वर्ल्ड वाइड वेब: आविष्कार, इतिहास और उपयोग

हमारे जीवन में इंटरनेट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आजकल थोड़ी-सी जानकारी के लिए भी हम इंटरनेट पर निर्भर रहते हैं जैसे कि रिसर्च करना, अपने धन का प्रबंधन करना, देश भर में प्रियजनों के साथ संपर्क रखना इत्यादि. देखा जाए तो व्यापार की दुनिया भी ज्यादातर इंटरनेट पर निर्भर है, वित्तीय लेनदेन सेकंड में नियंत्रित किए जाते हैं और संचार भी तात्कालिक इन्टरनेट के माध्यम से हो जाता है. यहां तक कि सरकारें भी अपने दैनिक कार्यों इत्यादि का प्रबंधन करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं. वर्ल्ड वाइड वेब इंटरनेट का सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है क्योंकि इसके बिना एक-दूसरे से जुड़ना बहुत मुश्किल है.

इन्टरनेट का इस्तेमाल करते वक्त क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि किसी भी वेबसाइट के एड्रेस से पहले लगने वाला www का क्या अर्थ होता है? इसका अविष्कार किसने किया और कब? इसका इतिहास क्या है? इसके क्या फायदे और नुक्सान हैं इत्यादि. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं.

वर्ल्ड वाइड वेब क्या है?

यह हाइपरटेक्स्ट मार्क-अप भाषा या HTML का उपयोग करके हाइपरमीडिया को संदर्भित करता है. इसे WWW, W3 या web के नाम से भी जाना जाता है. यह इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सर्विस है. इसके जरिये कई सारे वेब servers और क्लाइंट्स एक साथ जुड़ते है. ये हम सब जानते हैं कि वेब सर्वर के HTML डाक्यूमेंट्स में images, videos और अलग-अलग प्रकार के ऑनलाइन कंटेंट्स स्टोर रहते हैं जिन्हें वेब की मदद से एक्सेस किया जा सकता है. यहीं आपको बता दें कि हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट में कोई भी शब्द एक पॉइंटर के रूप में एक अलग हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट में निर्दिष्ट किया जा सकता है जहाँ उस शब्द से संबंधित अधिक जानकारी मिल सकती है.

WWW एक प्रकार का इनफार्मेशन स्पेस है जहां पर डाक्यूमेंट्स और अन्य संसाधनों की पहचान यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर यूआरएल जैसे https://www.example.com द्वारा की जाती है जो हाइपरटेक्स्ट द्वारा इंटरलिंक हो सकते हैं और इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किए जा सकते हैं. WWW संसाधनों को वेब ब्राउज़र के रूप में जाना जाने वाले सॉफ़्टवेयर एप्लिकेशन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं द्वारा एक्सेस किया जाता है.

इंटरनेट पर 1 मिनट में क्या-क्या होता है?

इसलिए, ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि दुनियाभर में जितने भी वेबसाइटस और वेब पेजेज हैं जिन्हें आप अपने वेब ब्राउज़र पर देखते हैं वे सभी वेब से जुड़े होते हैं और इन्हें एक्सेस करने के लिए हाइपरटेक्स्ट ट्रान्सफर प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किया जाता है. ये सारे वेब servers का एक प्रकार का कलेक्शन ही तो है. अधिक समझने के लिए जब किसी ब्राउज़र के एड्रेस बार पर किसी वेबसाइट के URL से पहले www लगा हो तो इसका अर्थ है कि वह वेबसाइट किसी वेब सर्वर पर स्टोर है जो कि वेब से जुड़ा हुआ है इसीलिए ही तो उसे एक्सेस करने के लिए www की मदद ली जाती है.

क्या आप जानते हैं कि हाइपरटेक्स्ट क्या होता है?

हाइपरटेक्स्ट का मतलब है कि यह एक ऐसा टेक्स्ट है जिसमें अन्य टेक्स्ट के 'लिंक' होते हैं और जरूरी नहीं है कि वह लीनियर हों. यह शब्द 1965 के आसपास टेड नेल्सन द्वारा इस्तेमाल किया गया था.

वर्ल्ड वाइड वेब का इतिहास?


Source: www.in.pinterest.com

1989 में, CERN में काम करते हुए, ब्रिटिश वैज्ञानिक टीम बेर्नेर्स–ली ने वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का आविष्कार किया. यह दुनिया भर के विश्वविद्यालयों और संस्थानों में वैज्ञानिकों के बीच स्वचालित सूचना-साझाकरण की मांग को पूरा करने के लिए विकसित किया गया था. क्या आप जानते हैं कि CERN एक अलग प्रयोगशाला नहीं है; इसमें 100 से अधिक देशों के लगभग 17,000 वैज्ञानिक शामिल हैं. WWW का मूल विचार कंप्यूटर, डेटा नेटवर्क और हाइपरटेक्स्ट की विकसित तकनीकों को वैश्विक सूचना प्रणाली का एक शक्तिशाली और आसान उपयोग में विलय करना था.

आपको बता दें कि मार्च 1989 में टीम बर्नर्स-ली ने WWW के लिए पहला प्रस्ताव और मई 1990 में अपना दूसरा प्रस्ताव लिखा था. नवंबर 1990 में, रॉबर्ट कैलीयू (Robert Cailliu) के साथ बेल्जियम के सिस्टम इंजीनियर के रूप में इस प्रणाली को प्रबंधन प्रस्ताव के रूप में औपचारिक रूप दिया गया था. इस डाक्यूमेंट्स में हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट के वेब ब्राउज़र को देखा जा सकता है. 1992 में इलिनोइस विश्वविद्यालय ने पहला वेब ब्राउज़र पेश किया, एक ऑनलाइन सर्च टूल, जो वेब पर मौजूद सभी सूचनाओं को "surfs" करता है, मैच का पता लगाता है, और फिर रिजल्ट्स को रैंक करता है.

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वर्ल्ड वाइड वेब कैसे कार्य करता है?

जब कोई यूजर वेब डॉक्यूमेंट को खोलता है तो वह इसके लिए एक प्रकार की एप्लीकेशन का इस्तेमाल करता है जिसे वेब ब्राउज़र कहते हैं. जब किसी वेब ब्राउज़र मैं डोमेन या URL का नाम लिखा जाता है तो ब्राउज़र http के डोमेन एड्रेस को खोजने की रिक्वेस्ट generate करता है क्योंकि हर डोमेन का अपना अलग एड्रेस होता है. इसके बाद ब्राउज़र डोमेन name को सर्वर IP एड्रेस में बदल देता है. जिसको www उस सर्वर में सर्च करता है. जब एड्रेस वह सर्वर जिससे डोमेन को होस्ट किया गया है वह मैच हो जाता है तो सर्वर उस पेज को ब्राउज़र के पास वापस भेज देता है. जिसको आप अपने वेब ब्राउज़र पर आसानी से देख सकते है.

वर्ल्ड वाइड वेब के लाभ

- जानकारी की उपलब्धता और दुनिया भर से आसानी से कांटेक्ट स्थापित किया जा सकता है.
- प्रकटीकरण (divulgation) की लागत को कम करता है.
- रैपिड इंटरैक्टिव संचार जो विभिन्न सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
- प्रोफेशनल कांटेक्ट की स्थापना के साथ-साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान.
- प्रारंभिक कनेक्शन की कम लागत.
- जानकारी के विभिन्न स्रोतों तक पहुंच को सुगम बनाता है, जो लगातार अपडेट किया जाता है.
- यह एक प्रकार का वैश्विक मीडिया (global media) बन गया है.

कुछ नुकसान इस प्रकार हैं:
- ओवरलोड और अधिक जानकारी का खतरा.
- कुशल सूचना खोज रणनीति की आवश्यकता है.
- सर्च धीमा हो सकता है.
- जानकारी को फ़िल्टर करना और प्राथमिकता देना मुश्किल हो सकता है.
- नेट भी ओवरलोड हो जाता है क्योंकि बड़ी संख्या में उपयोगकर्ता इसका इस्तेमाल करते हैं.
- उपलब्ध डेटा इत्यादि पर गुणवत्ता का नियंत्रण करना कठिन हो सकता है.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि वर्ल्ड वाइड वेब हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज या HTML का उपयोग करने वाला हाइपरमीडिया है. यह अनूठी भाषा उपयोगकर्ता को उन सूचनाओं तक पहुंचने में मदद करेगी जो लिंक की जाती हैं ताकि जब कोई व्यक्ति किसी लिंक के एक हिस्से पर चयन या क्लिक करे तो स्वचालित रूप से निर्दिष्ट जानकारी मिल जाए. अनूठी विशेषता यह है कि यह उपयोगकर्ताओं को एक शब्द पर 'क्लिक' करने का अधिकार देता है और इससे संबंधित वेब स्थान पर भी ले जाता है.

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