INS Karanj: जानें इसकी खासीयत और ताकत के बारे में

10 मार्च, 2021 को भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी स्कॉर्पीन क्लास की पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी, INS Karanj को कमीशन किया. आइये इस लेख के माध्यम से INS Karanj के बारे में अध्ययन करते हैं.
Created On: Mar 18, 2021 19:01 IST
Modified On: Mar 18, 2021 19:04 IST
INS Karanj
INS Karanj

INS Karanj को नौसेना में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल वी एस शेखावत (Admiral V S Shekhawat) द्वारा कमीशन किया गया था, जो 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में इस्तेमाल किए गए पहले INS Karanj के कमांडिंग ऑफिसर थे, भारतीय नेवी के अनुसार.

जैसा की आप जानते हैं कि 10 मार्च, 2021 को भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी स्कॉर्पीन क्लास की पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बी, INS Karanj को कमीशन किया. INS Karanj से पहले, INS Kalvari और INS Khanderi  को क्रमशः 2017 और 2019 में भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था.

INS Karanj मझगांव डॉक लिमिटेड (Mazagon Dock Limited) द्वारा प्रोजेक्ट -75 के तहत निर्मित छह का हिस्सा है.

एक चौथी पनडुब्बी, Vela, को मई 2019 में समुद्री परिक्षण के लिए पानी मे उतारा गया और पांचवीं, Vagir, नवंबर 2020 में, और दोनों का समुद्री परीक्षण चल रहा है. वहीं छठी एक उन्नत चरण में है.

आइये अब INS Karanj के बारे में जानते हैं 

पनडुब्बी का पूर्व संस्करण, जो फॉक्सट्रॉट क्लास (Foxtrot class) का था, पहली बार 1969 में रीगा (Riga) में USSR में कमीशन किया गया था और 2003 तक इसने राष्ट्र की सेवा की थी.

INS Karanj पश्चिमी नौसेना कमान के पनडुब्बी बेड़े का हिस्सा होगी और कमांड के शस्त्रागार का एक और शक्तिशाली हिस्सा होगी.

INS Karanj को दुनिया में सबसे अच्छे सेंसर से लैस किया गया है और केंद्रीकृत प्रोपल्शन और मशीनरी नियंत्रण प्रदान करने के लिए एक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली से सुसज्जित है.

शक्तिशाली डीजल इंजन एक गुप्त मिशन प्रोफ़ाइल के लिए बैटरी को जल्दी से चार्ज कर सकते हैं.

इसके अलावा, इसका मॉड्यूलर निर्माण भविष्य में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (air-independent propulsion) को अपग्रेड करने में सक्षम बनाता है.

वह एक स्थायी चुंबकीय तुल्यकालिक मोटर (Permanent magnetic synchronous motor) से सुसज्जित है, जिससे यह दुनिया की सबसे शांत पनडुब्बियों में से एक है.

कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन गौरव मेहता, जिन्होंने नौसेना में 20 साल से अधिक सेवा की है, ने कहा, “हम गर्व से कह सकते हैं कि INS Karanj पहली बार स्वदेशी पनडुब्बी है. यह 'मेक इन इंडिया' की भावना को कूटबद्ध करती है."

भारत अपना सैन्य अड्डा मॉरीशस में क्यों बना रहा है?

स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन (Scorpene-class submarine) क्या है?

स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियां दुनिया की सबसे उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियों में से एक हैं. ये प्लेटफॉर्म दुनिया की नवीनतम तकनीकों से लैस हैं.

पनडुब्बियों के स्कॉर्पीन क्लास को फ्रांसीसी नौसैनिक जहाज निर्माण फर्म DCNS द्वारा स्पेनिश जहाज निर्माण फर्म नवान्टिया (Navantia) के साथ साझेदारी में डिजाइन किया गया था.

अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में अधिक घातक और गुप्तचर, ये पनडुब्बियां समुद्री सतह के ऊपर या नीचे किसी भी खतरे को बेअसर करने के लिए शक्तिशाली हथियारों और सेंसर से लैस हैं.

भारतीय नौसेना इन सबमरीन का उपयोग क्षेत्र की निगरानी, खुफिया जानकारी, एंटी-पनडुब्बी वारफेयर, एंटी-सरफेस वारफेयर और माइनलेइंग ऑपरेशन जैसे अभियानों के लिए करेगी.

पनडुब्बियां छह टारपीडो-लॉन्चिंग ट्यूब (six torpedo-launching tubes), 18 भारी हथियारों, ट्यूब-लॉन्च MBDA SM-39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइलों और सटीक-निर्देशित हथियारों से लैस हैं.

यह सतह और पानी के नीचे दुश्मन के ठिकानों पर गंभीर हमले कर सकती है.

इसके अलावा, हमले की पनडुब्बियां लगभग 20 knots की अधिकतम जलमग्न गति से यात्रा कर सकती हैं और 21 दिनों तक जलमग्न रहने की क्षमता रखती हैं. इनकी 350 मीटर से अधिक की गहराई तक जा सकती है.

आइये अब प्रोजेक्ट 75 के बारे में जानते हैं

भारतीय नौसेना के इस प्रोजेक्ट के तहत, छह नवीनतम स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों  का निर्माण किया जा रहा है.

उनके 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है. यह परियोजना मुंबई के मझगांव डॉक (Mazagon Dock Limited) में आकार ले रही है.

जैसा की उपर बताया गया है कि दो पनडुब्बियों INS Kalvari और INS Khanderi को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया है. 

चौथी पनडुब्बी, Vela को मई 2019 में समुद्री परीक्षणों की शुरुआत की गई है. पाँचवीं पनडुब्बी Vagir को नवंबर 2020 में लॉन्च किया गया था. इन दोनों का समुद्री परीक्षण जारी है.

छठी और आखिरी पनडुब्बी, जल्द ही तैयार हो जाएगी.

INS Karanj की प्रमुख विशेषताएं एक नजर में 

- यह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ सेंसर से लैस है.

- हथियार पैकेज में एक बड़े दुश्मन के बेड़े को बेअसर करने के लिए पर्याप्त वायर-निर्देशित टॉरपीडो (wire-guided torpedoes) और उप-सतह से सतह मिसाइलें (Sub-surface to surface missiles) शामिल हैं. आत्मरक्षा के लिए इसमें अत्याधुनिक टारपीडो-डिकॉय सिस्टम (Torpedo-decoy system) भी है.

- यह केंद्रीकृत प्रोपल्शन और मशीनरी नियंत्रण प्रदान करने के लिए एक एकीकृत प्लेटफार्म प्रबंधन प्रणाली के साथ लगाया गया है. शक्तिशाली डीजल इंजन एक गुप्त मिशन प्रोफ़ाइल के लिए बैटरी को जल्दी से चार्ज कर सकते हैं.

- यह स्थायी चुंबकीय तुल्यकालिक (Synchronous) मोटर से सुसज्जित है, जिससे यह दुनिया की सबसे शांत पनडुब्बियों में से एक है.

- इसका मॉड्यूलर निर्माण भविष्य में स्वतंत्र प्रोपल्शन को उन्नत करने में सक्षम बनाता है.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि INS Karanj के कमिशन होने के कारण भारत ने एक ‘सबमरीन बिल्डिंग नेशन’ के रूप में अपनी स्थिति को और मज़बूत किया है. 

Source: indianexpress, indiannavy.nic.in

जानिए कैसे LCA Tejas आत्मनिर्भर भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा?

 

 

 

Comment ()

Related Categories

    Post Comment

    2 + 3 =
    Post

    Comments