भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचनों और नारों की सूची

12-SEP-2018 14:30
    Famous slogans of Pre and post independent India HN

    भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय आह्वानों, उत्तेजनाओं एवं प्रयत्नों से प्रेरित, भारतीय राजनैतिक संगठनों द्वारा संचालित अहिंसावादी और सैन्यवादी आन्दोलन था, जिनका एक समान उद्देश्य, अंग्रेजी शासन को भारतीय उपमहाद्वीप से जड़ से उखाड़ फेंकना था। भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात हुई परिस्थितयों से निपटने के लिए, भारत के रहनुमाओं ने समय-समय पर अपने आवाज़ बुलंद किया है और विभिन्न नारों तथा वचनों की मदद से भारतियों में आत्मविश्वास भरा है।

    भारत की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्रता पश्चात के प्रमुख वचन और नारें

    वचन और नारें

    नाम

    इन्कलाब जिंदाबाद

    भगत सिंह

    दिल्ली चलो

    सुभाष चन्द्र बोस

    करो या मरो

    महात्मा गाँधी

    जय हिन्द

    सुभाष चन्द्र बोस

    पूर्ण स्वराज

    जवाहरलाल नेहरू

    हिंदी, हिन्दू, हिंदुस्तान

    भारतेंदु हरिश्चंद्र

    वेदों की ओर लौटो

    दयानन्द सरस्वती

    आराम हराम है

    जवाहरलाल नेहरू

    हे राम

    महात्मा गाँधी

    भारत छोड़ो

    महात्मा गाँधी

    जय जवान जय किसान

    लाल बहादुर शास्त्री (1965 में पाकिस्तान युद्ध के समय)

    मारो फिरंगो को

    मगल पाण्डेय

    जय जगत

    विनोबा भावे

    कर मत दो

    सरदार बल्लभभाई पटेल

    सम्पूर्ण क्रांति

    जयप्रकाश नारायण

    विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

    श्याम लाल गुप्ता पार्षद

    वन्दे मातरम्

    बंकिमचन्द्र चटर्जी

    जन-गण-मन अधिनायक जय हे

    रविन्द्रनाथ ठाकुर

    समराज्यवाद का नाश हो

    भगत सिंह

    स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है

    बल गंगाधर तिलक

    सरफरोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है  

    राम प्रसाद बिस्मिल

    सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा

    इकबाल

    साइमन कमीशन वापस जाओ

    लाला लाजपत राय

    हू लिव्स इफ इंडिया डाइज

    जवाहरलाल नेहरू

    तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आज़ादी दूंगा

    सुभाष चन्द्र बोस

    मेरे सिर पर लाठी  का एक प्रहार, अंग्रेजी शासन के ताबूत की कील साबित होगा

    लाला लाजपत राय

    मुसलमान मुर्ख थे, जो उन्होंने सुरक्षा की मांग की और हिन्दू उनसे भी मुर्ख थे, जो उन्होंने उस मांग को ठुकरा दिया

    अबुल कलाम आजाद

    भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग है क्योंकी इसी दौरान भारतीयों की भारतीयता जागी थी और वो पूर्ण स्वराज्य के साथ लोकतान्त्रिक देश की तरफ अग्रसर हो रहे थे। इसी लोकतंत्र और पूर्ण स्वराज्य की खोज के दौरान भारतीय रहनुमाओं ने बहुत सारे वचन और नारें दिए थे ताकि भारत को गुलामी मुक्त करने में प्रेरणादायी सिद्ध हो।

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