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फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट और ब्लैक लिस्ट क्या हैं?

FATF एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी निकाय है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के लिए ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के दुरूपयोग को रोकने के लिए नीतियों को विकसित करता और बढ़ावा देता है. FATF; 2 प्रकार की सूचियाँ जारी करता हैं, एक है ब्लैक लिस्ट और दूसरी है ग्रे लिस्ट. जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का समर्थन नहीं करते हैं, उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाता है.
Feb 27, 2019 18:53 IST
FATF MEANING

वित्तीय एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की स्थापना जुलाई 1989 में पेरिस में आयोजित एक शिखर सम्मेलन में सात (जी-7) देशों के समूह द्वारा की गई थी. एफएटीएफ का प्रारंभिक उद्येश्य मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के उपायों की जांच करना और इसके विस्तार को रोकना था.

अक्टूबर 2001 में, FATF ने अपने कार्य क्षेत्र में विस्तार करते हुए; टेरर फंडिंग और मानव तस्करी से निपटने के प्रयासों को शामिल किया था.

एफएटीएफ के कार्य इस प्रकार हैं;
1. FATF एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी निकाय है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के लिए ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के इस्तेमाल को रोकने के लिए नीतियों को विकसित करता और बढ़ावा देता है.

2. अब FATF ने वर्चुअल करेंसी से सम्बंधित मुद्दों पर भी विचार करना शुरू कर दिया है.

3. एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माण निकाय है. हालाँकि कानून प्रवर्तन मामलों, जांच या अभियोजन में इसकी कोई भूमिका नहीं है.

FATF की ब्लैक लिस्ट और ग्रे लिस्ट क्या हैं?

FATF की 2 प्रकार की सूचियां हैं;
1. ब्लैक सूची

2. ग्रे सूची

1.ब्लैक लिस्ट: जो देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों का समर्थन नहीं करते हैं उन्हें ब्लैक लिस्ट में सूचीबद्ध किया गया है. अर्थात इन देशों में मौजूद फाइनेंसियल सिस्टम की मदद से आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा नहीं मिलता है.

एफएटीएफ ब्लैकलिस्ट या ओईसीडी ब्लैकलिस्ट को वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स द्वारा 2000 से जारी किया जा रहा है.

FATF; उन देशों को इस लिस्ट में जोड़ देता है जो कि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपने वित्तीय सिस्टम का उपयोग होने देते हैं. इसके साथ ही इसमें उन देशों के नाम हटा दिए जाते हैं जो कि टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों के वित्त पोषण को रोकते हैं. यह लिस्ट कुछ अन्तराल पर अपडेट होती रहती है.

2. ग्रे लिस्ट: इस लिस्ट में उन देशों को शामिल किया जाता है जो कि अपने देश के फाइनेंसियल सिस्टम को टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए उपयोग होने देते हैं.

यदि कोई देश ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है तो यह उस देश के लिए एक फुटबॉल मैच में पीले कार्ड की तरह है. अर्थात यदि आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों को बढ़ावा देना बंद नहीं किया तो रेड कार्ड अर्थात इंटरनेशनल लेवल पर बहुत से देशों द्वारा प्रतिबन्ध का सामना करना होगा.

यदि कोई देश आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर अंकुश लगाने में असमर्थ रहता है तो उसे FATF द्वारा काली सूची से ग्रे सूची में स्थानांतरित कर दिया जाता है और उल्टा भी.

grey list 2018

जब कोई देश ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है तो उसे निम्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है;

1. अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों (विश्व बैंक, IMF, एशियाई विकास बैंक इत्यादि) और देशों के आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है.

2. अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों और देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या आती है.

3. इसके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी आती है और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है.

4. पूर्णरूप से अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है.

वर्ष 2012 में पहली बार पाकिस्तान को ग्रे सूची में शामिल किया गया था और 2015 तक इसमें रहा था. 29 जून, 2018 को एफएटीएफ ग्रे में दूसरी बार पाकिस्तान को सूचीबद्ध किया. यह प्रक्रिया फरवरी 2018 में शुरू हुई जब एफएटीएफ ने अपने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग समीक्षा समूह (ICRG) के तहत निगरानी के लिए पाकिस्तान के नामांकन को मंजूरी दी, जिसे आमतौर पर 'ग्रे सूची' के रूप में जाना जाता है.

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय निकाय की चिंताओं को दूर करने के लिए एक योजना तैयार करने को कहा गया था ताकि इसको फिर से काली सूची में शामिल किया जा सके.

तो यह थी FATF की ब्लैक सूची और ग्रे सूची के बारे में जानकारी. मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान के नेता अपनी धरती से आतंकी गतिविधियों को बंद करेंगे ताकि भारत और पाकिस्तान मिलकर एशियाई महाद्वीप में शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सकें.

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