तटीय क्षेत्र प्रबंधन के उद्देश्य और लक्ष्य क्या हैं?

तटीय क्षेत्र ऐसे उच्च जल चिह्न तक प्रादेशिक जल की सीमा को परिभाषित करता है जो मुख्य भूमि, द्वीपों और समुद्र के संकीर्ण क्षेत्र से तटीय डोमेन की बाहरी सीमा बनाती हैं। इस लेख में हमने तटीय क्षेत्र प्रबंधन (सीजेडएम) के उद्देश्य, लक्ष्य और चुनौती पर चर्चा किया है जो UPSC, SSC, State Services, NDA, CDS और Railways जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही उपयोगी है।
Feb 14, 2019 18:29 IST
    Coastal Zone Management (CZM)- Purpose, Objective, Challenge and Act HN

    तटीय क्षेत्र ऐसे उच्च जल चिह्न तक प्रादेशिक जल की सीमा को परिभाषित करता है जो मुख्य भूमि, द्वीपों और समुद्र के संकीर्ण क्षेत्र से तटीय डोमेन की बाहरी सीमा बनाती हैं। तटीय क्षेत्र प्रबंधन (सीजेडएम) शासन की एक प्रक्रिया है जिसमें कानूनी और संस्थागत ढांचे शामिल हैं जो यह सुनिश्चित करता है की तटीय क्षेत्रों के लिए विकास और प्रबंधन योजनाएं, पर्यावरण तथा सामाजिक लक्ष्यों के साथ एकीकृत हो सके और उन प्रभावितों की भागीदारी के साथ विकसित की जा सके।

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन का उद्देश्य

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य विकास और प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना है, जिससे कि तटीय पारिस्थितिक तंत्र को स्थिरता के मार्गदर्शक सिद्धांतों के माध्यम से प्रबंधित किया जा सके, फिर लाखों संरक्षित क्षेत्रों की आजीविका और उनके अस्तित्व की गारंटी दी जा सके।

    "तटीय क्षेत्र को उन गतिविधियों से संरक्षित करना जो तटीय भूमि की गुणवत्ता या हानि का कारण हो सकते हैं।"

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    तटीय क्षेत्र प्रबंधन का लक्ष्य

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन (सीजेडएम) के लक्ष्य "तटीय संसाधनों के संरक्षण, विकास, वृद्धि, और जहां संभव हो, इस प्रबंधन को बहाल करना" हैं।, इस प्रबंधन के उद्देश्य नीचे दिए गए हैं:

    1. तटीय क्षेत्र द्वारा प्रदान किए गए लाभों को अधिकतम करना

    2. संघर्षों और एक-दूसरे, संसाधनों तथा पर्यावरण पर गतिविधियों के हानिकारक प्रभावों को कम करना

    3. सेक्टोरल गतिविधियों के बीच संबंधों को बढ़ावा देना

    4. पारिस्थितिक रूप से स्थायी फैशन में तटीय क्षेत्र के विकास का मार्गदर्शन करना

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन की चुनौतियाँ

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन समस्या की परिभाषा और तटीय क्षेत्र में समाधान के लिए एक अंतःविषय और अंतर-क्षेत्रीय दृष्टिकोण है। इसलिए इस प्रबंधन में कई चुनौतियाँ हैं जिसकी चर्चा नीचे की गयी हैं:

    1. तटीय प्रणालियों के भीतर अंतर्संबंधों की सराहना करने में विफलता

    2. अपर्याप्त कानून और प्रवर्तन की कमी

    3. तटीय क्षेत्र प्रबंधन में सीमित समझ और अनुभव

    4. तटीय और समुद्री प्रक्रियाओं की सीमित समझ

    5. प्रशिक्षित कर्मियों, प्रासंगिक प्रौद्योगिकियों और उपकरणों की कमी

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन (सीजेडएम) के सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय मानकों के दो सेटों पर आधारित है- पहला जो पर्यावरण और विकास पर रियो घोषणा में स्थापित किए गए थे; और दूसरा तटीय क्षेत्र की जैव-भौतिक प्रकृति पर।

    तटीय क्षेत्र प्रबंधन अधिनियम (सीजेडएमए)
    इस अधिनियम को 1972 में पारित किया गया था जिसकी वजह से तटीय क्षेत्रों में निरंतर वृद्धि की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक औपचारिक संरचना मिली। यह अधिनियम राष्ट्रीय महासागर सेवा या नेशनल ओसियन सर्विस (एनओएएए) द्वारा प्रशासित किया जाता है ताकि तटीय संसाधनों के संरक्षण, विकास, वृद्धि और पुनर्स्थापना संभव हो सके।

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