कैम्ब्रिज एनालिटिका डेटा चोरी विवाद क्या है ?

कैम्ब्रिज एनालिटिका (सीए) एक व्यापारिक और राजनीतिक सलाहकार फर्म है, जो डेटा खनन, डेटा बिक्री और चुनावी प्रक्रिया के लिए डेटा विश्लेषण जैसे कार्यों में संलग्न है. इस फर्म ने भारत के राजनीतिक दलों को अपना क्लाइंट बनाकर उन्हें चुनाव जीतने के लिए फेसबुक यूजर्स के बारे में जानकारी दी और बताया कि किस तरह के मुद्दे उछालकर चुनाव जीता जाये.
Apr 13, 2018 16:52 IST
    Cambridge Analytica data dispute

    कैम्ब्रिज एनालिटिका (सीए) एक व्यापारिक और राजनीतिक सलाहकार फर्म है, जो डेटा खनन, डेटा बिक्री और चुनावी प्रक्रिया के लिए डेटा विश्लेषण जैसे कार्यों में संलग्न है. कैम्ब्रिज एनालिटिका (सीए) को 2013 में SCL समूह की शाखा के रूप में शुरू किया गया था. इस फर्म पर आंशिक रूप से मालिकाना हक “रोबर्ट मर्सर” के परिवार के पास है. इस फर्म के ऑफिस; लंदन, न्यूयॉर्क शहर, और वाशिंगटन, डीसी में हैं.
    दिसंबर 2015 में, द गार्जियन ने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राजनेता टेड क्रूज़, अमेरिका के लोगों का फेसबुक डेटा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे. जबकि जिन फेसबुक यूजर्स की जानकारी लीक हो रही थी उनको इस बात का पता भी नही था कि फेसबुक उनकी व्यक्तिगत जानकारी को कई कंपनियों (जैसे कैंब्रिज एनालिटिका) को बेच रही है और ये कम्पनियाँ इस जानकारी का अध्ययन कर प्राप्त निष्कर्ष को उन राजनीतिक पार्टियों को बेच रही थीं जो कि चुनाव लड़ रही थीं.

    इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट तब सामने आयी जब मार्च 2018  में, कई मीडिया समूहों ने कैंब्रिज एनालिटिका के व्यापार तरीकों के बारे में लेख छापे. न्यूयॉर्क टाइम्स और द ऑब्जर्वर ने फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका के बीच डेटा आदान प्रदान के बारे में बताया. यहीं से फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका के डेटा घोटाले का पर्दाफाश हुआ था.

    इस खुलासे में सबसे अधिक विश्वसनीय जानकारी कैंब्रिज एनालिटिका के पूर्व कर्मचारी क्रिस्टोफर वाइली ने दी. क्रिस्टोफर ने बताया कि कितनी बड़ी मात्रा में डेटा बेचा गया, किस तरह का डेटा बेचा गया, किन लोगों का डेटा बेचा गया और खरीदारों ने इस जानकारी को किस तरह इस्तेमाल किया.
    लोगों की किस प्रकार की जानकारी बेची गयी?

    फेसबुक - कैंब्रिज एनालिटिका डेटा स्कैंडल में 87 मिलियन फेसबुक यूजर की व्यक्तिगत जानकारी शेयर किये जाने की आशंका है; जो कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2014 में इकट्ठा करना शुरू किया था.हालांकि कैम्ब्रिज एनालिटिका का कहना है कि उसने केवल 30 मिलियन फेसबुक यूज़र के डेटा ही एकत्र किए हैं.
    कैम्ब्रिज एनालिटिका ने लोगों की उम्र, जन्मदिन, पेज लाइक, उनकी आदतों, पसंद, नापसंद, इंटरनेट गतिविधियों, यूजर्स की लोकेशन जैसे उसके शहर और देश के नाम, शिक्षा, जाति, धर्म इत्यादि जानकारियां एकत्रित की थीं. सबसे आश्चर्य जनक बात यह है कि फेसबुक यूजर्स को इस बात की बिलकुल भी भनक नही थी कि उनके बारे में सभी प्रकार की जानकारियां किसी कंपनी या फर्म को बेची जा रही हैं.

    कैम्ब्रिज एनालिटिका ने इस जानकारी का क्या किया?
    कैम्ब्रिज एनालिटिका ने ऊपर बताई गयी लोगों की सभी जानकारियों को इकठ्ठा कर उनके बारे में एक कम्पलीट प्रोफाइल बनाया जिससे यह पता लगाया जा सके कि फलां व्यक्ति किस पार्टी के विचारों को सपोर्ट करता है और किस पार्टी का विरोध करता है,वह देश के किन मुद्दों पर गुस्सा हैं या खुश है, किस जगह वह घूमने जाना चाहता है या घूम कर आया है, कौन से ब्रांड के कपडे, जूते और मोबाइल को पसंद करता है.

    अब इस कम्पलीट प्रोफाइल के आधार पर कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उन राजनीतिक पार्टियों को सेवाएँ देनी शुरू की जो कि चुनाव में जीत दर्ज करना चाहते थे. इस तरह कैम्ब्रिज एनालिटिका राजनीतिक पार्टियों को अपनी कंसल्टिंग सेवाएँ देनी लगी और राजनीतिक दलों को बताने लगी कि किस राज्य में किस तरह का मुद्दा उठाया जाये, किस मुद्दे पर रैली की जाये और भाषणों में किन-किन मुद्दों को शामिल किया जाये और किस तरह के विज्ञापन बनाए कि पार्टी एक विशेष वर्ग/धर्म/जाति/क्षेत्र के लोगों को उसकी तरफ मोड़ने में कामयाब हो जाये.

    एक उदहारण की सहायता से इसे समझने का प्रयास करते हैं

    मान लीजिये कि भारत में 2019 के लोक सभा चुनाव होने वाले हैं और कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव को जीतने के लिए कैम्ब्रिज एनालिटिका की सेवाएँ लेने के लिए सौदा किया है.
    अब कैम्ब्रिज एनालिटिका, कांग्रेस को यह बता सकती है कि उसके पास 20 मिलियन ऐसे लोगों की जानकारी है जो कि देश में बेरोजगारी की समस्या के कारण बीजेपी से नाराज है इसलिए कांग्रेस को इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने के लिए देश के उन राज्यों में ऐसी रैली करनी चाहिए जहाँ पर बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों ताकि छात्रों को बीजेपी के खिलाफ भड़काया जा सके और उनके वोट लिए जा सकें.

    कैम्ब्रिज एनालिटिका, कांग्रेस को बताएगी कि फेसबुक पर ऐसे पेड कैंपेन चलाओ जिसमें कहा जाये कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो रेलवे में जॉब फॉर्म भरने की फीस सिर्फ 100 रुपये थी लेकिन बीजेपी के शासन में यह बढ़कर 500 रुपये हो गयी है, इसलिए बीजेपी छात्र विरोधी पार्टी है.

    अगला उदाहरण नीचे दी गयी तस्वीर के दिया जा सकता है. जिसको कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका की मदद से ऐसे फेसबुक ग्रुप में शेयर करेगी जहाँ पर बीजेपी को सपोर्ट करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा हो. इससे लोगों के दिमाग में यह बैठाने का प्रयास किया जायेगा कि मोदी गरीब विरोधी है क्योंकि मोदी इतने महंगे पेन का इस्तेमाल करते हैं जबकि हमारा देश इतना गरीब है. यहाँ मोदी और बीजेपी की छवि बिगाड़ने का प्रयास किया जायेगा.

    modi manmohan pen

    इस प्रकार कैम्ब्रिज एनालिटिका ने फेसबुक से लोगों के बारे में सभी प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी खरीदी उसका विश्लेषण कराया और लोगों के बारे में पूरा प्रोफाइल तैयार किया और फिर उसको राजनीतिक दलों और कंपनियों को महंगे दामों पर बेच दिया. इस प्रकार इस डेटा की चोरी में फेसबुक, कैम्ब्रिज एनालिटिका और राजनीतिक पार्टी तीनों को लाभ हुआ लेकिन उस यूजर को कुछ नही मिला जिसका डेटा चोरी हुआ वो भी बिना उसकी अनुमति के.

    कैम्ब्रिज एनालिटिका के सीईओ अलेक्जेंडर नीक्स ने कहा है कि कैम्ब्रिज एनालिटिका ने 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रम्प को जिताने के लिए अपनी सेवाएँ दी थीं. इसके अलावा इसने यूरोपीय संघ से यूनाइटेड किंगडम के अलग होने के अभियान में भी योगदान दिया था.

    उम्मीद है कि ऊपर लिखे गए लेख के आधार पर आप समझ गए होंगे कि कैम्ब्रिज एनालिटिका फेसबुक का यह डेटा विवाद भारत की राजनीति को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है.

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