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पृथ्वी पर भू-आकृति विकास के प्रभावी प्रक्रम तथा उनसे निर्मित भू-आकृतियां

पृथ्वी के ऊपरी परत अर्थात भू-पृष्ठ पर अनेकों प्रकार की भू-आकृतियां पाई जाती हैं, जिनमें महाद्वीप, महासागर, पर्वत, पठार, मैदान, घाटियां, डेल्टा आदि प्रमुख हैं. इस लेख में हम पृथ्वी पर पाए जाने वाले भू-आकृति विकास के प्रभावी प्रक्रमों तथा उनसे निर्मित विभिन्न भू-आकृतियों का विवरण दे रहे हैं.
Dec 8, 2017 18:04 IST
process of Landform development

पृथ्वी के ऊपरी परत अर्थात भू-पृष्ठ पर अनेकों प्रकार की भू-आकृतियां पाई जाती हैं. महाद्वीप, महासागर, पर्वत, पठार, मैदान, घाटियां, डेल्टा आदि भू-आकृतियों के प्रमुख उदाहरण हैं. सन 1919 में अमेरिकी भू-वैज्ञानिक आर. डी. सेल्सबरी (R.D. Salisbury) ने भू-आकृतियों का वर्गीकरण करते हुए उसे तीन वर्गों में बांटा था. प्रथम प्रकार की भू-आकृतियों में महाद्वीप एवं महासागर प्रमुख हैं. द्वितीय प्रकार की भू-आकृतियों में पर्वत, पठार एवं मैदान शामिल है. तृतीय प्रकार की भू-आकृतियों में घाटियां, जलप्रपात, महाखड्ड, कैनियन, डेल्टा, बालू का स्तूप, हिमोढ़, एस्कर, केम, ड्रमलिन आदि प्रमुख हैं.

भू-आकृतियों के विकास को नियंत्रित करने वाले कारकों का अध्ययन करने से पूर्व उनके भूगर्भिक इतिहास (Geological History) का अध्ययन करना अनिवार्य है क्योंकि इससे इस बात की जानकारी प्राप्त होती है कि वर्तमान स्वरूप में दिखाई देने वाली भू-आकृतियां किन-किन भौगोलिक परिस्थितियों से गुजरी है.

भू-आकृतियों के निर्माण में अपक्षय (Weathering), अपरदन (Erosion) तथा निक्षेपण (Deposition) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है. ज्वालामुखी तथा भूकंप जैसी अंतर्जात शक्तियां (Endognetic Forces) भी भू-आकृतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इसके अलावा बहिर्जात बलों (Exogenetic Forces) जैसे प्रवाहित जल, हिमनद, पवन, सागरीय तरंग आदि भी भू-आकृतियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
भू-आकृति विकास के प्रभावी प्रक्रम तथा उनसे निर्मित भू-आकृतियां

विभिन्न प्रक्रमों द्वारा निर्मित भू-आकृतियों के विभिन्न संरचनात्मक स्वरूप

प्रक्रम (Process)

भू-आकृतियां (Landforms)

पटल विरूपण (Diastrophism)

मैदान अथवा पठारों की उत्पत्ति, रिफ्ट घाटी, अवरोधी पर्वत, उथले गर्त, बलन पर्वत, तनाव एवं संपीड़न की क्रियाएं आदि

ज्वालामुखी क्रिया

ज्वालामुखी पर्वतों एवं पठारों की उत्पत्ति

घर्षण एवं पठार का पतन अथवा गिरावट

शैलपात, हिमानी निर्मित आकृतियां, भूमिपात से निर्मित आकृतियां

अपक्षय एवं अपरदनात्मक स्वरूप (Weathering and Erosional Forms)

प्रक्रम (Process)

अपक्षय एवं अपरदनात्मक

अवशिष्ट स्वरूप (Residual forms)

अपक्षय (भौतिक, रासायनिक एवं जैविक)

चट्टानों का विघटन, अपघटन, छिद्र एवं गर्त

अपगलन गुम्बद (Exfoliation dome)

प्रवाहित जल

घाटियां, महाखड्ड, कैनियन, जलप्रपात

जल-विभाजक, अवशिष्ट पर्वत, मोनेड्नॉक पर्वत (Monedrick)

हिमनदी

सर्क, U-आकार की घाटी, लटकती घाटी

एरीट (Arete), श्रृंग (Horn), तीक्ष्ण ढालयुक्त पर्वत

वायु

गर्त, छत्रक (गारा)

चट्टानी टुकड़ों का जमाव, ड्रीकांटर (Drikanter)

महासागरीय तरंगें

भृगु (Cliff), गुफाएं

मेहराब, पुलिन, टोम्बोलो, तटीय दरार, तरंगित महावेदी

भूमिगत जल

गर्त (घोल रन्ध्र, विलय रन्ध्र, युवाला आदि)

ड्रिपस्टोन (Dripstone), प्राकृतिक पुल

निक्षेपात्मक स्वरूप (Depositional Forms)

प्रक्रम (Process)

स्वरूप (Forms)

जल

बाढ़ का मैदान, प्राकृतिक तटबंध, गोखुर झील, कछारी भूमि, डेल्टा

हिमनदी

हिमोढ़, ड्रमलिन, केम, हिमप्रवाह मैदान

वायु

बालू का स्तूप, बरखान, लोयस

महासागरीय तरंगें

तरंग निर्मित वेदी (Wave-built platform), पुलिन (Beach), भू-जिह्वा (Spit), लैगून, रोधिका

जीव

मूंगे की चट्टानें तथा प्रवाल भित्तियां

पृथ्वी पर विभिन्न भू-आकृतियों का निर्माण कैसे होता है?