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जानें 6 ऐसे आउटब्रेक के बारे में जिन्हें WHO ने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नॉवेल कोरोनो वायरस के प्रकोप को देखते हुए वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global Health Emergency) घोषित किया. क्या आप जानते हैं कि वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल क्या होता है और अब तक किन आउटब्रेक के लिए इसे लगाया गया है. आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं.
Apr 7, 2020 15:16 IST
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Global-Health-Emergency
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वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global Health Emergency) को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ़ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) भी कहा जाता है. इसे तब घोषित किया जाता है जब किसी बिमारी का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने का खतरा होता है. इसलिए इसकी रोकथाम के लिए जरुरी कदम उठाने की जरूरत होती है. कोरोना वायरस महामारी विश्व में 200 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में फैल चुकी है और लाखों लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं.

अब सवाल उठता है की विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस इमरजेंसी के दौरान क्या कदम उठाता है. जो देश संक्रमित से प्रभावित होते हैं उनके लिए WHO कदम उठाता है. ऐसी परिस्थितियों से लड़ने के लिए WHO के पास आकस्मिक फंड जमा होता है, जिसका इस्तेमाल प्रभावित इलाकों में आपातकाल में किया जाता है. यहीं आपको बता दें कि WHO के पास दुनिया के कई देशों से पैसा आता है.

आइये अब जानते हैं कि आखिर कितनी बार वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global Health Emergency) किसी आउटब्रेक या बिमारी के फैलने के कारण WHO ने लगाया है.

WHO की इमरजेंसी ऑफ इंटरनैशनल कंसर्न का इतिहास चीन में 2005 के SARS के प्रकोप से जुड़ा है. इसका उपयोग 6 अन्य बार किया गया है. स्वाइन फ्लू महामारी (2009), पश्चिम अफ्रीका में  इबोला प्रकोप (2013-2016), पोलियो (2014), जीका वायरस (2016),  कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (2019) में इबोला प्रकोप और कोरोना वायरस महामारी (COVID-19) (2020).

स्वाइन फ्लू महामारी (Swine Flu Pandemic) – 2009

स्वाइन-मूल इन्फ्लूएंजा A (H1N1) वायरस, जो अप्रैल 2009 में पहली बार मेक्सिको में मानवों में पाया गया था. उस वर्ष जून में WHO द्वारा इसे महामारी घोषित किया गया था. उस समय, 74 देशों ने संक्रमण के मामलों की सूचना दी थी. 2013 में, वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने अनुमान लगाया कि इस महामारी ने विश्व स्तर पर 203,000 लोगों की जान गई हो - जो संकट के समय किए गए अनुमानों से लगभग 10 गुना अधिक है.

फ्लू का टीका विकसित और प्रशासित होने के बाद, WHO ने अगस्त 2010 में महामारी के अंत की घोषणा की. 2012 में लांसेट इन्फेक्शियस डिजीज जर्नल के एक अध्ययन में कहा गया है कि डेथ टोल 579,000 लोगों के रूप में हो सकता है.

पश्चिम अफ्रीका में इबोला का प्रकोप (Ebola Outbreak) 2014

2013 और 2016 के बीच, सियरा लियोन, गिनी और लाइबेरिया में केंद्रित एक इबोला का प्रकोप 28,616 से अधिक मामलों में हुआ और उन क्षेत्रों में लगभग 11,310 लोगों की जान गई. इसके अतिरिक्त, अन्य देशों में लगभग 36 मामले और 15 मौतें हुईं, रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) की रिपोर्ट के अनुसार. Reuters के अनुसार, परिणामस्वरूप होने वाली मौतों की संख्या संयुक्त रूप से अन्य सभी इबोला के प्रकोपों से अधिक है. स्थिति बिगड़ने के साथ, WHO ने 8 अगस्त, 2014 को पश्चिम अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रकोप घोषित किया.

बायोमेड सेंट्रल की रिपोर्ट के अनुसार, न केवल इसकी लागत सिएरा लियोन, गिनी और लाइबेरिया की अनुमानित लागत 53 बिलियन डॉलर थी, बल्कि इसने खाद्य की कमी और असुरक्षा को भी प्रभावित किया था, जो सैकड़ों हजारों लोगों को प्रभावित कर चुका है.

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पोलियो का प्रकोप (Polio Outbreak) - 2014

2014 में, WHO ने पोलियो के पुनरुत्थान को अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया. WHO के अनुसार, "अनियंत्रित होने पर, यह स्थिति दुनिया की सबसे गंभीर वैक्सीन रोकथाम योग्य बीमारियों में से एक को खत्म करने में विफलता का कारण बन सकती है." पोलियो का टिका और इलाज की खोज की गई थी. अक्टूबर 2019 में विश्व स्तर पर पोलियो (WPV3) को समाप्त घोषित किया गया.

जीका प्रकोप (Zika Outbreak) – 2016

WHO ने 2016 में जीका को अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया. 2015 में ब्राजील में प्रकोप की पहचान होने के बाद से जीका लगभग 60 से अधिक देशों और क्षेत्रों में फैल गया था. यह पहली बार था जब मच्छर से जनित बीमारी के लिए PHEIC घोषित किया गया था.

नवंबर 2016 तक, जब WHO ने जीका आपातकाल को समाप्त करने की घोषणा की थी, दुनिया भर में माइक्रोसेफली (microcephaly) के साथ पैदा हुए शिशुओं में दुनिया भर में कुछ 2,300 पुष्टि की गई थी. माइक्रोसेफली (microcephaly) एक ऐसी स्थिति है जो असामान्य रूप से छोटे सिर से चिह्नित होती है जो विकासात्मक समस्याओं को जन्म दे सकती है.

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का प्रकोप (Ebola Outbreak in the Democratic Republic of Congo) – 2019

जुलाई 2019 में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का प्रकोप पश्चिम अफ्रीका में 2014 के प्रकोप के बाद बीमारी का दूसरा सबसे बड़ा पुनरुत्थान है. इसका प्रकोप North Kivu and Ituri प्रांतों में हो रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के अनुसार 5 अप्रैल, 2020 तक कुल 3453 मामले (3310 पुष्ट और 143 संभावित), जिनमें 2264 मौतें, 1169 जीवित बचे लोग, और मरीज अभी भी देखभाल में हैं.

कोरोना वायरस महामारी (COVID-19) – 2020

30 जनवरी, 2020 को WHO ने कोरोना वायरस के प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित किया. 11 मार्च को, WHO के महानिदेशक ने COVID -19 को महामारी के रूप में चिह्नित किया.

तो अब आप जान गए होंगे की अब तक WHO ने 6 बार विश्व स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है.

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