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सेस या उपकार क्या होता है और यह कितने प्रकार का होता है?

सेस; टैक्स के ऊपर लगाया जाने वाला टैक्स है और आमतौर पर विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है. एक बार इसका उद्देश्य हल हो जाता है तो इसको हटा लिया जाता है. सेस से मिलने वाली राशि को भारत सरकार अन्य राज्य सरकारों के साथ साझा नहीं करती है और इससे प्राप्त समस्त कर राशि अपने पास रख लेती है. वर्तमान में भारत में 6 प्रकार के उपकर लगाए जा रहे हैं.
Feb 21, 2019 12:22 IST
Cess & Surcharge Meaning

सेस या उपकर क्या होता है?
सेस; टैक्स के ऊपर लगाया जाने वाला कर होता है और आमतौर पर विशिष्ट उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है. जब इस कर को लगाने का उद्येश्य पूरा हो जाता है तो इसे वसूलना बंद कर दिया जाता है. इस कर की सबसे अलग बात यह है कि केंद्र सरकार को इसे अन्य राज्यों के साथ साझा नहीं करना पड़ता है अर्थात इस कर से मिली पूरी राशि केंद्र सरकार अपने पास रख लेती है.

सेस को लगाने का उद्येश्य केवल किसी विशेष उद्येश्य, सेवा या क्षेत्र को विकसित करना होता है . अर्थात सेस लगाने का उद्येश्य किसी जन कल्याण के कार्य के लिए वित्त की व्यवस्था करना होता है. जैसे कृषि कल्याण सेस को कृषि के विकास के लिए और प्राइमरी एजुकेशन सेस का उद्येश्य देश में प्राथमिक शिक्षा का विकास करना है.

सेस से मिली राशि को पहले भारत के संचित कोष में रखा जाता है फिर इसके बाद उसे सम्बंधित कोष बनाया जाता है और उस राशि को उस कोष में भेज दिया जाता है.

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सेस के प्रकार (Types of Cess in India);

अब 1 जुलाई 2017 से कुछ उपकारों को जीएसटी के अंदर समाहित कर दिया गया है. अर्थात अब ये सेस लगने देश में बंद हो गये हैं. जीएसटी में समाहित कर लिए गए उपकार इस प्रकार हैं;
1. कृषि कल्याण उपकर

2. स्वच्छ भारत उपकर

3. स्वच्छ ऊर्जा उपकर

4. चाय, चीनी और जूट आदि पर उपकर

वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा निम्न 6 उपकर लगाये जा रहे हैं;

1. प्राथमिक शिक्षा उपकर

2. माध्यमिक शिक्षा उपकर

3. कच्चे पेट्रोलियम तेल पर उपकर

4. रोड सेस

5. तम्बाकू और तम्बाकू उत्पादों पर राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता उपकार

6. आयातित वस्तुओं पर शिक्षा उपकर

यह उल्लेखनीय है कि अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर उपकर की दर 4% है जो कि अरुण जेटली ने वर्ष 2018-19 के बजट में बढाई थी. इससे पहले यह दर केवल 3 प्रतिशत थी.

उपकर से राजस्व संग्रह;
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार; केंद्र सरकार ने 2017-18 में उपकर के माध्यम से 2,14,050 रुपये और  वित्त वर्ष 2016-17 में 2,35,307 करोड़ रुपये  सेस या उपकर के रूप में प्राप्त किये थे.

सेस फंड के उपयोग में अनियमितता;
नियम के अनुसार सेस या उपकर राशि को उन विशिष्ट उद्देश्यों पर खर्च किया जाना चाहिए जिनके लिए उसे वसूला गया है लेकिन वास्तव में ऐसा देखा गया है कि इस राशि को किन्हीं और कामों में खर्च कर दिया गया है.

एक संसदीय पैनल ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 के अंत तक 86,440 करोड़ रुपये उपकर एकत्र किया गया था, जिसमें से केवल 29,645 करोड़ रुपये भारत की संचित निधि में स्थानांतरित किया गया था. इसका मतलब है कि बकाया सेस फंड का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया है.

उदाहरण के लिए, देश में कोयले के उत्पादन और उसके आयात से मिली राशि के आधार पर राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष बनाया गया था ताकि देश में स्वच्छ ऊर्जा के विकास को बढ़ावा दिया जा सके लेकिन वास्तव में इस कोष का प्रयोग नमामि गंगे, ग्रीन इंडिया मिशन और नेशनल सोलर मिशन में किया है. अर्थात 2015-16-2017-18 की अवधि के दौरान; इन कार्यक्रमों के लिए 19,013 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.

सेस और सरचार्ज में अंतर (Difference between the Cess and Surcharge):
सरचार्ज किसी भी टैक्स पर लगने वाला अतिरिक्त कर है, जो पहले से चुकाए गए टैक्स पर लगता है. इसलिए सरचार्ज को अधिभार भी कहा जाता है. यह अधिभार मुख्य रूप से  व्यक्तिगत आयकर और कॉर्पोरेट आयकर पर लगाया जाता है.

भारत में सरचार्ज मुख्य रूप से व्यापारियों पर लगाये जाते थे लेकिन वर्ष 2013 से इसे अधिक आय कमाने वालों पर भी लगाना शुरू कर दिया गया था.

वर्तमान में भारत में 50 लाख से 1 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष कमाने वालों पर 10% की दर से सरचार्ज या अधिभार लगाया जाता है जबकि 1 करोड़ से अधिक कमाने वालों पर 15% की दर से सरचार्ज वसूला जाता है.

उम्मीद है कि उपरोक्त स्पष्टीकरण से पाठकों को सेस और सरचार्ज के बारे में पूरी जानकारी मिल गयी होगी.

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