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अमेरिका की जीएसपी स्कीम क्या है और इससे हटाने पर भारत को क्या नुकसान होगा?

जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (GSP) एक अमेरिकी व्यापार कार्यक्रम है. जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की स्थापना 1974 के व्यापार अधिनियम द्वारा 1 जनवरी, 1976 को हुई थी. GSP स्कीम के तहत अमेरिका विकाससील और अन्य देशों के उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री प्रदान करता है. अर्थात अमेरिका तरजीह वाले देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता है. भारत ने GSP का सबसे अधिक लाभ उठाया है.
Jun 24, 2019 17:10 IST
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जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (GSP) क्या है?
अमेरिका ने जून, 2019  में भारत को जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (GSP) का लाभ लेने वाले देशों की सूची से बाहर कर दिया है. जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (GSP) एक अमेरिकी व्यापार कार्यक्रम है जो कि विकाससील देशों के उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री देता है. अर्थात अमेरिका के जीएसपी कार्यक्रम में शामिल देशों को विशेष तरजीह दी जाती है. अमेरिका उन देशों से एक तय राशि के आयात पर शुल्क नहीं लेता है.

जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की नीति 129 विकाससील देशों के लगभग 4,800 उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री एंट्री देता है. जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज की स्थापना 1974 के व्यापार अधिनियम द्वारा 1 जनवरी, 1976 को हुई थी.

भारत को इस सूची से बाहर होने के भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होंगे. इसके प्रभावों की विवेचना इस लेख में की गयी है.

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भारत और अमेरिका व्यापार;


भारत, अमेरिका के साथ 9वां सबसे बड़ा व्यापार भागीदार देश है. वर्ष 2018 के दौरान दोनों देशों के बीच $ 87.5 बिलियन का व्यापार था जिसमें भारत का अमेरिका को निर्यात $54.4 बिलियन और आयात $33.1 बिलियन था. इस प्रकार अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सरप्लस लगभग $ 21.3 बिलियन था.

भारत; अमेरिका को मुख्य रूप से कपडे, फल सब्जियां, हस्तशिल्प चीज़ें, केमिकल, मत्स्य पालन से जुड़े उत्पाद और कृषि आधारित उत्पादों का निर्यात करता है जबकि अमेरिका; भारत को मशीनरी, कृषि उत्पाद, आईटी उत्पाद, मेडिकल उत्पाद, ऑटोमोबाइल गाड़ियाँ इत्यादि निर्यात करता है.

भारत के ऊपर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जनवरी में जारी कांग्रेस रिसर्च सर्विस रिपोर्ट के अनुसार , भारत को जीएसपी स्कीम का सबसे ज्यादा फायदा मिला है. वर्ष 2017 में भारत का 5.7 अरब डॉलर निर्यात ड्यूटी फ्री रहा. जबकि तुर्की ने 1.7 अरब डॉलर का सामान अमेरिका में बिना ड्यूटी निर्यात किया.  भारत 1974 में बनाई गई इस योजना के तहत लाभ पाने वाला विश्व का सबसे बड़ा देश है. इस स्कीम के तहत होने वाले भारत के कुल निर्यात में  19% की दर से वृद्धि हो रही थी जिसके कारण कारण का निर्यात अमेरिका को 2024 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान था. लेकिन अमेरिका ने इस पर पानी फेर दिया है.

अब तक इस नीति की वजह से भारत से अमेरिका जाने वाले 1930 उत्पाद अमेरिका में आयात शुल्क देने से बच जाते थे. इस बदलाव से अमेरिका में भारत की हस्तशिल्प चीज़ें, केमिकल, मत्स्य पालन से जुड़े उत्पाद और कृषि आधारित उत्पादों को आयात शुल्क देना पड़ेगा. अगर इसके असर की बात करें तो इससे हज़ारों नौकरियों पर संकट आ सकता है.

लेकिन अगर वाणिज्य सचिव अनूप वाधवन की बात मानें तो वे कहते हैं कि भारत; जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात करता है, जिसमें से केवल 1.90 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुएं ही बिना किसी शुल्क वाली श्रेणी में आती हैं. कुल मिलाकर जीएसपी हटाए जाने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत ज़्यादा नहीं होगा और यह अधिकतम 19 करोड़ डॉलर तक ही सीमित रहेगा.

"जीएसपी से बाहर निकाले जाने से कई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स की प्रतिस्पर्धा को नुक़सान होगा. ज़्यादातर केमिकल उत्पादों की क़ीमत लगभग 5% तक बढ़ जाने की संभावना है जो कि भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा है साथ ही साथ इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी नुक़सान होगा.

अमेरिका ने ऐसा क्यों किया?

अमेरिका का कहना है कि भारत में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है. वह जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है. अमेरिका ने पिछले साल अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा शुरू की थी. पिछले साल 1 जून 2018 अमेरिका ने भारत की स्टील पर 25% और एल्युमीनियम पर 10% टैरिफ लगाया था. 

ट्रम्प का कहना है कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार को ‘समान और उचित’ एक्सेस नहीं दिया. ट्रम्प ने इसके साथ ही भारत में कई अमेरिकी प्रोडक्‍ट्स पर लगने वाली ड्यूटीज की आलोचना की है.

ध्यान रहे कि अमेरिका से निर्यात की वाली एक बाइक (हार्ले डेविडसन) पर भारत 50% टैरिफ वसूलता है जो कि कुछ समय पहले तक 100% था , जबकि वहां से आने वाले इसी तरह के सामान पर अमेरिका कोई टैक्स नहीं लेता है. ट्रम्प ने कहा कि हम भी भारतीय आयात पर बराबर टैरिफ लगाएंगे.

ज्ञातव्य है की अमेरिका का भारत के साथ व्यापार घाटा वर्ष 2017 में 27 अरब डॉलर था और यह बढ़ता ही जा रहा है और इस नीति के माध्यम से अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है और इसमें उसे कुछ सफलता भी मिलती दिख रही है.

अमेरिका काफ़ी समय से भारत में मेडिकल डिवाइसों पर लगने वाले प्राइसिंग कैप को हटाने की मांग कर रहा है जिससे अमरीकी कंपनियों को नुक़सान हो रहा है. इसके अलावा अमेरिका चाहता है कि भारत; अमेरिका से आने वाले आईटी उत्पादों और कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादों को अपने बाज़ार में ज़्यादा पहुंच उपलब्ध कराए.

आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका के साथ भारत का व्यापार सरप्लस वाला है अर्थात अमेरिका; भारत से ज्यादा मात्रा में आयात करता है और भारतीय निर्यातकों को अमेरिका जैसा बड़ा बाजार मिला हुआ है. इसके अलावा भारत भी अमेरिका के लिए बहुत बड़ा शस्त्र आयातक देश है. इसलिए दोनों देशों के हित एक दूसरे के साथ मजबूत संबंधों पर ही निर्भर करते हैं. अर्थात अमेरिका को भारत को मिले जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफ्रेंसेज (जीएसपी) को जारी रखना चाहिए था.

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