Comment (0)

Post Comment

0 + 1 =
Post
Disclaimer: Comments will be moderated by Jagranjosh editorial team. Comments that are abusive, personal, incendiary or irrelevant will not be published. Please use a genuine email ID and provide your name, to avoid rejection.

    मुद्रा क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है?

    सामान्य अर्थों में ‘मुद्रा’ सिर्फ उस वस्तु को कहते हैं जिसको केंद्र सरकार ने सिक्कों या नोटों के रूप में छापा है परन्तु मुद्रा की सर्व व्यापक परिभाषा यह है कि “मुद्रा वह है जो कि मुद्रा का कार्य करे”|भारत में पत्र मुद्रा को निर्गत करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक को है जबकि इस पर लिखी गयी राशि के भुगतान का अंतिम दायित्व भारत सरकार का होता है| सभी सिक्कों और एक रुपये के नोट बनाने का अधिकार भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का पास है |
    Created On: Apr 22, 2019 13:05 IST
    Modified On: Apr 22, 2019 13:13 IST
    Indian Economy
    Indian Economy

    जिस तरह से ये कहावत सही है कि "रहिमन पानी रखिये, बिन पानी सब सून" उसी तरह यह कहावत भी ठीक लगती है कि "रहिमन पैसा रखिये, बिन पैसा सब सून". वर्तमान समय में वास्तविकता यह है कि बिना मुद्रा के किसी भी अर्थव्यवस्था की कल्पना भी नही की जा सकती है. या फिर यूं कहें कि बिना अर्थ के कोई तंत्र नहीं होता है.

    अर्थशास्त्री क्राऊदर के अनुसार, मुद्रा आधुनिक समय में मनुष्य द्वारा किये गए तीन महत्वपूर्ण अविष्कारों : मुद्रा, पहिया और वोट में से एक है.

    अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर मुद्रा किसे कहते हैं| सामान्य अर्थों में मुद्रा सिर्फ उस वस्तु को कहते हैं जिसको केंद्र सरकार ने सिक्कों या नोटों के रूप में छापा है परन्तु मुद्रा की सर्व व्यापक परिभाषा यह है कि “मुद्रा वह है जो कि मुद्रा का कार्य करे” | नोटबंदी के समय बंद किये गए नोट भी ‘मुद्रा’ थे क्योंकि उनको सरकार की तरफ से केन्द्रीय बैंक ने जारी किया था लेकिन फिर भी ये नोट मुद्रा का कार्य नही कर रहे थे अर्थात उपर्युक्त बात सही है कि हम सिर्फ ‘उसी वस्तु’ को मुद्रा कह सकते हैं जो कि मुद्रा का कार्य करे |

    मुद्रा के कार्यों को इन चार प्रकारों में बांटा जा सकता है l

    "Money is a matter of functions four - A Medium, A Measure, A Standard, A Store"

    मुद्रा कितने प्रकार की होती है (Kinds of Money): मुद्रा के अंतर्गत मुख्य रूप से सिक्के, पत्र मुद्रा तथा जमा मुद्रा या बैंक मुद्रा को शामिल किया जाता है |

    1. नजदीकी मुद्रा (Near Money): उस संपत्ति को जो ऐसे रूप में हो जिसे जल्दी तथा आसानी से मुद्रा में परिवर्तित किया जा सके उन्हें समीपस्थ या नजदीक मुद्रा कहते हैं |

    उदाहरण: घर जमीन, सोना, चांदी आदि

    near money

    image source:Twitter

    2. पत्र मुद्रा (Currency Notes): सामान्य रूप से तो पत्र मुद्रा का अपना कोई मूल्य नही है जबकि  सिक्के का अपना मूल्य (metal value) होता है जैसे यदि एक सिक्के को पिघला दिया जाये तो उससे मिलने वाली धातु (metal) का अपना कुछ बाजार मूल्य होगा | पत्र मुद्रा का जो भी मूल्य होता है वह उस पर, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर की शपथ (लिखे गए कथन) “मैं धारक को (जितने रुपये का नोट होता है) रुपये अदा करने का वचन देता हूँ” के कारण होता है | यदि गवर्नर की यह शपथ किसी नोट पर न लिखी हो तो वह नोट सिर्फ कागज का एक टुकड़ा होता है | पत्र मुद्रा को निर्गत करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक को है जबकि इस पर लिखी गयी राशि के भुगतान का अंतिम दायित्व भारत सरकार का होता है |

    उदाहरण: सभी मूल्यवर्ग (रु.2, रु.5, रु.10,रु.100,रु.500, रु.1000, रु.2000) के नोट |

    indian currency notes

    image source:Indiatimes.com

    भारत में रुपया कैसे, कहां बनता है और उसको कैसे नष्ट किया जाता है?

    3. जमा मुद्रा या बैंक मुद्रा (Deposit Money): बैंकों द्वारा खोले गए मांग जमा (demand deposit) मुद्रा के रूप में प्रयुक्त होते हैं, क्योंकि इन जमाओं को चेकों के द्वारा हस्तांतरित किया जा सकता है,पर प्रत्यक्ष नही|

    4. प्रतिनिधि मुद्रा (Representative Money): प्रतिनिधि मुद्रा उस मुद्रा को कहते हैं जो कि वास्तविक मुद्रा की तरह ही कार्य करे, जैसे प्रतिनिधि मुद्रा की सहायता से सोना या चांदी या कोई और जरुरत की चीज खरीदना| प्रतिनिधि मुद्रा में सिक्के, या प्रमाण पत्र को गिना जाता है|

    5. विश्वास आधारित मुद्रा (Fiduciary Money): ऐसी मुद्रा जो इसे जारी करने वाले अधिकारी या संस्था के द्वारा दिए गए विश्वास पर चलती है Fiduciary Money कहलाती है| सभी प्रकार की मुद्राएँ(नोट्स और सिक्के) Fiduciary Money कहलातीं हैं |

    उदाहरण: करेंसी नोट्स, सिक्के और बैंक जमा |

    500 रूपये और 1000 रूपये के नोट प्रतिबंधित: क्या ऐसा भारतीय इतिहास में पहली बार हुआ है?

    6. वैध मुद्रा (Fiat Money or Legal Tender ): मुद्रा को एक और प्रकार से बांटा जा सकता है इसमें एक प्रकार हैं वैध मुद्रा और दूसरा है गैर वैधानिक मुद्रा |

    वैध मुद्रा, वह मुद्रा होती है जो कि सरकार के आदेश पर चलती है जैसे सिक्के और नोट्स| इस प्रकार की मुद्रा को लेना सभी के लिए कानूनन जरूरी होता है, कोई इसे लेने से मना नही कर सकता, यदि वो ऐसा करता है तो सीधे रूप से सरकारी आदेश की अवहेलना मानी जाती है और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जा सकती है |

    coins and currency of india

    image source:Dreamstime.com

    नोट: भारत में छोटे सिक्के जैसे एक रुपये के नोट या सिक्के एक सीमा तक ही भुगतान के रूप में इस्तेमाल किये जा सकते हैं अर्थात ऐसा नही हो सकता कि कोई व्यक्ति 1 करोड़ रुपये का भुगतान एक रुपये के सिक्कों में करे, इतनी बड़ी मात्रा में कोई व्यक्ति सिक्कों को लेने से मना भी कर सकता है और उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नही होगी |

    7. गैर वैधानिक मुद्रा (Non Legal Tender): इस तरह की मुद्रा सिर्फ व्यक्तिगत विश्वास पर चलती है अर्थात इस मुद्रा को स्वीकार करने के लिए किसी को बाध्य नही किया जा सकता है या कोई व्यक्ति यदि इस प्रकार की मुद्रा को लेने से मना कर देता है तो भी उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नही की जा सकती है|

    उदाहरण: साख मुद्रा, ड्राफ्ट, चेक, बिल, आदि |

    Non Legal tender

    8. वस्तुगत मुद्रा (Commodity Money) का मतलब ऐसी मुद्रा से है, जिसका मूल्य उस वस्तु के आधार पर निर्धारित होता है, जिससे वह बनता हैl इस प्रणाली में वस्तु ही मुद्रा का कार्य करती है अर्थात ‘वस्तु’ ही मुद्रा है। उदाहरण के लिए, ऐसी वस्तुएं जिनका उपयोग विनिमय के माध्यमों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है उनमें सोना, चांदी, तांबा, नमक, मिर्च, चावल, बड़े पत्थर आदि शामिल हैंl यह मुद्रा, वस्तु विनिमय प्रणाली में विद्यमान थी |

    commodity money

    image source:SlideShare

    Piggy बैंक (गुल्लक): उत्पत्ति और उसके नाम के पीछे की कहानी

    फेस मूल्य (Face Value) और मेटल मूल्य (Metal Value) में अंतर

    फेस मूल्य (Face Value): फेस मूल्य, मुद्रा के उस मूल्य को कहते हैं जो कि उस मुद्रा पर अंकित होता है |

    मेटल मूल्य (Metal Value): मेटल मूल्य, का मतलब होता है कि “मुद्रा” जिस धातु या कागज की बनी है , उसको यदि मेटल में बदल दिया जाये तो उसका बाजार मूल्य कितना होगा |

    अंतर:  नोटों की फेस वैल्यू हमेशा ही उनके मेटल वैल्यू से ज्यादा होती है क्योंकि नोटों को बनाने में लगने वाले कागज का वैल्यू न के बराबर होता है जबकि नोटों की फेस वैल्यू (जितने रुपये का वह नोट होता है जैसे 100, 500 या 2000) बहुत अधिक होती है|

    इसी तरह सिक्कों की फेस वैल्यू > मेटल वैल्यू

    जब भी सिक्कों की फेस वैल्यू < मेटल वैल्यू वाली दशा बाजार में हो जाती है तो सरकार उस सिक्के को या तो बंद कर देती है या फिर उस सिक्के में इस्तेमाल होने वाली धातु का वजन कम कर दिया जाता है ताकि ऐसा न हो कि लोग (स्वर्णकार) उस सिक्के को पिघलाकर धातु को बेचकर लाभ कमा लें | इसी कारण आपने देखा होगा कि बाजार में हर साल नये तरह के सिक्के जारी किये जाते हैं |

    old new coins of india

    image source:eBay

    मुद्रा बहुत शक्तिशाली है परन्तु इसके द्वारा समृद्धि नही खरीदी जा सकती हैl मुद्रा वही चीज खरीद सकती है जो कि वास्तव में अर्थव्यवस्था में है | यदि मुद्रा के द्वारा समृद्धि खरीदी जाती तो सरकार ने मुद्रा की छपाई के साथ ही गरीबी को ख़त्म कर दिया होता|

    जानें भारत में एक नोट और सिक्के को छापने में कितनी लागत आती है?