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कार्बन पदचिह्न और कार्बन ऑफसेटिंग क्या हैं?

17-MAY-2018 17:19
    Carbon Footprint and Carbon Offsetting HN

    आधुनिक युग की सबसे प्रासंगिक और विवादित मुद्दा पर्यावरण की समस्या है जिनको संतुलित करने के लिए कई संस्थान विभिन्न दृष्टिकोणों के साथ कार्यरत हैं क्युकी शहरीकरण व औद्योगीकरण में अनियंत्रित वृद्धि ने कई पर्यावरणीय समस्याओ को जटिल बना दिया है।

    मानव निर्मित जलवायु परिवर्तन, या ग्लोबल वार्मिंग, वायुमंडल में कुछ प्रकार के गैसों की उत्सर्जन की वजह से होता है जो ना केवल पर्यावरण को अपितु मनुष्यों के ज़ीवन पर भी प्रभाव डाल रहे हैं। इसलिए कार्बन पदचिह्न और कार्बन ऑफसेटिंग आज के युग के लिए बहुत ही प्रासंगिक हो गए है जो हमे गैसीय उत्सर्जन की समझ को विकसित करने की ओर कार्यरत है।

    कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) क्या है?

    Carbon Footprint HN

    कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) का अर्थ किसी एक संस्था, व्यक्ति या उत्पाद द्वारा किया गया कुल कार्बन उत्सर्जन। यह उत्सर्जन कार्बन डाइऑक्साइड या ग्रीनहाउस गैसों के रूप में होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्य की सभी आदतें, जिनमें खानपान से लेकर पहने जाने वाले कपड़े तक शामिल हैं, कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) का कारण बनते हैं।

    दूसरे शब्दों में हर काम के लिए ऊर्जा की जरूरत पड़ती है और इससे कार्बन डाइआक्साइड (Carbon dioxide or CO2) गैस निकलती है, जो धरती को गर्म करने वाली सबसे अहम गैस है। हम दिन, महीने या साल में जितनी कार्बन डाइआक्साइड (Carbon dioxide or CO2) पैदा करते हैं, वह हमारा कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) है। इसे कम-से-कम रख कर ही पृथ्वी को जलवायु परिवर्तन के प्रकोप से बचाया जा सकता है।

    कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) के प्रकार

    कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को प्रकार में वर्गीकृत किया गया है जिसकी नीचे चर्चा की गयी है:

    1. संगठनात्मक: ऊर्जा उपयोग, औद्योगिक प्रक्रियाओं और कंपनी वाहनों जैसे संगठन में सभी गतिविधियों से कार्बन डाइआक्साइड (Carbon dioxide or CO2) का उत्सर्जन होता है।

    2. उत्पाद: किसी उत्पाद या सेवा के पूरे जीवन में कार्बन डाइआक्साइड (Carbon dioxide or CO2) का उत्सर्जन होता है।

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    ग्लोबल वार्मिंग पर व्यक्तिगत व्यवहार के प्रभाव को समझने के लिए कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) एक बहुत शक्तिशाली उपकरण है। जैसा कि हम जानते हैं, क्योटो प्रोटोकॉल के अनुसार छह तरह के ग्रीन हाउस गैस की पहचान की है जिसकी चर्चा नीचे की गयी है:

    1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)

    2. मीथेन (सीएच 4)

    3. नाइट्रस ऑक्साइड (CH4)

    4. हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs)

    5. पर्फ्लोरोकार्बन (PFCs)

    6. सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6)

    इसलिए उपरोक्त गैसों में से प्रत्येक का उत्सर्जन कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) में गिना जाएगा।

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    कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम करने के उपाय

    1. सौर, पवन ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल और पौधारोपण आदि से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।

    2. फ्लोरेसेंट बल्बों के इस्तेमाल से कार्बन पदचिह्न को कम कर सकते हैं।

    2. सार्वजनिक परिवहन और कार-पूल का उपयोग।

    3. हम पुनर्नवीनीकरण उत्पादों और ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल कर सकते हैं जिनको पुनर्नवीनीकरण किया जा सके।

    4. सामुदायिक स्तर पर ग्रीन हाउस गैसों को कम करने वाले प्रथाओं को प्रोत्साहित कर सकते हैं।

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    कार्बन ऑफसेटिंग क्या है?

    Carbon offseting HN

    सौर, हवा, ज्वारीय ऊर्जा या पुनर्निर्माण जैसे वैकल्पिक परियोजनाओं के विकास के माध्यम से कार्बन ऑफसेटिंग को कार्बन फुटप्रिंट के शमन के रूप में परिभाषित किया जाता है। ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन एक वैश्विक समस्या है और कार्बन ऑफसेटिंग वैकल्पिक परियोजनाओं के विकास पर कार्य करती है जिससे कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint) को कम किया जा सके।

    पर्यावरण और पारिस्थितिकीय: समग्र अध्ययन सामग्री

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