Indian Army: काले ट्रंक की जगह अब ट्राली सूटकेस इस्तेमाल करेंगे सैनिक, जानें क्यों

सैनिकों की सहूलियतों को देखते हुए सरकार ने एक नया फैसला लिया है. इस फैसले के अनुसार सरकार जल्द ही काले ट्रंक की जगह नए भर्ती होने वाले सिपाहियों को ट्राली सूटकेस अलॉट कर सकती है. ये नया नियम क्यों बनाया जा रहा है, इसके पीछे का कारण क्या है ये जानने के लिए पूरा आर्टिकल पढ़िए.
काले ट्रंक की जगह अब इस्तेमाल होंगे ट्राली सूटकेस
काले ट्रंक की जगह अब इस्तेमाल होंगे ट्राली सूटकेस

एक सैनिक की पहचान उसकी यूनिफार्म से होती है. लोहे से  बने काले रंग के ट्रंक इस यूनिफार्म का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं . हर सैनिक को भर्ती के समय ही उनके नाम और नंबर वाला काला बक्सा अलॉट किया जाता है. वैसे सर्विस के दौरान हर अच्छी और बुरी याद को संभाल कर रखने वाला ये बक्सा अब जल्द ही खुद याद बन कर रह जाएगा. दरअसल, सरकार के नए निर्णय के अनुसार भविष्य में भर्ती होने वाले सभी सैनिकों को काले ट्रंक की जगह ट्राली सूटकेस दिया जाएगा.

जल्द लिया जाएगा फैसला 

एक आर्मी जवान के जीवन की दो सबसे महत्वपूर्ण चीजें होती हैं गन और ट्रंक. काले रंग के इस ऐतिहासिक ट्रंक में सैनिक अपना पूरा जीवन समेट कर रखते हैं. चाहे छुट्टियों पर घर जाना हो, नयी पोस्टिंग या फिर जंग का मैदान, ये सरकारी ट्रंक हर हाल में सैनिकों के साथ रहते हैं. सैन्य अधिकारियों का कहना है, “ ये ट्रंक सैनिकों की पहचान है, वो इसे हर जगह साथ ले जाते हैं. हम सिपाहियों को ये ट्रंक सर्विस के शुरूआती दिनों में देते हैं. किसी अप्रिय घटना में जब कोई जवान शहीद हो जाता है, तब ये ट्रंक उनके परिवार को सौंप दिया जाता है. ये बिल्कुल परिवार को उस जवान की यादें सौंपने जैसा है.ऐतिहासिक के साथ-साथ एक सिपाही की जिंदगी में इस ट्रंक की इमोशनल वैल्यू भी है.”

लेकिन जल्द ही धातु से बने इस ट्रंक की जगह अमेरिकन टूरिस्टर(American Tourister) या सैमसोनाईट(Samsonite) के ट्राली सूटकेस को सर्विस में शामिल किया जा रहा है.

सूचना के अनुसार पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ, ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स, ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, उत्तर भारत टेक्सटाइल रिसर्च और पैरामिलिटरी के साथ एक बैठक का आयोजन किया. इस मीटिंग के दौरान, सूटकेस के मटेरियल, वज़न, साइज़, कैपेसिटी, लॉकिंग सिस्टम, वारंटी, फ्लेक्सिबिलिटी, दाम जैसे मुद्दों पर बात हुई. 

निर्देश के अनुसार, सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फोर्स की कैंटीन में मौजूद ट्राली सूटकेस को स्टेकहोल्डर्स आला अधिकारियों को दिखाएंगे. यहाँ वो अधिकारियों से सूटकेस की हर खूबी और कमी के बारे में बात करेंगे. जिसके बाद आला अधिकारी जवानों के लिए सबसे उचित सूटकेस का चुनाव करेंगे.

क्या कह रहे हैं जवान?

काले ट्रंक की जगह चक्के वाली ट्राली के इस्तेमाल की खबर पर पैरामिलिटरी जवानों का मिला-जुला सा रिएक्शन है. एक वर्ग इस फैसले का समर्थन कर रहा है, उनका मानना है कि ट्रंक के वज़न के कारण उसके  साथ ट्रेवल करना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में ये हल्के सूटकेस यात्रा को सुगम बनाएंगे.

वहीँ दूसरे वर्ग का मानना है कि अक्सर सैनिकों को कठिन मिशन पर जाना होता है और ये ट्राली कठिन परिस्थितियों के हिसाब से बिल्कुल भी सही नहीं हैं, और जल्द ही टूट या फट जाएंगे.

क्यों सैनिकों को मिलते हैं सिर्फ काले ट्रंक ?

सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला काला ट्रंक दरअसल उनके अनुशासित जीवन की पहचान है. सेना के शुरूआती समय से ही कला ट्रंक इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके पीछे कई कारण भी हैं. जैसे पहला कारण है कि ये ट्रंक बेहद ही मजबूत होते हैं और किसी भी विषम परिस्थिति में इनके अन्दर रखा सामान सुरक्षित रहता है. दूसरा कारण है बनावट, ये ट्रंक कई बार अच्छा बिस्तर और आड़ के तौर पर भी काम में आते हैं. तीसरा कारण है कि सैनिकों की जीवन शैली में चटकीले रंगों का प्रयोग बेहद कम होता है, ऐसे में काले रंग के ट्रंक उनकी वेश-भूषा के साथ फिट बैठते हैं.

वैसे फैसला आने तक सरकार ने सैनिकों के नाम, रैंक और ट्रंक नंबर से सजे इन काले ट्रंक की मरम्मत के निर्देश दिए हैं.

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