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Bal Gangadhar Tilak 164th birth anniversary: स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा, जानें उनके जीवन से जुड़े 10 अज्ञात तथ्य

बाल गंगाधर तिलक को लोकमान्य तिलक के नाम से भी जाना जाता है. उनका जन्म 23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था. उन्हें उनके प्रसिद्ध नारे के लिए जाना जाता है 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा'. आइए बाल गंगाधर तिलक, उनके बचपन, इतिहास, उपलब्धियों और कुछ अज्ञात तथ्यों के बारे में अध्ययन करते हैं.
Jul 23, 2020 13:27 IST
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Bal Gangadhar Tilak
Bal Gangadhar Tilak

बाल गंगाधर तिलक एक समाज सुधारक, भारतीय राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता सेनानी थे. वह स्वराज के प्रबल अनुयायी थे. 23 July, 1856 को उनका जन्म हुआ था. उन्होंने मराठी या हिंदी में अपने भाषण दिए. इसमें कोई संदेह नहीं है, उन्होंने ब्रिटिशों के खिलाफ अपना शासन बनाकर भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में मदद की और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन में बदल दिया. 

उपनाम: बाल,लोकमान्य
जन्म: 23 July, 1856
जन्म स्थान: रत्नागिरी, महाराष्ट्र
पिता का नाम: गंगाधर तिलक
माता का नाम: पार्वतीबाई
पत्नी का नाम: सत्यभामाबाई
बच्चे: रमाबाई वैद्य, पार्वतीबाई केलकर, विश्वनाथ बलवंत तिलक, रामभाऊ बलवंत तिलक, श्रीधर बलवंत तिलक, और रमाबाई साने।
शिक्षा: डेक्कन कॉलेज, पुणे, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज या मुंबई विश्वविद्यालय (अब मुंबई) से एल.एल.बी की डिग्री
के रूप में प्रसिद्ध: लोकमान्य तिलक
एसोसिएटेड: इंडियन नेशनल कांग्रेस, इंडियन होम रूल लीग, डेक्कन एजुकेशनल सोसायटी
प्रकाशन: The Arctic Home in the Vedas (1903),श्रीमद भगवद गीता रहस्य(1915)
 मृत्यु: 1 अगस्त, 1920
स्मारक: तिलक वाड़ा, रत्नागिरी, महाराष्ट्र

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बाल गंगाधर तिलक के बारे में आश्चर्यजनक और अज्ञात तथ्य

1. उनका जन्म एक मध्यम वर्ग-ब्राह्मण परिवार में हुआ था. 1876 में, उन्होंने पूना में गणित और संस्कृत में डेक्कन कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. 1879 में, उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय (अब मुंबई) से कानून की पढाई को पूरा किया. इसके अलावा, उन्होंने पूना में एक निजी स्कूल में गणित पढ़ाने का फैसला किया जहाँ से उनका राजनीतिक जीवन शुरू हुआ.

2. उन्होंने विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा में लोगों को शिक्षित करने के लिए 1884 में डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की, क्योंकि उस समय वे और उनके सहयोगी मानते थे कि अंग्रेजी उदार और लोकतांत्रिक आदर्शों के लिए एक शक्तिशाली भाषा है.

3. उन्होंने मराठी में  'केसरी’ (“The Lion”) और अंग्रेजी में ’The Mahratta’ जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को जागृत करना शुरू किया. ये दोनों पत्र जल्द ही जनता में बहुत लोकप्रिय हो गए. तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की काफी आलोचना की. उन्होंने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि तुरन्त वे भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे.

4. बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में गणेश और 1895 में शिवाजी दो महत्वपूर्ण उत्सवों को सार्वजनिक रूप दिया था. इन त्योहारों के माध्यम से वे जनता में देशप्रेम और अंग्रेज़ो के अन्यायों के विरुद्ध संघर्ष का साहस भरना चाहते थे.

5. बाल गंगाधर तिलक 1890 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) में शामिल हो गए. उन्होंने स्वराज का नारा बुलंद किया.

6. भारत में, उन्होंने स्वदेशी आंदोलन शुरू किया. जमशेद टाटा और तिलक ने मिलकर राष्ट्रीय आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए बॉम्बे स्वदेशी स्टोर्स की भी स्थापना की.

7. क्या आप जानते हैं बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल और लाला लाजपत राय को एक साथ 'लाल-बाल-पाल' के नाम से जाना जाता है. तिलक 1891 के 1891 एज ऑफ़ कंसेन्ट एक्ट के खिलाफ थे. 

8. राजनीतिक उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, तिलक एक जन आंदोलन बनाना चाहते थे जो नरमपंथियों की राय से अलग हो और इसलिए, 1907 में सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और चरमपंथियों में विभाजन हुआ. अंग्रेजों ने स्थिति का लाभ उठाया और बाल गंगाधर तिलक को बर्मा (म्यांमार) की मंडलीय जेल भेजा और वहां पर उनको छह साल की सजा काटनी पड़ी.

9. अप्रैल 1916 में, बाल गंगाधर तिलक ने "इंडियन होम रूल लीग" की शुरुआत की. उनका प्रसिद्ध नारा था 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा'. सितंबर 1916 में, एनी बेसेंट ने मद्रास (अब चेन्नई, तमिलनाडु) में होम रूल लीग की शुरुआत की. 1 अगस्त, 1920 को बाल गंगाधर तिलक का निधन हो गया.

10. उन्होंने The Arctic Home in the Vedas प्रकाशित किया जो आर्यों की उत्पत्ति का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अलावा, ओम राउत ने फिल्म लोकमान्य: एक युग पुरुष का निर्देशन किया, जो 2 जनवरी, 2015 को रिलीज़ हुई थी.

बाल गंगाधर तिलक या लोकमान्य तिलक ने लोगों को प्रभावित किया, स्वराज का संदेश फैलाया. वह एक महान वक्ता थे और उन्होंने कई लोगों को प्रेरित किया. महाराष्ट्र में, गणेश चतुर्थी को बड़े पैमाने पर मनाया जाता है और इसे मुख्य त्योहारों में से एक माना जाता है जो तिलक द्वारा ही शुरू किए गया था. उन्होंने काफी समय हिंदू धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने में भी बिताया.

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