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भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए राज्यवार खर्च की सीमा

चुनाव में धन के प्रभाव को कम करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने बड़े राज्यों में लोक सभा चुनावों में खर्च की अधिकतम सीमा 70 लाख रुपये और छोटे राज्यों में 54 लाख रुपये कर दी है. विधान सभा में चुनाव के लिए बड़े राज्यों में चुनाव खर्च की अधित्तम सीमा 28 लाख रुपये है. आइये इस लेख में जानते हैं कि किस राज्य में लोकसभा और विधानसभा चुनाव खर्च की सीमा कितनी है?
Apr 18, 2019 16:43 IST
    Elections in India

    भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है. ज्ञातव्य है कि भारत के पहले लोकसभा चुनाव में 173 मिलियन लोगों ने वोट डाले थे जो कि 2019 में बढ़कर 900 मिलियन हो गये हैं. बीते सालों में महंगाई में वृद्धि हुई है जिसके कारण चुनाव सामग्री बनवाने की लागत भी बढ़ गयी है. ऐसे समय में चुनाव आयोग ने लोक सभा और विधान सभा चुनावों में खर्च की सीमा को वर्ष 2014 में बढ़ा दिया था.

    चुनाव में धन के प्रभाव को कम करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव आचार संहिता, 1961 के नियम 90 में संशोधन करके चुनाव में खर्च की सीमा निर्धारित की है.

    बड़े राज्यों में लोक सभा चुनावों में खर्च की सीमा 70 लाख रुपये और छोटे राज्यों में 54 लाख रुपये है. विधान सभा में चुनाव के लिए बड़े राज्यों में चुनाव खर्च की अधित्तम सीमा 16 लाख से बढाकर 28 लाख रुपये कर दी गयी है.

    बड़े राज्यों में शामिल हैं;

    1. उत्तर प्रदेश

    2. महाराष्ट्र

    3. तमिलनाडु

    4. पश्चिम बंगाल

    5. कर्नाटक

    6. बिहार

    7. मध्य प्रदेश आदि

    अब तक के सभी लोकसभा चुनावों में किस पार्टी को कितनी सीटें मिली हैं?

    छोटे राज्यों में शामिल हैं;

    1. गोवा
    2. सिक्किम
    3. अरुणाचल प्रदेश
    4. दिल्ली को छोड़कर सभी केंद्र शासित प्रदेश

    चुनाव खर्च के मुख्य कारक हैं;

    1. सार्वजनिक बैठक और जुलूस पर खर्च,

    2. इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से विज्ञापन पर खर्च

    3. रैली कार्यकर्ताओं पर खर्च

    4. वाहनों पर खर्च

    5. अभियान सामग्री पर व्यय

    विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उनकी चुनाव खर्च सीमा इस प्रकार है;

    राज्य / संघ राज्य क्षेत्र का नाम

    किसी एक चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा

          संसदीय क्षेत्र में खर्च

     विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में खर्च

     1. आंध्र प्रदेश

    70,00,000

    28,00,000

     2. अरुणाचल प्रदेश

    54,00,000

    20,00,000

     3. असम

    70,00,000

    28,00,000

     4. बिहार

    70,00,000

    28,00,000

     5. छत्तीसगढ़

    70,00,000

    20,00,000

     6. गोवा

    54,00,000

    28,00,000

     7. गुजरात

    70,00,000

    28,00,000

     8. हरियाणा

    70,00,000

    28,00,000

     9. हिमाचल प्रदेश

    70,00,000

    28,00,000

     10. जम्मू और कश्मीर

    70,00,000

    28,00,000

     11. झारखंड

    70,00,000

    28,00,000

     12. कर्नाटक

    70,00,000

    28,00,000

     13. केरल

    70,00,000

    28,00,000

     14. मध्य प्रदेश

    70,00,000

    28,00,000

     15. महाराष्ट्र

    70,00,000

    28,00,000

     16. मणिपुर

    70,00,000

    20,00,000

     17. मेघालय

    70,00,000

    20,00,000

     18. मिजोरम

    70,00,000

    20,00,000

     19. नागालैंड

    70,00,000

    20,00,000

     20. उड़ीसा

    70,00,000

    28,00,000

     21. पंजाब

    70,00,000

    28,00,000

     22. राजस्थान

    70,00,000

    28,00,000

     23. सिक्किम

    54,00,000

    20,00,000

     24. तमिलनाडु

    70,00,000

    28,00,000

     25. त्रिपुरा

    70,00,000

    20,00,000

     26. उत्तर प्रदेश

    70,00,000

    28,00,000

     27. उत्तराखंड

    70,00,000

    28,00,000

     28. पश्चिम बंगाल

    70,00,000

    28,00,000

     29. तेलंगाना

    70,00,000

    28,00,000

    केंद्र शासित प्रदेश

    केंद्र शासित प्रदेश का नाम

    किसी एक चुनाव में खर्च की अधिकतम सीमा

    संसदीय क्षेत्र में खर्च

     1. अंडमान और निकोबार

    54,00,000

     2. चंडीगढ़

    54,00,000

     3. दादरा और नगर हवेली

    54,00,000

     4. दमन और दीव

    54,00,000

     5. दिल्ली

    70,00,000

     6. लक्षद्वीप

    54,00,000

     7. पुदुचेरी

    54,00,000

    उपर्युक्त लेख से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि चुनाव की लागत में “दिन दूनी और रात चौगुनी वृद्धि” हो रही है जो कि लोकतंत्र के स्वस्थ विकास के लिए अच्छा नहीं है क्योंकि इस तरह के चुनाव केवल अमीरों द्वारा जीते जायेंगे और देश की जनसँख्या का एक बड़ा वर्ग बिना प्रतिनिधि के रह जायेगा.

    सन 1952 से अब तक लोकसभा चुनाव में प्रति मतदाता लागत कितनी बढ़ गयी है?

    एंग्लो इंडियन कौन होते हैं और उनके पास संसद में क्या अधिकार होते हैं?

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