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PM2.5 और PM10 क्या है और ये स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करते हैं?

06-JUN-2018 15:43
    What is PM 2.5 and PM10 and how they affect health?

    PM को पर्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) या कण प्रदूषण (particle pollution) भी कहा जाता है, जो कि वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण है. हवा में मौजूद कण इतने छोटे होते हैं कि आप नग्न आंखों से भी नहीं देख सकते हैं. कुछ कण इतने छोटे होते हैं कि इन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का उपयोग करके पता लगाया जा सकता है. कण प्रदूषण में PM 2.5 और PM 10  शामिल हैं जो बहुत खतरनाक होते हैं.

    PM 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को संदर्भित करता है जिसमें 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास होता है, जो मानव बाल के व्यास के लगभग 3% है.

    आम तौर पर PM2.5 के रूप में लिखा जाता है, इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की मदद से ही पता लगाया जा सकता है. ये PM10 के समकक्षों से भी छोटे होते हैं.  PM10 वो कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमेटर होता है और इन्हें fine particles भी कहा जाता है. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम 10 को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर भी कहते हैं.

    इसमें धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. PM10 और 2.5 धूल, कंस्ट्रदक्शेन की जगह पर और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ता है.

    हम आपको बता दें कि हवा में PM2.5 की मात्रा 60 और PM10 की मात्रा 100 होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है.

    पर्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter) के स्रोत (sources)

    पर्टिकुलेट मैटर विभिन्न आकारों के होते हैं और यह मानव और प्राकृतिक दोनों स्रोतों के कारण से हो सकता है. स्रोत प्राइमरी और सेकेंडरी हो सकते हैं. प्राइमरी स्रोत में ऑटोमोबाइल उत्सर्जन, धूल और खाना पकाने का धुआं शामिल हैं. प्रदूषण का सेकेंडरी स्रोत सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे रसायनों की जटिल प्रतिक्रिया हो सकता है. ये कण हवा में मिश्रित हो जाते हैं और इसको प्रदूषित करते हैं. इनके अलावा, जंगल की आग, लकड़ी के जलने वाले स्टोव, agriculture burning, उद्योग का धुआं, निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल वायु प्रदूषण आदि और स्रोत हैं.

    PM2.5 और PM10 का स्वास्थ्य पर प्रभाव

    What is the size of Particulate matter
    Source: www.irceline.be.com

    PM2.5 और PM10 कण दोनों इतने छोटे हैं कि आप अपनी नग्न आंखों के माध्यम से नहीं देख सकते हैं और वे गैस के रूप में कार्य करते हैं. जब आप सांस लेते हैं तो ये कण आपके फेफड़ों में चले जाते हैं जिससे खांसी और अस्थमा के दौरे पढ़ सकते हैं. उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है, इसके परिणामस्वरूप समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है. क्या आप जानते हैं कि PM2.5 का स्तर ज्यादा होने पर धुंध बढ़ती है और साफ दिखना भी कम हो जाता है. इन कणों का हवा में स्तर बढ़ने का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है.

    कुछ अन्य बीमारियां जिनका स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है इस प्रकार हैं:

    - सांस लेने में दिक्कत

    - आंखें, नाक और गले में जलन

    - छाती में खिंचाव

      - फेफड़ों का सही से काम ना कर पाना

    - गंभीर श्वसन रोग

    - अनियमित दिल की धड़कन और इत्यादि\

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    इन कणों से सबसे ज्यादा खतरा किसको होता है?

    हर किसी को सांस लेने के लिए हवा की जरूरत होती है और प्रदूषित हवा को सांस लेने से वायु प्रदूषण के संपर्क में आ जाते हैं. एक अध्ययन में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का खतरा अधिक होता है. इसके अलावा, वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को बुरी तरह प्रभावित होने की संभावना रहती है. दिल और फेफड़ों की बिमारी वाले लोगों को वायु प्रदूषण से काफी खतरा हो सकता है.

    अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) ने हार्ट के स्वास्थ्य और मृत्यु दर पर PM2.5 के प्रभाव के बारे में भी चेतावनी दी है:

    Exposure to PM <2.5 μm in diameter (PM2.5) over a few hours to weeks can trigger cardiovascular disease-related mortality and nonfatal events; longer-term exposure (eg, a few years) increases the risk for cardiovascular mortality to an even greater extent than exposures over a few days and reduces life expectancy within more highly exposed segments of the population by several months to a few years.”

    वायु प्रदुषण से कैसे बचाव करें?

    - वायु प्रदुषण या प्रदूषित हवा की समस्या से बचाव के लिए लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए और ज्यादा दिक्कत होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

    - प्रदूषण स्तर उच्च होने पर बाहर व्यायाम करने से बचें.

    - लकड़ी या थ्रैश न जलाएं क्योंकि ये कण प्रदूषण का मुख्य स्रोत हैं.

    - इनडोर और आउटडोर दोनों जगहों पर धूम्रपान न करें.

    - वायु प्रदूषण से अपने इनडोर स्पेस को सुरक्षित रखने के लिए, आप वायु शोधक (air purifier) का भी उपयोग कर सकते हैं. वायु शोधक (air purifier) आपके घर के अंदर वायु प्रदूषण की दर को कम कर सकता है.

    - यदि वायु प्रदूषण कई दिनों तक रहता है, तो एक अप्रभावित स्थान पर जाने पर विचार करें.

    क्या आप जानते हैं कि हवा में PM2.5 और PM10 का स्तर कितना होना चाहिए?

    PM10 का सामान्यत लेवल 100 माइक्रो ग्राम क्यूोबिक मीटर और PM2.5 का लेवल 60 माइक्रो ग्राम क्यूलबिक मीटर होना चाहिए.

    जैसा की हम अब जान गए हैं कि वायु में PM2.5 और PM10 का लेवल बढ़ना यानी वायु प्रदुषण का बढ़ना. इससे बीमारियों के होने की संभावना ज्यादा हो जाती हैं. तो हमें एहतियात बरतना चाहिए जैसे की मास्क का उपयोग करना इत्यादि.

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