विश्व अल्जाइमर दिवस 2019: इतिहास और तथ्य

इस दिन आर्थिक सहयोग के माध्यम से अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगो की मदद करते हैं. आखिर अल्जाइमर रोग है क्या, कैसे होता है, विश्व अल्जाइमर दिवस का क्या इतिहास है इत्यादि. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

कुछ खतरनाक तथ्य

• यह एक वंशानुगत रोग के रूप में जाना जाता है. यह परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता है.
• वर्तमान में करीब 5.8 मिलियन अमेरिकी इस रहस्यमय बीमारी के साथ जीवन यापन कर रह रहे हैं और लगभग 50 मिलियन लोग दुनिया भर में इस बीमारी से परेशान हैं.
• यह संयुक्त राज्य अमेरिका में मौत का छठा प्रमुख कारण है.
• दुर्भाग्य से इस रोग पर अभी तक कोई नियंत्रण नहीं किया गया है. सबसे बड़ी बात है की आज भी इस रोग पर अनेक अनुसंधान हो रहे हैं.

इतिहास:

अल्जाइमर रोग डॉ अलोइस अल्जाइमर के नाम पर रखा गया है. इतिहास यह बताता है की 1906ईस्वी में डॉ अल्जाइमर नें एक महिला के मस्तिष्क के ऊतकों में परिवर्तन देखा. जिसके परिणामस्वरूप असामान्य वह महिल मानसिक बीमारी से मर गयी थी. इस रोग में डॉ अलोइस अल्जाइमर नें यह देखा की स्मृति का चला जाना, भाषा से जुड़ी समस्या, और अप्रत्याशित व्यवहार आदि प्रमुख लक्षण दिखाई दे रहे हैं. उस महिला की मृत्यु के बाद डॉ अलोइस अल्जाइमर ने उसके दिमाग का परीक्षण किया और यह पाया की उसके दिमाग में कुछ उतकों के टुकडे फंसे हुए हैं(जिसे अब न्यूरोफिब्रिलिरी कहा जाता है). साथ ही उसके मस्तिष्क में कई परेशानियाँ हैं(जिसे अब अम्लोइड प्लेक कहा जाता है). डॉ अलोइस अल्जाइमर ने अपने अध्ययन के दौरान यह पाया की इस बीमारी का प्रमुख कारण प्लेक और उतकों का उलझना है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी पता लगाया कि तंत्रिका कोशिकाओं और मस्तिष्क(न्यूरॉन्स) के बीच संपर्क का न होना भी इस रोग का प्रमुख कारण है.

डॉक्टर अब भी इस बीमारी में अपने अनुसन्धान कार्यों को गति दे रहे हैं ताकि इस रोग पर नियंत्रण कायम किया जा सके. साथ कोई बेहतर उपाय निकला जा सके.

लक्षण:

इस रोग के प्रारंभिक लक्षणों में से कुछ प्रमुख हैं. जैसे- अनिद्रा, चिंता, परेशानी, भटकाव और अवसाद हैं. डॉक्टरों के द्वारा नियमित प्रक्रिया की जांच करने के लिए नैदानिक परीक्षण, स्मृति परीक्षण, सीटी स्कैन  और एमआरआई आदि जाँच किये जाते हैं.

• अल्जाइमर के प्रारंभिक लक्षणों में से कुछ प्रमुख हैं जैसे स्मृति का खोना, निर्णय से जुड़ी समस्यायें, सवालों का बार-बार दोहराया जाना, मुसीबत से निपटने में परेशानी का सामना करना, रुपयों का बेहतर प्रबंधन न कर पाना. साथ ही अपने सामान्य दैनिक कार्यों को पूरा करने में असफल रहना आदि. इस चरण में मरीजों का अकसर इलाज किया जाना चाहिए और उसका निदान भी प्रस्तुत किया जाना चाहिए.
•  इस बीमारी के मध्य चरण में रोगी, परिवार के सदस्यों की पहचान नहीं कर पता है. साथ ही अपने कपड़ों के सन्दर्भ में अजीबोगरीब हरकत करता है. इसके अलावा वह प्रतिदिन के कार्यों में भुलक्कड़ प्रवृति का संपादन करने लगता है.
• सबसे गंभीर अवस्था में रोगियों में संवाद की कमी देखि जाती है. वह पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर रहने लगता है.

देखभाल

अल्जाइमर रोगियों  को संभालना एक बड़ी चुनौती भरा कार्य है.

•  इस अवस्था में रोगियों का निरंतर नैदानिक परीक्षण किया जाना चाहिए ताकि उनके व्यवहार में परिवर्तन को समझा जा सके.
• इस अवस्था में रोगियों को उनके दैनिक कार्यों का संचालन करने के लिए मदद,प्यार और देखभाल की बहुत जरूरत होती है.
• इस अवस्था में देखभाल करने वाले को रोगी के साथ खासतौर से दोस्ताना व्यवहार करना चाहिए.
• रोगियों को सक्रिय रखने के लिए उन्हें कुछ शारीरिक व्यायाम करना चाहिए.
• रोगियों से हमेशा बातचीत करते रहना चाहिए ताकि वे प्रतिदिन के अपने कार्यों का समपादन कर सकें और पूर्व के अपने कार्यों को याद रख सकें.

हम 21 सितंबर को अल्जाइमर दिवस पर अपना समर्थन दिखाने के लिए क्या कर सकते हैं

• अपना समर्थन दिखाने के लिए बैंगनी रंग का कपड़ा पहनना चाहिए(बैंगनी रंग रहस्य का एक रंग है और यह रोग भी  एक रहस्यमय बीमारी है)
• आप प्रदर्शनियों के माध्यम से धन जुटाने में लोगो की मदद कर सकते हैं. चूँकि इस रोग के अनुसन्धान में काफी धनराशी के जरूरत होती है, अतः ज्यादे से ज्यादे मदद के जरुरत होती है.
•  अनुसन्धान के महंगा होने के कारण आप दान कर सकते है.
• या फिर आप इस रोग के प्रति चिंता को दिखाने के लिए एक सरल तरीका अपना सकते हैं, अर्थात अपने फेसबुक पेज को बैंगनी रंग में रख सकते हैं.

 

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