Search

भारत में रासायनिक दुर्घटना नियम क्या हैं?

विशाखापट्टनम में गैस रिसाव त्रासदी और पिछले दिनों में हुई कई अन्य औद्योगिक दुर्घटनाओं ने आपदा को कम करने के लिए रासायनिक दुर्घटना नियमों में संशोधन करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है. आइये इस लेख के माध्यम से भारत में रासायनिक दुर्घटना नियमों के बारे में विस्तार से अध्ययन करते हैं.
May 13, 2020 15:55 IST
facebook Iconfacebook Iconfacebook Icon
Chemical Accident Rules in India
Chemical Accident Rules in India

रासायनिक आपदाओं से इंसान पर असर पड़ता है और हताहतों की संख्या में भी बढ़ोतरी होती है और इससे प्रकृति और संपत्ति को भी नुकसान पहुंचता है.

विशाखापट्टनम गैस रिसाव दुर्घटना भारत में हुई कोई पहली दुर्घटना नहीं है, भारत में पिछले दिनों में इस तरह के कई औद्योगिक हादसे हुए हैं. यहां, हम भारत में हुए कुछ गैस रिसाव दुर्घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं:

1. छत्तीसगढ़ के सेल के भिलाई स्टील प्लांट में अक्टूबर 2018 में एक धमाके के कारण यह दुर्घटना हुई, जिसमें लगभग 9 लोगों की मौत हो गई और लगभग 14 लोग घायल हो गए थे. अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से गैस पाइपलाइन में असमान दबाव के कारण गैस पाइपलाइन में विस्फोट हुआ था.

2. मई 2017 में, तुगलकाबाद, दिल्ली में रानी झाँसी सर्वोदय कन्या विद्यालय के 300 से अधिक छात्रों को उनके स्कूल के पास गैस रिसाव के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अधिकारियों ने बताया कि यह तुगलकाबाद डिपो के सीमा शुल्क क्षेत्र में एक रासायनिक रिसाव था.

3. मार्च 2017 में कानपुर कोल्ड स्टोरेज में एक और दुर्घटना हुई, जिसमें लगभग 4 लोगों की मौत हो गई और लगभग 12 लोग घायल हो गए. अमोनिया गैस रिसाव के कारण यह हादसा हुआ, जिसके परिणामस्वरूप शिवराजपुर, कानपुर में कोल्ड स्टोरेज इकाई में एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ. विस्फोट के कारण इमारत ढह गई थी और 25 से अधिक लोग फंस गए थे. सुविधा का उपयोग आलू को स्टोर करने के लिए किया गया था.

भारत में परमाणु हमले का निर्णय कौन लेता है?

4. जून 2014 में, आंध्र प्रदेश में गेल पाइपलाइन में एक पाइपलाइन से गैस रिसाव के बाद आग लग गई. लगभग 15 लोग मारे गए और लगभग 18 लोग घायल हुए. ऐसा बताया जाता है कि लगभग 1 किमी के दायरे में आग फैल गई और लोग आग की लपटों के घिर गए थे और अपने घरों से बाहर निकल आए.

5. दुनिया की सबसे खराब रासायनिक औद्योगिक आपदा जो भारत ने 1984 में "भोपाल गैस त्रासदी" देखी थी. एक कीटनाशक संयंत्र से लगभग 40 टन से अधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस लीक हुई थी. यह अमेरिकी फर्म यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन के स्वामित्व में था और शहर में हजारों लोगों की जान गई थी.

दुर्घटना के बाद, कई अधिक लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंख में जलन और अंधापन इत्यादि बीमारियों से झूझना पड़ा. जांच के बाद, यह पता चला कि संयंत्र में सुरक्षा प्रक्रियाओं की कमी थी और स्टाफ भी कम था जिसके कारण  रिसाव हुआ था.

1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद भारत में कुछ रासायनिक नियम अस्तित्व में आए, इससे पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) एकमात्र प्रासंगिक कानून था, जो इस तरह की घटनाओं के लिए आपराधिक दायित्व को निर्दिष्ट करता था. सरकार ने भोपाल गैस रिसाव (दावों का प्रसंस्करण) अधिनियम, 1985, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991, राष्ट्रीय पर्यावरण अपील प्राधिकरण अधिनियम, 1997, सहित पर्यावरण को विनियमित करने और निर्दिष्ट करने और सुरक्षित रखने वाले कई कानूनों की श्रृंखला पारित की. आइये अब भारत में रासायनिक नियमों के बारे में अध्ययन करते हैं.

1984 के भोपाल गैस आपदा के बाद, पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) ने खतरनाक रसायनों के विनिर्माण, उपयोग और हैंडलिंग को विनियमित करने के लिए नियमों के दो सेटों को अधिसूचित किया. ये नियम थे:

- निर्माण, भंडारण और आयात खतरनाक रसायन (MSIHC) नियम, 1989 (Manufacture, Storage and Import of Hazardous Chemicals (MSIHC) Rules, 1989)

- रासायनिक दुर्घटनाएँ (आपातकालीन योजना, तैयारी एवं प्रतिक्रिया) (CAEPPR) नियम (1996) (Chemical Accidents (Emergency Planning, Preparedness, and Response), (CAEPPR) Rules, 1996).

रासायनिक (MSIHC) नियम, 1989: उद्देश्य

- औद्योगिक गतिविधियों से होने वाली प्रमुख रासायनिक दुर्घटनाओं को रोकना  आवश्यक हैं.

- रासायनिक (औद्योगिक) दुर्घटनाओं के प्रभावों को सीमित करना.

इसके अलावा, जैसा कि MSIHC नियम, 1989 द्वारा निर्धारित किया गया है, मेजर एक्सीडेंट हैज़ार्ड (Major Accident Hazard, MAH) इकाइयों के अधिभोगकर्ता ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान की तैयारी के लिए उत्तरदायी हैं. जबकि जिले के अधिकारियों के परामर्श से फैक्ट्रियों के मुख्य निरीक्षक (CIF) को ऑफ-साइट आपातकालीन योजनाओं को भी व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है.

CAEPPR नियम, 1996

इसने संकट प्रबंधन के लिए वैधानिक बैकअप की स्थापना की और मेजर दुर्घटना हैज़ार्ड (Major Accident Hazard, MAH) प्रतिष्ठानों की पहचान के लिए मानदंड निर्धारित किए. इस तरह के प्रतिष्ठानों के साथ सभी जिलों के लिए संकट प्रबंधन समूहों की स्थापना करना भी आवश्यक है.

MoEF ने समय के साथ तालमेल रखने के लिए नियमों को अपग्रेड करने के लिए 2016 में प्रस्तावित किया. हितधारक परामर्श के लिए नियमों में संशोधन का मसौदा तैयार किया गया था. लेकिन नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका.

कुछ सामान्य खतरनाक रसायन हैं:

एसीटोन, एसिटिलीन गैस, अमोनिया गैस, आर्गन गैस, बेंजीन, कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रॉक्साइड), क्लोरीन गैस, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, हाइड्रोजन, एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस), मेथनॉल (मिथाइल अल्कोहल), नेफ्था, फॉस्फोरिक एसिड, सल्फ्यूरिक एसिड, ट्राई नाइट्रो टोल्यूनि (टीएनटी) इत्यादि.

उम्मीद करते हैं कि आपको भारत में रसायनिक नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त हुई होगी.

रासायनिक विस्फोटक क्या है और कितने प्रकार का होता है?