किसी शतरंज खिलाडी को ग्रेंड मास्टर कब कहा जाता है?

खिलाड़ी को ग्रेंड मास्टर का ख़िताब शतरंज की सर्वोच्च संस्था “विश्व शतरंज महासंघ” द्वारा दिया जाता है. यह शतरंज की दुनिया में दिया जाने वाला यह सर्वोच्च ख़िताब है. वर्तमान में पूरी दुनिया में 1594 लोगों के पास ग्रेंड मास्टर का ख़िताब है जिसमे से 1559 पुरुष और केवल 35 महिलाएं हैं. इस प्रकार विश्व शतरंज महासंघ के पास जितने खिलाडी रजिस्टर्ड है उनमे से सिर्फ ०.3% के पास ही ग्रेंड मास्टर का ख़िताब है.
Jun 25, 2018 11:04 IST
    How Grand Master are made

    शतरंज की सर्वोच्च संस्था “विश्व शतरंज महासंघ” है जिसे फ्रेंच भाषा में शार्ट रूप में FIDE-Federation Internationale des Echecs भी कहा जाता है. FIDE की स्थापना 20 जुलाई 1924 में की गयी थी और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने इसे 1999 में अंतर्राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता दी थी.

    ग्रेंड मास्टर ख़िताब के बारे में
    खिलाड़ी को ग्रेंड मास्टर का ख़िताब शतरंज की सर्वोच्च संस्था “विश्व शतरंज महासंघ” द्वारा दिया जाता है. यह शतरंज की दुनिया में दिया जाने वाला यह सर्वोच्च ख़िताब है. जो खिलाडी इसे एक बार जीत लेता है वह इस ख़िताब को पूरी जिंदगी अपने पास रखता है अर्थात अपने नाम के आगे लगा  सकता है. हालाँकि “विश्व शतरंज महासंघ” ने इसके लिए कुछ नियम भी बनाये है यदि किसी खिलाड़ी पर “धोखा और भ्रष्टाचार” के आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उससे यह ख़िताब वापस भी ले लिए जाता है.

    कितने लोगों के पास ग्रेंड मास्टर का ख़िताब है?
    वर्तमान में पूरी दुनिया में 1594 लोगों के पास ग्रेंड मास्टर का ख़िताब है जिसमे से 1559 पुरुष और केवल 35 महिलाएं हैं. इस प्रकार विश्व शतरंज महासंघ के पास जितने खिलाडी रजिस्टर्ड है उनमे से सिर्फ ०.3% के पास ही ग्रेंड मास्टर का ख़िताब है? ज्ञातव्य है कि विश्व में सबसे अधिक ग्रैंडमास्टर रूस में 240, इसके बाद अमेरिका में 94, जर्मनी में 91 और यूक्रेन में 89 हैं.

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    जून 2018 तक भारत के 50 खिलाडियों ने ग्रेंड मास्टर का ख़िताब हासिल कर लिया था. जून 2018 में भारत के R. प्रग्गानंधा शतरंज की दुनिया में तहलका मचा दिया है वह शतरंज के इतिहास में दुनिया के दूसरे सबसे छोटे ग्रैंडमास्टर बन गए हैं. उन्होंने यह उपलब्धि 12 साल 10 महीने की उम्र में हासिल की है. पहले नंबर पर यूक्रेन के सेर्गेई कार्जाकिन का नाम है, जिन्होंने साल 2002 में 12 साल, 7 महीने की उम्र में सबसे छोटे ग्रैंडमास्टर बनने का खिताब हासिल किया था.

    कोई शतरंज खिलाड़ी ग्रेंड मास्टर कब बनता है?
    किसी शतरंज खिलाड़ी को ग्रैंड मास्टर बनने के लिए कम से कम 2500 “एलो रेटिंग” (Elo rating) प्राप्त करनी पड़ती है. हालाँकि खिलाड़ी को अपना ख़िताब बनाये रखने के लिए यह रेटिंग बरक़रार रखना जरूरी नही है.

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    इसके अलावा ग्रैंड मास्टर बनने के लिए खिलाड़ी को कम से कम 2 “ग्रैंडमास्टर नॉर्म” ऐसे टूर्नामेंट में अर्जित करने चाहिए जिसमें कम से कम 27 गेम्स (27 games) या 9 राउंड हों और इस टूर्नामेंट में कम से कम 3 अन्य ग्रैंड मास्टर खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हों. इसमें यह भी शर्त है कि खेल के हर राउंड में कम से कम 120 मिनट का थिंकिंग टाइम जरूर लगे.

    इस टूर्नामेंट में "नॉर्म" की तलाश वाले खिलाड़ी को कम से कम 2600 "टूर्नामेंट प्रदर्शन रेटिंग" प्राप्त करनी चाहिए.

    ऊपर दिए गए नोर्म्स को पूरा करने के अतिरिक्त एक खिलाडी इस टाइटल को हासिल कर सकता है यदि वह महिला विश्व चैम्पियनशिप, विश्व जूनियर चैम्पियनशिप, या वर्ल्ड सीनियर चैंपियनशिप को जीत लेता है.
    यदि कोई खिलाडी इन योग्यताओं या रेटिंग अंकों को पूरा कर लेता है तो शतरंज की सर्वोच्च संस्था “विश्व शतरंज महासंघ” उसको ग्रैंड मास्टर का ख़िताब दे देती है.एक साल में कई लोगों को ग्रैंड मास्टर का ख़िताब दिया जा सकता है.

    तो इस प्रकार आपने पढ़ा कि ग्रैंडमास्टर बनने की प्रक्रिया कितनी जटिल है. उम्मीद है यह लेख पढ़ने  के बाद आपको समझ आ गया होगा कि यदि कोई खिलाड़ी ग्रैंड मास्टर का ख़िताब हासिल कर लेता है तो कितना बड़ा मुकाम हासिल कर लेता है.

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