ललित कला अकादमी के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

ललित कला अकादमी स्वतंत्र भारत में गठित एक स्वायत संस्था है जो 5 अगस्त 1954 को भारत सरकार द्वारा स्थापित की गई. इसको नेशनल अकादमी ऑफ आर्ट्स भी कहते हैं. इस लेख में विस्तार से ललित कला अकादमी के बारें में अध्ययन करेंगे.
Jun 5, 2017 14:45 IST

    संस्कृति मंत्रालय प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का परिरक्षण एवं संरक्षण तथा देश में मूर्त एवं अमूर्त दोनों तरह की कला एवं संस्कृति के संवर्धन का कार्य करता है. इसके प्रशासनिक ढांचे में मंत्रालय के विभिन्न ब्यूरो और डिवीजन शामिल हैं, जिनका प्रमुख सचिव होता है. इसी प्रकार ललित कला अकादमी स्वतंत्र भारत में गठित एक स्वायत संस्था है जो 5 अगस्त 1954 को भारत सरकार द्वारा स्थापित की गई. इसको नेशनल अकादमी ऑफ आर्ट्स भी कहते हैं.

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    यह एक केंद्रीय संगठन है जो विभिन्न कलाओं के क्षेत्र में कार्य करने के लिए स्थापित किया गया था. इन केन्द्रों पर पेंटिंग, मूर्तिकला, प्रिंट-निर्माण, ग्राफकला, ग्रहनिर्माणकला और चीनी मिट्टी की कलाओं के विकास के लिए कार्यशाला सुविधाएं उपलब्ध हैं. अकादमी के लखनऊ, कोलकाता, चेन्नई, गढ़ी (नई दिल्ली), शिमला और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय केंद्र हैं.

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    ललित कला अकादमी के बारें में महत्वपूर्ण तथ्य
    - अकादमी हर वर्ष समसामयिक भारतीय कलाओं की प्रदर्शनीयां आयोजित करती है. 50-50 हज़ार रूपये के 15 राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं.
    - हर तीन वर्ष में अकादमी समकालीन कला पर एक बार नई दिल्ली में इंडिया त्रिनाले नामक त्रिवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन करती है.

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    Source: www.telegraphindia.com
    - 1955 से अकादमी 52 राष्ट्रीय कला प्रदर्शनियां आयोजित कर चुकी है, जिनमें करीबन 545 कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं.
    - यह अकादमी कला संस्थाओं या संगठनों को मान्यता प्रदान करती है और इन संस्थाओं के साथ-साथ राज्यों की अकादमियों को आर्थिक सहायता देती है.
    - विदेशों में भारतीय कला के प्रचार-प्रसार के लिए अकादमी अंतर्राष्ट्रीय द्विवार्षिक और त्रिवार्षिक प्रदर्शनियों में नियमित रूप से भाग लेती है और अन्य देशों की क्लाक्रतियों और प्रदर्शनियां भी आयोजित करती है.
    - यह अपने प्रकाशन कार्यक्रम के तहत अकादमी समकालीन भारतीय कलाकारों की रचनाओं पर हिन्दी और अंग्रेजी में मोनोग्राफ और समकालीन पारम्परिक तथा जनजातीय और लोक कलाओं पर जाने-माने लेखकों और कला आलोचकों द्वारा लिखित पुस्तकें प्रकाशित करती है.

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    - अकादमी ललित कला कंटेमपरेरी (अंग्रेजी), ललित कला एनशिएनट (अंग्रेजी) तथा हिन्दी में समकालीन कला नमक अर्द्धवार्षिक कला पत्रिकाएँ भी प्रकाशित करती है.
    - अकादमी समय-समय पर बहुरंगी प्रतिकृतियाँ भी निकालती है, ग्राफिक्स और समकालीन पेंटिंग्स की विशाल आकर में और तो और अकादमी ने अनुसंधान और अभिलेखन का नियमित कार्यक्रम भी शुरू किया है.
    - भारतीय समाज और संस्कृति के विभिन्न समसामयिक पहलुओं से संबन्धित परियोजनाओं पर काम करने के लिए अकादमी विद्वानों को आर्थिक सहायता भी देती है.

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    - क्या आप जानते है कि ललित कला अकादमी 50 वर्ष पुरे कर चुकी है. स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष में 9 अगस्त, 2004 को नई दिल्ली के सीरी फोर्ट सभागार में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कला को मूर्त रूप देने वाले देश के 17 वरिष्ठ कला साधकों को ललित कला रत्न से अलंकृत किया था। ये वे कलाकार थे, जिन्होंने भारत की समकालीन कला यात्रा को यहां तक पहुंचाने में महती भूमिका निभाई है।  
    इस लेख से पता चलता है कि ललित कला अकादमी में अनेक प्रकार के कार्यक्रम होते हैं जैसे कि प्रदर्शनी आयोजन, प्रकाशन, निरीक्षण, विभिन्न चित्र बनाने की कला, देशी कला संगठनों और प्रांतीय अकादमियों के समन्वित कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, विदेशों से संपर्क और छात्रों एवं कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का मौका देना आदि.

    डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वारा लिखे गए सभी 25 पुस्तकों की सूची

     

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