सिक्का अधिनियम 2011: भारत में सिक्कों के साथ क्या नहीं कर सकते

11-JUL-2018 18:37
    Coinage Act-2011: Features

    भारतीय रिजर्व बैंक भारत का सर्वोच्च मौद्रिक प्राधिकरण है. यह 2 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक के नोटों को प्रिंट करने के लिए अधिकृत है. एक रुपये का नोट आरबीआई के बजाय वित्त मंत्रालय द्वारा मुद्रित किया जाता है. लेकिन मुद्रा और सिक्के का अर्थव्यवस्था में प्रचलन (circulation) केवल आरबीआई द्वारा किया जाता है.

    भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार मुद्रा नोट्स प्रिंट करता है जबकि भारत में सिक्कों को सिक्का अधिनियम, 2011 के अनुसार बनाया जाता है.

    इस लेख में हम सिक्का अधिनियम, 2011 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान प्रकाशित कर रहे हैं;

    1. यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य सहित पूरे भारत में लागू है.
    2. "सिक्का" का अर्थ किसी भी ऐसी “धातु” से बने सिक्कों से है जिससे सिक्के बनाने की अनुमति केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत किसी संगठन द्वारा दी गयी है.

    3. धातु "का अर्थ है किसी भी धातु, मिश्र धातु सोना, बेस धातु, चांदी या किसी भी अन्य सामग्री जिसे सिक्का बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मान्यता दी गयी है.

    नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”

    4. यदि कोई व्यक्ति किसी भी सिक्के (यदि सिक्का चलन में है) को लेने से मना करता है तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा सकती है. उसके खिलाफ भारतीय मुद्रा अधिनियम व आइपीसी के तहत कार्रवाई होगी. मामले की शिकायत रिजर्व बैंक में भी की जा सकती है.

    5. केंद्र सरकार सिक्कों को बनाने के लिए देश की भीतर किसी संगठन या किसी भी विदेशी देश की सरकार की सहायता ले सकती है. यहाँ तक कि सिक्कों को विदेश में बनवाकर भारत में आयात भी किया जा सकता है.

    6 . सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत सिक्के का भार तय किया जाता है लेकिन किसी भी दशा में सिक्के का अंकित मूल्य, सिक्के में लगी धातु के मूल्य से कम नहीं होना चाहिए. क्योंकि यदि ऐसा हो जाता है तो लोग सिक्के को पिघलाकर उसकी धातु को बाजार में बेचकर ज्यादा लाभ कमा लेंगे. यदि कारण है कि सरकार सिक्के के आकार को छोटा करती जा रही है ताकि उनमें लगी धातु का मूल्य सिक्के की फेस वैल्यू की तुलना में कम रहे.

    7. सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 6 में प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत जारी सिक्के भुगतान के लिए वैध मुद्रा होंगे बशर्ते कि सिक्के को विरूपित न किया गया हो और उनका वजन निर्धारित वजन से कम ना हो.

    8. सिक्कों से कितनी बड़ी राशि का भुगतान किया जा सकता है?

    सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत;

     (a). यदि कोई सिक्का एक रुपये से ऊपर का है तो इस प्रकार से सिक्कों से केवल 1000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है, इससे ज्यादा का भुगतान सिक्कों में करना कानूनी अपराध है.

     (b). यदि कोई व्यक्ति 50 पैसे के सिक्कों में कोई भुगतान करना चाहता है तो वह केवल 10 रुपये तक अक भुगतान का सकता है.

     (c). 50 पैसे के कम के सिक्कों में केवल एक रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है. हालाँकि 50 पैसे से कम मूल्य के सिक्के अब वैध नही रहे हैं. 1 पैसे, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे मूल्यवर्ग के सिक्के 30 जून 2011 से संचलन से वापिस लिये गये हैं, अतः वे वैध मुद्रा नहीं रहे.

    9. सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 5 के खंड (ए) के प्रावधानों के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी सिक्के को काटता या तोड़ता है तो उसे उसी सिक्के के बराबर मूल्य का जुर्माना भरना होगा.

    10. सिक्का अधिनियम- 2011 की धारा 9 में यह प्रावधान है कि यदि सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति भी व्यक्ति को लगता है कि उसे किसी व्यक्ति ने सिक्का नकली दिया है तो वह व्यक्ति उस सिक्के को नष्ट करने का हक़ रखता है और इसमें नुकसान सिक्का धारक का होगा.

    11. कोई भी व्यक्ति सिक्का के रूप में किसी भी धातु के टुकड़े (चाहे वह धातु मुद्रित हो या गैर मुद्रित) का उपयोग नहीं करेगा.

    12. कोई भी व्यक्ति किसी सिक्का को पिघला या नष्ट नहीं करेगा.
    13. कोई भी व्यक्ति विनिमय के माध्यम (medium of exchange) के अलावा सिक्का का कोई और उपयोग नहीं करेगा.

    14. किसी भी व्यक्ति के पास पिघला हुआ या ठोस अवस्था में सिक्का नहीं होगा.  

    15. किसी भी व्यक्ति को सिक्के को विरूपित रूप या खंडित रूप में रखें का हक नहीं है.

    16. किसी भी व्यक्ति को अपनी जरुरत से ज्यादा मात्रा में सिक्कों को रखने की अनुमति नहीं है. इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति सिक्कों में उनकी फेस वैल्यू से ज्यादा कीमत में बेच भी नहीं सकता है.

    17. सिक्कों को पिघलाकर किसी अन्य वस्तु को बनाने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के सिक्के बांग्लादेश में तस्करी के जरिये ले जाये जाते हैं और वहां पर इनसे ब्लेड और अन्य नकली जेबरात इत्यादि बनाये जाते हैं.

    indian coins smuggled

    18. सिक्का अधिनियम, 2011 के कार्यान्वयन के बाद; नीचे दिए गए कानूनों को सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया है;

    (a) द मेटल टोकन्स एक्ट, 1889
    (b) सिक्का अधिनियम, 1906
    (c) कांस्य सिक्का (कानूनी निविदा) अधिनियम, 1918
    (d) मुद्रा अध्यादेश, 1940
    (e) छोटे सिक्के (अपराध) अधिनियम, 1971

    उपर्युक्त 18 बिन्दुओं को पढ़ने के बाद यह बात स्पष्ट हो गयी है कि भारत में सिक्कों से सम्बंधित बहुत से नियम सरकार ने बनाये थे लेकिन जानकारी के आभाव में लोग जाने और अनजाने इनका पालन नहीं करते थे. उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आप सिक्का अधिनियम, 2011 के प्रावधानों को ठीक से समझ गए होंगे.

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