इंसेफेलाइटिस (चमकी बुखार): कारण, लक्षण और उपचार

मस्तिष्क में सूजन को इंसेफेलाइटिस के रूप में जाना जाता है. इसे एक्यूट वायरल इंसेफेलाइटिस या असेप्टिक इंसेफेलाइटिस और चमकी बुखार भी कहते हैं. इसमें मस्तिष्क में जलन भी हो सकती है या बेचैनी. यह एक दुर्लभ बीमारी है और आजकल बिहार में तबाही मचा रही है. मुजफ्फरपुर और बिहार के आसपास के जिलों में 100 से अधिक बच्चों की मौत हो गई है. क्या आप जानते हैं कि अधिकांश मरने वाले बच्चों की आयु 1-10 के बीच है? आइये इंसेफेलाइटिस (चमकी बुखार), इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में अध्ययन करते हैं.
Created On: Jun 24, 2019 12:03 IST
Modified On: Jun 24, 2019 12:54 IST
What is Chamki Fever?
What is Chamki Fever?

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) ज्यादातर बच्चों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है. इस बीमारी में सबसे पहले तेज़ बुखार आता है और यह रुग्णता और मृत्यु दर को जन्म दे सकता है. हर्षवर्धन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने चम्की बुखार या इंसेफेलाइटिस के प्रकोप के कारण की पहचान करने के लिए एक शोध संस्थान स्थापित करने की वकालत की है. बिहार राज्य में लगभग 12 जिले चम्की बुखार की चपेट में हैं जिनमें मुज़फ़्फ़रपुर, वैशाली और पूर्वी चंपारण शामिल हैं. हालांकि, मुजफ्फरपुर को सबसे ज्यादा हिट जोन घोषित किया गया है.

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम क्या है?
एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम चिकित्सकीय रूप से समान न्यूरोलॉजिकल अभिव्यक्ति का एक समूह है जिसे बुखार की तीव्र शुरुआत के रूप में जाना जाता है और इसमें व्यक्ति की मानसिक स्थिति में बदलाव देखने को मिलते है जैसे delirium,मानसिक भ्रम, कोमा, व्यक्तित्व में परिवर्तन, कमजोरी, दौरे की नई शुरुआत और प्रभावित मस्तिष्क के हिस्से के आधार पर अन्य लक्षण हो सकते हैं. यह देखा गया है कि इस बीमारी के मामले ज्यादातर अप्रैल से जून के दौरान होते हैं जो मुख्य रूप से कम उम्र के बच्चों में होते हैं और वे भी जिन्होंने लीची के बाग में कच्ची लीची खाई हो.

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम : कारण
- सूजन का मस्तिष्क में होना जो कि संक्रमण के कारण या प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा मस्तिष्क पर हमला करने के कारण होती है.
- एक्यूट इंसेफेलाइटिस के मुख्य प्रेरक कारक हर्पीज वायरस, एंटरोवायरस, वेस्ट नाइल, जापानी इंसेफेलाइटिस, पूर्वी इक्वीन वायरस, टिक-जनित वायरस इत्यादि हैं.
- इंसेफेलाइटिस बैक्टीरिया, कवक या परजीवी, रसायन, विषाक्त पदार्थों और गैर-संक्रामक एजेंटों के कारण भी होता है.
- आपको बता दें कि भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का बड़ा कारण जापानी वायरस दूसरी तरफ Nipah वायरस और Zika वायरस भी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम रोग के कारण पाए जाते हैं.
- संक्रमण के दौरान या बाद में वायरल इंसेफेलाइटिस कई वायरल बीमारी जैसे इन्फ्लूएंजा, हर्पीज सिम्प्लेक्स, मम्प्स, खसरा, रूबेला, रेबीज, चिकनपॉक्स और अर्बोवायरस संक्रमण के साथ विकसित हो सकता है, जिसमें वेस्ट नाइल वायरस भी शामिल है.
- हरपीज सिम्प्लेक्स टाइप 1 वायरस, वायरल इंसेफेलाइटिस के अधिक सामान्य और गंभीर कारणों में से एक है.
- एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के अन्य कारणों में चंडीउरा वायरस, मम्प्स, खसरा, डेंगू हैं; Parvovirus B4, एपस्टीन-बार वायरस S निमोनिया इत्यादि भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने के अन्य कारण हैं.

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इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम: लक्षण
- तेज़ बुखार
- उल्टी
- सरदर्द
- प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
- उलझन
- गर्दन और पीठ का अकड़ना
- जी मिचलाना
- व्यक्तित्व में बदलाव
- बोलने या सुनने में समस्या
- मतिभ्रम
- स्मृति हानि
- गंभीर मामलों में दौरे, लकवा और कोमा भी हो सकता है.

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से कौन प्रभावित है?
- यह मूल रूप से 15 साल से कम उम्र की आबादी को प्रभावित करता है.
- करणीय जीव में मौसमी और भौगोलिक भिन्नता होती है.
- जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस, गंगा के मैदानी क्षेत्र सहित पूर्वी यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में इसके स्थानिक क्षेत्र हैं.
आपको बता दें कि कुछ अध्ययनों के अनुसार कहा जाता है कि भारत में उत्तर और पूर्वी भारत में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का प्रकोप खाली पेट बच्चों को कच्ची लीची के फल खाने से जोड़ा गया है. टॉक्सिंस हाइपोग्लाइसीन ए (hypoglycin A) और मेथिलीनसाइक्लोप्रोपाइलग्लिसिन (methylenecyclopropylglycine, MCPG) कच्चें फलों में मौजूद होते हैं जो बड़ी मात्रा में होने पर उल्टी का कारण बनते हैं. हाइपोग्लाइसीन ए में अमीनो एसिड होता है जो कच्ची लीची में पाया जाता है और MCPG लीची के बीजों में पाया जाने वाला एक ज़हरीला यौगिक है जो ब्लड शुगर में अचानक से गिरावट, उल्टी, मानसिक अवस्था को परिवर्तित, बेहोशी, कोमा का कारण बनता है. ये विषाक्त पदार्थ अचानक तेज़ बुखार और दौरे का कारण बनता है और विशेष रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार, अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है.

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क्या इंसेफेलाइटिस एक संक्रामक रोग है?
मस्तिष्क में सूजन संक्रामक नहीं है. लेकिन वायरस जो इंसेफेलाइटिस का कारण बनता है वह हो सकता है. इसके अलावा, अगर किसी व्यक्ति में वायरस है जिसका मतलब यह नहीं है कि वह इंसेफेलाइटिस विकसित करेगा ही.

इंसेफेलाइटिस या एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES): उपचार
- इंसेफेलाइटिस या AES से पीड़ित बच्चों को किसी भी प्रकार के दुस्साहस से बचने के लिए गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू के अस्पताल में देखभाल की जरूरत होती है.
- डॉक्टर मस्तिष्क की आगे की सूजन को रोकने के लिए उनके रक्तचाप, हृदय गति, श्वास और शरीर के तरल पदार्थ को देखते हैं.
- रोगी एंटीवायरल ड्रग्स देकर इंसेफेलाइटिस के कुछ रूप का भी इलाज कर सकते हैं.
- मस्तिष्क में सूजन को कम करने के लिए Corticosteroids भी दिया जाता है.
- दौरे पड़ने वाले बच्चे को एंटीकॉनवल्सेंट (Anticonvulsants) दिया जा सकता है.
- एसिटामिनोफेन की तरह ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाएं, बुखार और सिरदर्द में मदद कर सकती हैं.
- रोगी को सिरदर्द और बुखार को कम करने के लिए एसिटामिनोफेन, इबुप्रोफेन और नेपरोक्सन सोडियम जैसी सूजन-रोधी दवाएं भी दी जाती हैं.
इंसेफेलाइटिस या AES के अधिकांश मामले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं या हल हो जाते हैं लेकिन कुछ गंभीर मामलों में कुछ सप्ताह लग सकते हैं.
टीकाकरण (Vaccination): भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जापानी (JE) वैक्सीन की 2 खुराकें स्वीकृत की गई हैं, जिन्हें 9 महीने की उम्र में खसरे के साथ देने के लिए UIP में शामिल किया गया है और दूसरा डीपीटी बूस्टर 16-24 महीने की आयु के बच्चे को दी जाती है जिसे अप्रैल 2013 से लागू किया गया है.

तो, हम कह सकते हैं कि इंसेफेलाइटिस या AES मस्तिष्क में एक संक्रमण या सूजन है जो वायरस, बैक्टीरिया, कवक इत्यादि के कारण हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप सिरदर्द, तेज बुखार, दौरे, उल्टी, कोमा तियादी होते हैं.

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