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एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) : क्षेत्रीय आर्थिक मंच

एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) एक क्षेत्रीय आर्थिक मंच है जिसका निर्माण हुआ 1989 में ताकि एशिया-प्रशांत की बढ़ती निर्भरता का उत्तोलन कर सके। इस क्षेत्रीय आर्थिक मंच के निर्माण के पीशे का मूल उद्देशय यह था की संतुलित, समावेशी, टिकाऊ, अभिनव और सुरक्षित विकास और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में तेजी को बढ़ावा देने के द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक से अधिक समृद्धि बनायीं जा सके।
Jul 21, 2016 14:24 IST
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एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) एक क्षेत्रीय आर्थिक मंच है जिसका निर्माण हुआ 1989 में ताकि एशिया-प्रशांत की बढ़ती निर्भरता का उत्तोलन कर सके। इस क्षेत्रीय आर्थिक मंच के निर्माण के पीशे का मूल उद्देशय यह था की संतुलित, समावेशी, टिकाऊ, अभिनव और सुरक्षित विकास और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण में तेजी को बढ़ावा देने के द्वारा क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक से अधिक समृद्धि बनायीं जा सके।

Jagranjosh

एपेक के कार्य

बहुपक्षीय आर्थिक मंच : यह एक सहकारी, बहुपक्षीय आर्थिक और व्यापार मंच के रूप में कार्य करती है। यह दुनिया में केवल अकेला अंतरराष्ट्रीय अंतर सरकारी समूह है जो की प्रतिबद्ध है व्यापार और निवेश की बाधाओं को कम करने के लिए बिना इसके सदस्यों को कानूनी रूप से बाध्यकारी दायित्वों में प्रवेश करे बिना। एपेक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है बातचीत और एक आम सहमति के आधार पर हुए निर्णय को बढ़ावा देकर, साथ ही सभी सदस्यों के विचारों को बराबर महत्व देकर।

मेजबान अर्थव्यवस्था : एपेक मेजबान अर्थव्यवस्था जिम्मेदार है वार्षिक आर्थिक नेताओं की बैठक, चुने हुए मंत्रिस्तरीय की बैठक, वरिष्ठ अधिकारीयों की बैठक, एपेक व्यापार सलाहकार परिषद और एपेक अध्ययन केंद्रों कंसोर्टियम आयोजन करने के लिए। 2009 तक, मेजबान ने एपेक सचिवालय में कार्यकारी निदेशक का पद भी भर लिया है। 2010 से, नियुक्ति एक निश्चित अवधि के आधार (3 वर्ष) पर किया जाएगा और यह पद अर्थव्यवस्थाओं के सभी सदस्य, उम्मीदवारी के लिए खोल दिया जाएगा।

अनुदान : यह एक दान देने वाला संगठन नहीं है, लेकिन अर्थव्यवस्था के सदस्यों को स्वैच्छिक योगदान देता है ताकि उन् परियोजनाओं का समर्थन कर सके जो कि एपेक के व्यापार और निवेश के उदारीकरण और सरलीकरण लक्ष्यों को आगे बढ़ाये और साथ ही निर्माण की जरूरत को पूरा कर सके, विशेष रूप से एपेक की अर्थव्यवस्थाओं को विकासशील बनाना। योजनाएं आम तौर पर -

• एपेक आर्थिक नेताओं और एपेक मंत्रियों की प्राथमिकताओं से संबंधित होती हैं

• कम से कम कई एपेक अर्थव्यवस्थाओं के सदस्यों के इंटरेस्ट को पूरा करते हैं

• क्षमता का निर्माण करते हैं

• आर्थिक क्षमता में सुधार, और

• प्रोत्साहित करता है व्यापार के क्षेत्र, गैर सरकारी संस्थाओं और महिलाओं की भागीदारी को।

एपेक के प्रशासनिक ढांचे

एपेक सचिवालय: यह समन्वय, तकनीकी और सलाहकार सहायता प्रदान करता है और साथ ही सूचना प्रबंधन, संचार और सार्वजनिक आउटरीच सेवाएं। यह सिंगापुर में स्तिथ है और एपेक प्रक्रिया के लिए मूल समर्थन तंत्र के रूप में काम करता है। यह एक केंद्रीय परियोजना प्रबंधन की भूमिका निभाता है, एपेक के अर्थव्यवस्थाओं के सदस्यों की सहायता और एपेक मंचों के साथ 250 से अधिक एपेक वित्त पोषित परियोजनाओं की देखरेख करता है। एपेक के वार्षिक बजट भी एपेक के सचिवालय द्वारा प्रशासित किया जाता है।

कर्मचारी भर्ती करना : यह एक कार्यकारी निदेशक, डॉ एलन बोलार्ड के नेतृत्व में है। 2009 वह अंतिम साल के रूप में चिह्नित है जब मेजबान अर्थव्यवस्था में से राजदूतों के रैंक वाले अधिकारी द्वारा पद एक सालाना घूर्णन आधार पर आयोजित किया जाएगा। 2010 से नियुक्ति तीन साल की तय अवधि के आधार पर किया गया है और एपेक के अर्थव्यवस्थाओं के 21 सदस्य में से किसी भी पेशेवर उम्मीदवारों के लिए खुला है। एपेक के सचिवालय कार्यक्रम निदेशक की भर्ती एक छोटे से कार्यक्रम निर्देशकों के मंडली द्वारा की जाती है, एपेक के अर्थव्यवस्थाओं के सदस्य से समर्थित होती है। इसके अलावा, पेशेवर कर्मचारी एपेक सचिवालय में विशेषज्ञ और सहायता कार्यों को पूरा करते हैं।

आईएसओ प्रमाणन : 2002 मे, एपेक सचिवालय ने आईएसओ 9001 गुणवत्ता प्रबंधन प्रमाणन प्राप्त किया। इससे साबित होता है की एपेक सचिवालय द्वारा कोशिशें की गई हैं ताकी एक बेहतर प्रशासनिक और गतिविधियों को समर्थन दिया जा सके। एपेक सचिवालय पहली बहुपक्षीय व्यापार से संबंधित आईएसओ प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाली सचिवालय है।