्षा व्यय 2,74,114 करोड़ रुपये था जिसमे पेंशन की राशि शामिल नही है.
वर्ष 2012 और 2016 के बीच हथियारों के वैश्विक आयात में भारत का हिस्सा 13% था इसके बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और अल्जीरिया का नम्बर आता है. वर्ष 2012-16 की अवधि में सऊदी अरब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक था. वर्ष 2007-11 की अवधि में सऊदी अरब के शस्त्र आयात में 212% की वृद्धि हुई थी. जबकि 2007 और 2011 के बीच की अवधि में हथियारों के वैश्विक आयात में भारत का हिस्सा 9.7% था. भारत ने 2007-11 और 2012-16 के बीच अपने शस्त्र आयात को 43% बढ़ाया. पिछले चार सालों में भारत का रक्षा आयात अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों चीन और पाकिस्तान से कहीं अधिक है.
(विश्व के सबसे बड़े 10 हथियार आयातक देशों के नाम)

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मोदी सरकार ने 250 अरब डॉलर के बजट के साथ देश में ही लड़ाकू जेट, बंदूकों और पनडुब्बियों का निर्माण करने का संकल्प लिया है. लेकिन इतने सभी प्रयत्नों के बाद भी भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस, अमेरिका और इजराइल जैसे देशों पर निर्भर रहता है, जबकि चीन अपनी रक्षा जरूरतों का बहुत बड़ा हिस्सा खुद बनाता है और तो और  चीन, फ़्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों को रक्षा सामग्री का निर्यात भी करता है.


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भारत को रक्षा सामग्री निर्यात करने वाले देशों के नाम इस प्रकार हैं:
1.रूस: स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान (SIPRI)की रिपोर्ट के अनुसार (2012 और 2016 के बीच) भारत अपनी रक्षा जरूरतों का 68% भाग रूस से आयात करता है. भारत रूसी हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है, जो कि मॉस्को के कुल निर्यात का 38% हिस्सा खरीदता है. भारत रूस से मुख्यतः रणनीतिक रक्षा उपकरण (Strategic Defence Equipment),एस 400 मिसाइल शील्ड ,पनडुब्बी, ड्रोन इत्यादि खरीदता है.

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2.अमेरिका: रूस के बाद भारत को रक्षा सामग्री निर्यात करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश अमेरिका (14%) है. अमेरिका ने भारत को लॉकहेड मार्टिन सी -130 हरक्यूलिस विमान, अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, एम 777 होवित्ज़र बंदूकें, ड्रोन इत्यादि निर्यात किये है. सन 2013 में भारत अमेरिका से हथियार खरीदने वालों में सबसे आगे था लेकिन 2014 में सऊदी अरब ने भारत का स्थान ले लिया है. वर्तमान में भारत अमेरिका से हथियार खरीदने वाले देशों में 7 वें स्थान पर है.
3.इजराइल: अमेरिका के बाद इजराइल द्वारा भारत को सबसे अधिक रक्षा सामान निर्यात कियता जाता है. भारत अपने कुल रक्षा आयात का 8.2% इजराइल से आयात करता है. भारत को मध्यम श्रेणी की सतह से हवा वाली मिसाइलें, लांचर और संचार प्रौद्योगिकी, ड्रोन इत्यादि बेचता है. भारत, इजरायल के हथियारों के कुल निर्यात के 41% हिस्से को खरीदता है.
4.फ़्रांस: भारत और फ़्रांस के बीच के रक्षा क्षेत्र में बहुत मजबूत रिश्ते हैं. भारत ने फ़्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट का सौदा 7.87 अरब पौंड में तय किया है.

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5.ब्रिटेन के कुल हथियार निर्यात का 11% हिस्सा भारत द्वारा खरीदा जाता है जो कि भारत को ब्रिटेन के हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक बनाता है. इन सब देशों के अलावा भारत, जापान से भी बड़ी मात्र में रक्षा सामग्री का आयात करता है.
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दुनिया के सबसे बड़े पांच हथियार निर्यातक देश हैं: अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी. इन सभी देशों द्वारा पिछले 5 सालों में हथियारों की बिक्री में हिस्सेदारी 74% का योगदान दिया जा रहा है. इसमें अमेरिका अपने कुल हथियारों की बिक्री का 47% हिस्सा मध्य पूर्व के देशों को निर्यात करता है.


लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि भारत अमेरिका, यूके, इज़राइल और रूस सहित 22 देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात भी करता है.
भारत, फोर्जिंग उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक असेंबली, फ्लाइट कंट्रोल पैनल्स को अमेरिका को निर्यात करता हैं जबकि, यह संचारण ट्यूब (transmitting tubes) ब्रिटेन को बेचता है और MIG और सुखोई 30 एयरक्राफ्ट के स्पेयर पार्ट्स और इससे सम्बंधित सेवाएं रूस को दी हैं. इसके अलावा भारत से होने वाले रक्षा निर्यात में चीता हेलीकॉप्टर अफगानिस्तान को , नेपाल को ध्रुव हेलीकाप्टर और बुलेटप्रूफ जैकेट, मलेशिया को सुखोई 30 एविऑनिक्स और MIG जबकि ओमान को जगुआर विमान के पुर्जों और सेवाओं को बेचा जाता है.


सारांश रूप में यह कहा जा सकता है कि भारत रक्षा सामग्री के आयात पर करीब 25000 मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है जिसके कारण यह पूरी दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा सामग्री आयातक देश बना हुआ है. हालाँकि यह आंकड़ा अपनी पीठ थपथपाने वाला तो बिलकुल नही हो सकता है. यदि सरकार अपनी विदेश नीति को ठीक से चलाये तो इस खर्च को कम करके शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर किया जा सकता है.
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