जीवाणुओं का आर्थिक महत्व क्या हैं

जीवाणु सबसे सरल, अतिसूक्ष्म तथा एक कोशीय (unicellular), आद्य (primitive) जीव है. जीवाणुओं का पता सर्वप्रथम एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक (1683) ने लगाया था. इनको जीवाणु विज्ञान का जनक (father of bacteriology) कहा जाता है. आइये इस लेख के मध्याम से जानतें है कि जीवाणु या बैक्टीरिया का आर्थिक महत्व क्या है, कैसे ये हमारे लिए लाभकारी होते है, इनका उपयोग कहा-कहा किया जा सकता है आदि.
Created On: Dec 22, 2017 14:41 IST
Why are bacteria important to people
Why are bacteria important to people

जीवाणुओं का पता सर्वप्रथम एंटोनी वॉन ल्यूवेन्हॉक (1683) ने लगाया था. इनको जीवाणु विज्ञान का जनक (father of bacteriology) कहा जाता है. एरनबर्ग (1829) ने इन्हें जीवाणु (bacteria) नाम दिया. फ्रांस के वैज्ञानिक लुई पाश्चर (1876) ने बताया कि किण्वन (fermentation) की क्रिया जीवाणुओं द्वारा होती है. इसलिए इनको सूक्ष्म जीव विज्ञान (microbiology) का जनक तथा रोबर्ट कोच को आधुनिक जीवाणु विज्ञान (father of modern bacteriology) का जनक कहा जाता है.
जीवाणु सबसे सरल, अतिसूक्ष्म तथा एक कोशीय (unicellular), आद्य (primitive) जीव है. ये विश्वजनीन अर्थार्त सर्वयापी जीव हैं जो जल, जीवित व मृत पौधों तथा जंतुओं पर वास करते हैं. ये बर्फ व गर्म जल के झरनों में 80०C तक के तापक्रम पर पाये जाते हैं. इनमें कोशा-भित्ति ( cell-wall) पायी जाती है, जिसके कारण इन्हें पादप जगत में रखते हैं. आइये इस लेख के मध्याम से जानतें है कि जीवाणु या बैक्टीरिया का आर्थिक महत्व क्या है, कैसे ये हमारे लिए लाभकारी होते है, इनका उपयोग कहा-कहा किया जा सकता है आदि.
जीवाणुओं का आर्थिक महत्व
1. कृषि में (In agriculture)

Bacteria are used in agriculture
Source: www.microbiologyonline.org.com
कुछ जीवाणु भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं. सभी पौधों के लिए नाइट्रोजन आवश्यक है. वायुमंडल में नाइट्रोजन लगभग 7.8% होती है. प्राय: पौधें नाइट्रेट्स के रूप में नाइट्रोजन लेते हैं. पृथ्वी में नाइट्रेट्स निम्न प्रकार से बनती हैं-
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणुओं द्वारा (By nitrogen fixing bacteria)
- नाइट्रिंग बैक्टीरिया और नाइट्रीकारक जीवाणु (Nitrifying bacteria)
- मृत पौधों या जंतुओं के सड़ने से (Decay of dead plants and animal bodies)
- सल्फर जीवाणु से (Sulphur bacteria)

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2. डेरी में (In dairy)

Microbiology of food
Source: www. qph.ec.quoracdn.net.com
क्या आप जानते हैं की दूध में स्ट्रेप्टोकोकस लैक्टिस एवं लैक्टोबैसिलस लैक्टिस नामक जीवाणु पाये जाते हैं. ये जीवाणु दूध में पाये जाने वाली लाक्टोस शर्करा का किण्वन करके लैक्टिक अम्ल (lactic acid) बनाते हैं, जिसके कारण दूध खट्टा हो जाता है. दूध को 15 सेकंड तक 71०C पर गर्म करके शीघ्रता से ठंडा करने पर लैक्टिक अम्ल जीवाणुओं की संख्या कम हो जाती है. इस क्रिया को पाश्चुरीकरण (pasteurization) कहते हैं.
लैक्टिक अम्ल जीवाणु (lactic acid bacteria) दुश में पाये जाने वाले केसीन नामक प्रोटीन की छोटी-छोटी बूंदों को एकत्रित करके दही जमाने में सहायता करते हैं. दही को मथने से मक्खन और गर्म करने पर घी तैयार हो जाता है. जब दूध से पनीर को बनाया जाता है तो इस क्रिया में लैक्टोबैसिलस लैक्टिस तथा ल्यूकोनोस्टोक सिट्रोवोरम भाग लेते हैं.
3. औद्योगिक महत्व (Industrial value)
औद्योगिक द्रष्टिकोण से जीवाणु अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं. उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
- सिरके का निर्माण शर्करा घोल से एसीटोबैक्टर ऐसीटी नामक जीवाणु द्वारा होता है.
- शर्करा के घोल से ब्यूटाइल एल्कोहोल एवं ऐसीटोन का निर्माण क्लोस्ट्रीडियम एसीटोब्यूटाइलिकम जीवाणु द्वारा किया जाता है.
- कुछ जीवाणुओं, जैसे बैसिलस मेगाथीरियम एवं मिक्रोकोकस कैंडीडैनस द्वारा तम्बाकू की पत्ती में सुगंध एवं स्वाद बढ़ जाता है जो कि इन जीवाणुओं की किण्वन क्रिया द्वारा होता है.
- चाय के उद्योग और चमड़ा के उद्योग में भी जीवाणुओं का काफी महत्व है.
4. औषधियां (Medicines)

Bacteria are used in medicines
कुछ एंटीबायोटिक दवाओं जीवाणुओं की क्रिया से बनाई जाती हैं, जैसे बैसिलस ब्रेविक्स से एंटीबायोटिक-थायरोक्सिन और बैसिलस सब्टिलिस से एंटीबायोटिक- सब्टिलिन आदि.
5. विविध (Miscellaneous)
कुछ जीवाणु कार्बनिक मल पदार्थों जैसे गोबर, मल व पेड़-पौधों की सड़ी-गली पत्तियों को खाद तथा ह्यूमस में बदलकर उपयोगी बनाते हैं. एशरिकिया कोली नामक जीवाणु मनुष्य व दुसरे जंतुओं की छोटी आंत में रहता है और विटामिन का निर्माण करता है.
ऐसा कहना गलत नहीं होगा की जीवाणु हामारी काफी मदद करते हैं, आर्थिक सहायता करते है जैसे की हमने ऊपर आर्टिकल में देखा परन्तु कुछ ऐसी भी क्रियाएं है जीवाणुओं की जिनसे नुक्सान भी पहुचता है जैसे कि भोजन का सड़ना, रोग का होना, कपास का नाश आदि.

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