विश्व में ‘सर’ की उपाधि किसे मिलती है और क्यों?

Oct 25, 2018 16:28 IST

    नाईटहुड अवार्ड क्या है?
    ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर; ब्रिटिश साम्राज्य के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है.  यह एक प्रकार का ऑर्डर ऑफ़ चिवैलरी है. इसकी स्थापना 4 जून 1917 को किंग जार्ज पंचम ने की थी. यह किसी भी कामनवेल्थ और ब्रिटिश नागरिक द्वारा प्राप्त किए जा सकने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक है.

    इस अवार्ड की दो सीनियर श्रेणियां है जिनमें पुरुषों के लिए है “नाइट ग्रांड क्रॉस” जबकि महिलाओं के लिए है “डेम ग्रांड क्रॉस” जबकि दूसरा टाइटल पुरुषों के लिए “नाइट कमांडर” और महिलाओं के लिए “डेम कमांडर” बनाये गये हैं.

    जो व्यक्ति "ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर" या नाईटहुड का अवार्ड जीत लेता है वह अपने नाम के आगे "सर" शब्द का प्रयोग कर सकता है. जिस महिला को "ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर" का अवार्ड दिया जाता है वह अपने नाम के आगे "डेम" शब्द का इस्तेमाल कर सकती है.

    भारत के रतन टाटा को ओनोररी तौर पर ब्रिटेन की महारानी ने 2014 में ब्रिटेन के सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार GBE (Knight Grand Cross) से सम्मानित किया था. हालाँकि रतन टाटा भारत के  नागरिक होने के कारण इसका प्रयोग अपने नाम के आगे नहीं कर सकते हैं. 

    नाईटहुड का अवार्ड किसे दिया जाता है?

    ऐसा नहीं है कि यह अवार्ड केवल क्रिकेटरों को ही दिया जाता है बल्कि यह अवार्ड उन लोगों को भी दिया जाता है जो कि कला, विज्ञान, धर्मार्थ और कल्याण संगठनों के साथ काम करने, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समाज की बेहतरी और ब्रिटेन की बेहतरी के लिए काम करते हैं.  इस अवार्ड के लिए चुने जाने के लिए कोई विशेष क्राइटेरिया या योग्यता का निर्धारण नहीं किया गया है. यह अवार्ड ब्रिटेन की महारानी के द्वारा दिया जाता है. यह अवार्ड ब्रिटिश नागरिक, राष्ट्रमंडल क्षेत्र के नागरिक या कोई भी जिन्होंने यूनाइटेड किंगडम के लिए कोई महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है; को दिया जाता है.
    कुल मिलाकर नाईटहुड अवार्ड को देने का क्राइटेरिया भारत में दिए जाने वाले पदम पुरस्कारों जैसा ही है. इसमें भी व्यक्ति के कार्यों के आधार पर अवार्ड दिया जाता है.

    क्या भारतीय नागरिक भी नाईटहुड अवार्ड ले सकते हैं?

    हाँ, लेकिन भारत के नागरिकों को विदेशी खिताबों को स्वीकार करने से पहले भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी. लेकिन यदि सरकार मना कर देती है तो वह व्यक्ति खिताब/उपाधि नहीं ले सकता है.
    भारतीय संविधान के अनुच्छेद 18 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम के आगे पदम श्री, पदम भूषण, पदम् विभूषण, भारत रत्न, महाराजा, नवाब, राय बहादुर,  दीवान, दीवान बहादुर, और राजा साहब जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करेगा क्योंकि ये टाइटल राज्य के समक्ष समानता के अधिकार के विरुद्ध हैं.

    इसका मतलब यह है कि भारत के नागरिक सरकार की अनुमति से नाईटहुड अवार्ड ले सकते हैं लेकिन अपने नाम के आगे “सर” नहीं लगा सकते हैं. भारत के महान बांग्ला कवि व दार्शनिक रवीन्द्र नाथ ठाकुर (टैगोर) को ब्रिटिश सरकार ने 3 जून 1915 में नाइटहुड या सर की उपाधि से सम्मानित किया गया था. भारत के रतन टाटा को ओनोररी तौर पर ब्रिटेन की महारानी ने 2014 में “ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर” से सम्मानित किया था.

    मंसूर अली ख़ान पटौदी (जन्म 5 जनवरी 1941) भारत की आजादी के पहले अपने नाम के आगे नवाब लगाते थे लेकिन भारत की स्वतंत्रता के बाद उनके नाम से नवाब शब्द हटा दिया गया था.
    ब्रिटेन ने इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के कई क्रिकेटरों को 'सर' की उपाधि ने सम्मानित किया है और वे लोग अपने नाम के आगे इसका इस्तेमाल भी करते हैं जैसे सर विवियन रिचर्ड्स, सर सर गारफील्ड सोबर्स और सर फ्रैंक वॉरेल, सर क्लाइड वाल्कोट, सर एवरटन वीकस, सर कॉनराड हंट और रेवरेंड सर वेस हॉल इत्यादि.

    ऊपर दिए गए तथ्यों से आप यह समझ गए होंगे कि सर की उपाधि कैसे मिलती है और भारत के लोग इस उपाधि को क्यों धारण नहीं कर सकते हैं.

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