प्राचीन भारत की क्षत्रप प्रणाली पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी

16-NOV-2018 14:58
    GK Questions and Answers on the Satraps System of Ancient Sakas in India HN

    क्षत्रप एक प्रकार की उपाधि थी, जो राज्यों के मुखिया के लिए प्रयुक्त की जाती थी। यह प्राचीन भारत की राज्यव्यवस्था की प्रणाली थी। भारतीय क्षत्रपों के तीन प्रमुख वंश और एक राजवंश था- (1) कपिशा, पुष्पपुर, और अभिसार के क्षत्रप, (2) पश्चिमी पंजाब के क्षत्रप, (3) मथुरा के क्षत्रप, और (4) उज्जैन के क्षत्रप। यह शब्द आज भी भारतीय राजनीति में प्रयोग किया जाता है।

    1. क्षत्रप का क्या मतलब होता है?

    A. प्रान्तों के राज्यपाल

    B. राजाओं के राजा का मंत्री

    C. राजाओं के राजा का सैन्य सारजेंट

    D. उपरोक्त सभी

    Ans: A

    व्याख्या: सात्राप या क्षत्रप प्रान्तों के राज्यपालों को कहा जाता था। इस शब्द का प्रयोग बाद में आने वाले सासानी और यूनानी साम्राज्यों ने भी किया। इसलिए, A सही विकल्प है।

    2. सात्राप या क्षत्रप प्रणाली का प्रयोग भारत में किसने किया था?

    A. ग्रीक

    B. ईरानी

    C. एथेंस

    D. शक

    Ans: D

    व्याख्या: भारत में शकों की संयुक्त शासन- प्रणाली में वरिष्ठ शासक को “महाक्षत्रप’ की उपाधि मिलती थी तथा अन्य कनिष्ठ शासक 'क्षत्रप’ कहे जाते थे। इसलिए, D सही विकल्प है।

    3. प्राचीन भारत की क्षत्रप प्रणाली का उदभव कहा हुआ था?

    A. ग्रीक

    B. ईरानी

    C. एथेंस

    D. शक

    Ans: B

    व्याख्या: 'क्षत्रप' शब्द का प्रयोग ईरान से शु्रू हुआ। यह राज्यों के मुखिया के लिए प्रयुक्त होता था। इसलिए, B सही विकल्प है।

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    4. शक शासकों ने खुद को राजाओं के राजा के रूप में क्यों बुलाया?

    A. क्योंकि वे सामंतों की मदद से विशाल क्षेत्र पर शासन करते थे

    B. क्योंकि उनके पास बहुत बड़ी स्थायी सेना थी

    C. क्योंकि वे सैन्य गवर्नरों और क्षत्रप की मदद से शासन शासन करते थे

    D. क्योंकि उनके पास दिव्य शक्ति थी

    Ans: C

    व्याख्या: भारतवर्ष में शकों के जो राज्य स्थापित हुए उनमें भी क्षत्रपीय राज्यव्यवस्था थी। वे खुद को राजाओं के राजा के रूप में बुलाया करते थे क्योंकि वे सैन्य गवर्नरों और क्षत्रप की मदद से शासन करते थे। इसलिए, C सही विकल्प है।

    5. निम्नलिखित में किसने 'महादंदपति' का उपाधि धारण करके शासन किया था?

    A. लीका कुसुलाका

    B. पटिका कुसुलाकरू

    C. हगाना

    D. हगामासा

    Ans: B

    व्याख्या: मोगा शिलालेख के अनुसार, पटिका कुसुलाका, लीका कुसुलाका का पुत्र था। पटिका कुसुलाकरू कुसुलाकरू ने 'महादंदपति' का उपाधि धारण करके शासन किया था। इसलिए, B सही विकल्प है।

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    6. सौराष्ट्र पर शासन करने वाले पहले ज्ञात क्षत्रप कौन थे?

    A. नाहापन

    B. रुद्रमादमन I

    C. पतिका कुसुलाकरू

    D. भुमाका

    Ans: D

     व्याख्या: भुमाका, सौराष्ट्र पर शासन करने वाला पहला ज्ञात क्षत्रप था। इसलिए, D सही विकल्प है।

    7. निम्नलिखित में से किस क्षत्रप ने शेर की राजधानी के प्रतीक रूप में सिक्के पर उत्कीर्ण किया था?

    A. पश्चिम भारत के क्षत्रप

    B. उज्जैन के क्षत्रप

    C. मथुरा के क्षत्रप

    D. कपीशा के क्षत्रप

    Ans: A

    व्याख्या: पश्चिम भारत के क्षत्रप ने शेर की राजधानी के प्रतीक रूप में सिक्के पर उत्कीर्ण किया था। इसलिए, A सही विकल्प है।

    8. निम्नलिखित में से किस क्षत्रप ने देवी लक्ष्मी और तीन हाथियों जैसी छवि को सिक्के पर उत्कीर्ण किया था?

    A. पश्चिम भारत के क्षत्रप

    B. उज्जैन के क्षत्रप

    C. मथुरा के क्षत्रप

    D. कपीसा के क्षत्रप

    Ans: C

    व्याख्या: मथुरा के क्षत्रप ने देवी लक्ष्मी और तीन हाथियों जैसी छवि को सिक्के पर उत्कीर्ण किया था। इसलिए, C सही विकल्प है।

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    9. निम्नलिखित में से किस क्षत्रप ने सातवाहन राजवंश के सतकर्णी को हराया जिसकी वजह से उसका कद शक शासकों में बढ़ गया था?

    A. नाहापन

    B. रुद्रमादमन I

    C. पतिका कुसुलाकरू

    D. भुमाका

    Ans: B

    व्याख्या: रुद्रमादमन I क्षत्रप प्रणाली के शक्तिशाली शासकों में से एक था। वह खुद को महा क्षत्रप के रूप में चित्रित करता था। जुनागढ़ शिलालेख के अनुसार, उन्हें सभी जातियों द्वारा संरक्षक के रूप में चुना गया था। उन्होंने सातवाहन राजवंश के सतकर्णी को हराया था जिसकी वजह से इनका कद शक शासकों में बढ़ गया था। उन्होंने मालवा, सौराष्ट्र, गुजरात, कोंकण और युदेहास पर विजय प्राप्त की। इसलिए, B सही विकल्प है।

    10. निम्नलिखित में से किस यूनानी लेख़क ने यवनजातक को यूनानी से संस्कृत भाषा में अनुवाद किया था जो भारतीय ज्योतिष को भी प्रभावित करता है?

    A. यावानेस्वर

    B. होमर

    C. एस्च्य्लुस

    D. अरिसोफनेस

    Ans: A

    व्याख्या: यवनजातक ईसा पूर्व रचित ज्योतिष-ग्रंथ है। यावानेस्वर नामक यूनानी लेख़क ने यवनजातक को यूनानी से संस्कृत भाषा में अनुवाद किया था जो भारतीय ज्योतिष को बहुत  प्रभावित किया था।

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