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दादा साहेब फाल्के के बारे में 10 रोचक तथ्य

30-APR-2018 12:02
    10 interesting facts about Dadasaheb Phalke

    दादा साहेब फाल्के एक महान भारतीय फिल्म निर्माता, निर्देशक, चलचित्र लेखक, कथाकार, सेट डिजाईनर, ड्रेस डिजाइनर, सम्पादक, वितरक थे.

    उनका पूरा नाम धुंडिराज गोविंद फाल्के है.

    भारतीय सिनेमा का जनक दादा साहेब फाल्के को कहा जाता है क्योंकि हिन्दी फिल्म सिनेमा की शुरुआत इन्होनें ही की थी.

    इसलिए इनके नाम पर ही दादा साहेब फाल्के अवार्ड की शुरुआत हुई जो कि एक ' लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड' के रूप में दिया जाने वाला भारतीय फिल्म क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित पुरूस्कार है.

    दादा साहेब फाल्के के बारे में 10 रोचक तथ्य

    1. दादा साहेब फाल्के का जन्म महाराष्ट्र के नासिक शहर के पास त्र्यंबकेश्वर कस्बे में 30 अप्रैल, 1870 में हुआ था. उन्होंने अपनी शरुआती पढ़ाई 1885 में मुंबई के सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से पूरी की फिर 1890 में कलाकृति, इंजियनिरिंग, ड्राइंग, पेंटिंग और फोटोग्राफी की पढ़ाई गुजरात के वडोदरा से पूरी की थी.

    2. गोधरा (गुजरात) में दादा साहेब फाल्के ने अपने करियर की शुरात फोटोग्राफी से की परन्तु अपनी पहली पत्नी के निधन के बाद उनको अपना ये काम छोड़ना पड़ा. फिर वह जर्मनी गए और वहां से फिल्म बनाने के लिए नई तकनीकों का अध्ययन किया.

    3. जर्मनी में उनकी मुलाकात Carl Hertz जादूगर से हुई और उनके साथ काम करने लगे. कुछ समय बाद उनको एक पुरातात्विक सर्वे में बतौर ड्राफ्ट्समैन का काम करने का भी मौका मिला. मन ना लगने के कारण वह वापस महाराष्ट्र आ गए और फिर उन्होंने अपना खुद का प्रिंटिंग प्रेस शुरू किया.

    4. आधुनिक तकनीको के बारे में जानने और सीखने के लिए उन्होंने अपनी पहली यात्रा गेरमान्यमे की. जहां से उन्होंने मशीनों और कला का ज्ञान लिया.

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    5. मुंबई के अमेरिका-इंडिया थिएटर में विदेशी मूक चलचित्र 'लाइफ ऑफ क्राइस्ट' को देखकर उन्होंने फैसला लिया कि फिल्म बनाएंगे.

    6. उन्होंने अपनी पहली फिल्म राजा हरिश्चन्द्र का निर्माण किया जो कि भारत की फुल लेंथ फीचर फिल्म थी. यह एक म्यूट फिल्म थी जिसमें मराठी कलाकारों को कास्ट किया गया था. इसमें कोई संदेह नहीं है कि उन्होंने भारतीय सिनेमा के सपने को पूरा किया.

    7. हरिश्चंद्र फिल्म के निर्माता, निर्देशक, लेखक, कैमरामैन आदि खुद दादा साहेब ही थे. उन्होंने स्वयं इस फिल्म के नायक हरिश्चंद्र और रोहिताश्र्व की भूमिका उनके सात वर्षीय पुत्र भालचंद्र फाल्के ने निभाई थी. उस समय कोई भी स्त्री फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं हुई थी तो तारामती की भूमिका के लिए एक पुरुष को ही चुना गया था. इस फिल्म को 3 मई, 1913 को मुंबई के कोरोनेशन सिनेमा में दिखाया गया था.

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    8. क्या आप जानते हैं कि हरिश्चंद्र फिल्म को बनाने में दादा साहेब फाल्के के 15 हजार रूपये लगे थे. आज इनके नाम पर भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा पुरस्कार दिया जाता है. यह पुरस्कार, भारत सरकार की और से दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है, जो कि किसी व्यक्ति विशेष को भारतीय सिनेमा में उसके आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है.

    9. 1969 से इस पुरस्कार की शुरुआत हुई थी. इस पुरस्कार को प्रतिष्ठित व्यक्तियों की एक समिति 'दादा साहेब फाल्के अकादमी'  की सिफारिशों पर प्रदान किया जाता है. भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री देविका रानी को 1969 में पहला दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया था. भारत सरकार की ओर से इस पुरस्कार में अब दस लाख रुपये नकद, स्वर्ण कमल और शॉल प्रदान किया जाता है.

    10. ‘दादा साहेब फाल्के अकेडमी’ के द्वारा दादा साहेब फाल्के के नाम पर तीन पुरस्कार भी दिए जाते हैं: फाल्के रत्न अवार्ड, फाल्के कल्पतरु अवार्ड और दादा साहेब फाल्के अकेडमी अवार्ड्स.

    1932 में दादा साहेब फाल्के की आखरी सायलेंट फिल्म 'सेतुबंधन' आई थी. इसके बाद फिल्मों में डबिंग होने लगी थी. उन्होंने अपनी आखरी फिल्म 'गंगावतरण' 1937 में बनाई थी. उन्होंने अपने जीवनकाल में कुल 125 फिल्में बनाई थी और 16 फरवरी, 1944 नासिक में उनका निधन हो गया. भारतीय फिल्म जगत में उनके योगदान को हमेशा सराहा जाएगा.

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