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कोरोना वायरस का नाम ‘कोरोना’ ही क्यों रखा गया है?

आज दुनिया में कोरोना वायरस के कारण 1,14,215 लोगों की मौत हो चुकी है और 18,50,220 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं. नॉवेल कोरोना वायरस (Corona virus) का आधिकारिक नाम विश्व व्यापार संगठन ने “COVID-19” रखा है. इसमें 'CO' का मतलब ‘कोरोना 'VI' का वायरस 'D'का मतलब ‘डिजीज’ और ‘19’ वर्ष को दर्शाता है क्योंकि इसका पहली बार पता वर्ष 2019 में ही लगा था. अब सवाल यह उठता है कि आखिर इन बीमारियों के नाम कौन रखता है, कैसे रखता है, और क्यों रखता है? आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.
Apr 13, 2020 15:47 IST
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Corona Virus
Corona Virus

कोरोना वायरस (Corona Virus) या COVID-19 कई वायरस (विषाणु) का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में फैलता है. अब तक इस वायरस से पूरे विश्व में 3200 लोगों की जान जा चुकी है और 94 हजार से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं.

अब सवाल यह उठता है कि आखिर इस वायरस का यह नाम किसने रखा और क्यों रखा?

दरअसल,एक वायरस और उसके कारण फैलने वाला रोग अलग अलग होता है.जैसे;  एचआईवी वह वायरस है जो एड्स रोग का कारण बनता है. इसी प्रकार ‘खसरा’ एक रोग है और इसको फ़ैलाने वाले वायरस का नाम है 'रुबेला’

बीमारियों का नाम क्यों रखा जाता है? (Why diseases are Named)

बीमारियों को एक विशेष नाम इसलिए दिया जाता है ताकि उसकी संक्रामकता/प्रसार, गंभीरता, रोकथाम और उपचार के लिए टीके के प्रयास सफल दिशा में किया जाएँ. यदि रोग का नाम ही नहीं रखा जायेगा को डॉक्टर्स को यह जानने में परेशानी होगी कि बीमारी क्या हो सकती है और कौन सा इलाज करना है?

इसलिए रोगों को आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (आईसीडी) International Classification of Diseases (ICD) में नामित किया जाता है.

WHO-NAMED-CORONA

वायरस का नाम कौन रखता है? (Who gives Name to Virus)

वायरस का नाम; नैदानिक परीक्षणों, टीकों और दवाओं के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए उनके आनुवंशिक संरचना के आधार पर रखा जाता है. वायरोलॉजिस्ट और अन्य वैज्ञानिक समुदाय इस काम को करते हैं. वायरस का नाम इंटरनेशनल कमिटी ऑन टैक्सोनॉमी ऑफ वायरस (ICTV) द्वारा रखा गया है.

कोरोना वायरस का नाम कोरोना ही क्यों रखा गया है? (How Corona Named)

कोरोना शब्द का लैटिन भाषा में मतलब होता है क्राउन या मुकुट. 'कोरोना' प्लाज्मा की एक आभा को भी कहा जाता है जो सूर्य और अन्य सितारों के चारों ओर होती है. सूर्य का कोरोना बाहरी अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर तक फैला होता है और इसे सबसे आसानी से पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जाता है, लेकिन इसे कोरोनोग्राफ की मदद से भी साफ-साफ देखा जा सकता है.

जब वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के जरिये देखा तो उन्हें वायरस, क्राउन या सूर्य के करॉना जैसा दिखाई दिया. दरअसल, यह वायरस गोल है और इसकी सतह पर सूर्य के करॉना की तरह प्रोटीन की स्टेन्स यानी शाखाएं उगी हुई हैं; जो हर दिशा में फैलती हुई महसूस होती हैं ठीक जैसी कि सूर्य की आभा की किरणें. इसी कारण इसका नाम कोरोना रखा गया है.

how-is-corona-named

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी, 2020 को कोरोना वायरस का आधिकारिक नाम  11 फरवरी, 2020 को "COVID-19" रखा था.

इसमें 'CO' का मतलब कोरोना 'VI' का वायरस 'D' का मतलब डिजीज और 19 इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि इसका पहली बार पता वर्ष 2019 में ही लगा था.
उम्मीद है कि अब आप समझ गए गए होंगे कि कोरोना वायरस का नाम कैसे रखा गया है और "COVID-19" शब्द किन-किन शब्दों से मिलकर बना है और इसका क्या अर्थ है?
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