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भारत में संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं की सूची

संवैधानिक निकाय वे निकाय हैं जिनका प्रावधान भारतीय संविधान में देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था को चलाने के लिए किया गया है. इस प्रकार संवैधानिक निकाय टिकाऊ और ज्यादा शक्तिशाली होते हैं. दूसरी ओर गैर-संवैधानिक निकाय वे संस्थाएं होतीं हैं जिनको सरकार ने जरुरत पड़ने पर संसद में कोई बिल पास करके स्थापित किया जाता है. गैर-संवैधानिक निकाय कम शक्तिशाली और कम टिकाऊ होते हैं और उन्हें जरूरत पड़ने पर हटाया भी जा सकता है जैसे योजना आयोग को नीति आयोग ने हटा दिया है.
May 22, 2019 14:29 IST
Constitutional Bodies in India

भारत; राज्यों का संघ है. यहाँ पर विभिन्न जाति, धर्म और भौगोलिक स्थिति के लोग रहते हैं. सभी राज्यों की अपनी अलग प्रकार की जरूरतें होतीं हैं और कई जरूरतों को संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं की मदद से पूरा किया जाता है. इस प्रकार भारत जैसे लोकतांत्रिक देश को संवैधानिक और गैर-संवैधानिक संस्थाओं के सहयोग से चलाया जाता है.

संवैधानिक संस्थाओं की परिभाषा (Definition of Constitutional Bodies): ये वे संस्था हैं जिनका उल्लेख भारत के संविधान में किया गया है और इसलिए इन्हें स्वतंत्र और अधिक शक्तिशाली माना जाता है.

उदाहरण: चुनाव आयोग, संघ लोक सेवा आयोग और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग इत्यादि.

भारत में संवैधानिक संस्थाओं की सूची इस प्रकार है;

         संवैधानिक निकाय का नाम

       अनुच्छेद

     वर्तमान अध्यक्ष

1. चुनाव आयोग

 अनुच्छेद 324

  सुनील अरोड़ा (23 वें)

2. संघ लोक सेवा आयोग

 अनुच्छेद -315 से 323

  अरविंद सक्सेना

3. राज्य लोक सेवा आयोग

 अनुच्छेद -315 से 323

  हर राज्य में अलग

4. वित्त आयोग

 अनुच्छेद -280

  डॉ. वाई. वी. रेड्डी (14वें)

5. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

 अनुच्छेद -338

  राम शंकर कठेरिया

6. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

 अनुच्छेद -338 A

  नंद कुमार साय

7. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक

 अनुच्छेद -148

  राजीव महर्षि

8. भारत के महान्यायवादी

 अनुच्छेद -76

  के. के. वेणुगोपाल

9. राज्य के महाधिवक्ता

  अनुच्छेद -165

  हर राज्य में अलग

10. भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी

 अनुच्छेद -350 B

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गैर-संवैधानिक संस्थाओं की परिभाषा (Definition of Non-Constitutional Bodies): गैर संवैधानिक या अतिरिक्त संवैधानिक संस्था समान ही होते हैं. ये संस्थायें देश के संविधान में लिखित नहीं हैं. अर्थात इनके गठन के लिए केंद्र सरकार को संसद में बिल पास करना पड़ता है. अतः ऐसे निकाय गैर-संवैधानिक निकाय होते हैं जो कि किसी विशेष उद्येश्य की पूर्ती के लिए गठित किये जाते हैं.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) एक संवैधानिक संस्था नहीं है क्योंकि इसकी स्थापना 1963 में गृह मंत्रालय के एक प्रस्ताव द्वारा की गई थी. इसका काम देश में अपराध, घोटाला और इंटरनेशनल क्राइम के मामलों की जाँच करना होता है.

भारत में गैर-संवैधानिक संस्थाओं की सूची है;

 गैर संवैधानिक निकाय का नाम

  वर्तमान अध्यक्ष

 1. नीति आयोग

 नरेंद्र मोदी

 2. राष्ट्रीय विकास परिषद

 नरेंद्र मोदी

 3. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

 पूर्व CJI एचएल दत्तू

 4. राज्य का मानवाधिकार आयोग

 हर राज्य में अलग

 5. केंद्रीय जांच ब्यूरो

 ऋषि कुमार शुक्ला

 6. केंद्रीय सतर्कता आयोग

 श्री के वी चौधरी

 7. लोकपाल और लोकायुक्त

 पिनाकी चंद्र घोष

 8. राज्य सूचना आयोग

 हर राज्य में अलग

 9. केंद्रीय सूचना आयोग

 श्री सुधीर भार्गव

इसलिए उपरोक्त व्याख्या से यह स्पष्ट है कि सरकारी निकाय प्रकृति में अधिक शक्तिशाली और स्थायी हैं जबकि अन्य गैर-संवैधानिक निकाय देश की आवश्यकताओं के अनुसार बनाए गए हैं और सरकार के निर्णय के आधार पर उन्हें समाप्त किया जा सकता है। जैसा कि हमने भारत के योजना आयोग के मामले में देखा था जिसे 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था.

गैर-संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक संस्थाओं के साथ-साथ उनके संबंधित अध्यक्षों की सूची विभिन्न परीक्षाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए इस सूची को बहुत ध्यान से पढ़ने की जरूरत है.


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