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सरकार UGC की जगह “उच्च शिक्षा आयोग” क्यों बनाना चाहती है?

भारत सरकार के मानव संसाधन और विकास मंत्रालय ने यूजीसी अधिनियम, 1956 को निरस्त करके उसके स्थान पर 'भारत के उच्च शिक्षा आयोग' बनाया जायेगा और इसके लिए विधेयक अक्तूबर, 2019 में लाया जायेगा. सरकार के इस कदम से फर्जी व खराब गुणवत्ता वाले संस्थानों को बंद करने का रास्ता साफ होगा. भारतीय उच्च शिक्षा आयोग एकल नियामक के रूप में काम करेगा और यूजीसी को निरस्त करने एवं एआईसीटीई को अपने दायरे में लायेगा. 
Sep 26, 2019 11:12 IST
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UGC
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केंद्र सरकार; देश में उच्च शिक्षा की दशा में सुधार करने के लिए पूरे नियंत्रण तंत्र को ठीक करने की दिशा में कार्य कर रही है. इसी दिशा में कदम उठाते हुए सरकार अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को खत्म कर इन दोनों की जगह नया हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बनाना चाहती है. 

केंद्र सरकार ने हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) एक्ट, 2018 के ड्राफ्ट को मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर शिक्षाविदों, शिक्षा से जुड़े पक्षकारों और आम लोगों के सुझाव मांगने के लिए अपलोड कर दिया है.

HECI और UGC में क्या अंतर है? (Difference between HECI & UGC)

1. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के पास विश्वविद्यालयों को रेगुलेट करना और उन्हें अनुदान (grant) देने का अधिकार है. जबकि HECI के पास अनुदान देने का अधिकार नहीं होगा क्योंकि नए कमीशन के आने के बाद विश्वविद्यालयों को अनुदान सीधे मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर  से दिया जाएगा. ज्ञातव्य है कि वर्तमान में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, IITs, NITs and IISERs जैसे सभी तकनीकी संस्थानों को फण्ड देता है.

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2. वर्तमान में यह प्रावधान है कि UGC अपनी बेवसाइट पर लोगों की जागरूकता को बढ़ाने के लिए फर्जी संस्थानों की सिर्फ सूची प्रकाशित करती है लेकिन उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्यवाही करने की शक्ति नही रखता है. लेकिन HECI के पास फर्जी व खराब गुणवत्ता वाले संस्थानों को बंद करने का अधिकार होगा. आदेश नहीं मानने वाले संस्थानों के खिलाफ जुर्माना और भारतीय दंड संहिता के हिसाब से 3 साल तक की सजा दिलाने का प्रावधान होगा.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हम नियामक (HECI) की भूमिका को कम करना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधन मुद्दों में सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा, "

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नए रेगुलेटर HECI में केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त 12 सदस्यों के अलावा एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी होगा. इस प्रस्तावित रेगुलेटर का मुख्य काम देश में शिक्षा की गुणवत्ता के स्तर में सुधार लाना है.
प्रस्तावित HECI के कुछ कार्य इस प्रकार हैं: (Functions of HECI)
1). उच्च शिक्षा में इस प्रकार के पाठ्यक्रम को बढ़ावा देना जिससे कि शिक्षा में रटने की प्रवृत्ति के बजाये सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिले.

2). संस्थानों के वार्षिक शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा और जो संस्थान अच्छा प्रदर्शन नही कर पा रहे हैं उनका मार्गदर्शन किया जायेगा.

3). शिक्षकों के प्रशिक्षण पर ध्यान देना

4). विभिन्न विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक परिणामों के मूल्यांकन के लिए एक मान्यता प्राप्त प्रणाली स्थापित करना.

5). विश्वविद्यालयों के हेड की नियुक्ति के लिए मानक निर्धारित करना

6). कक्षा में प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग को बढ़ावा देना

7). उच्च शिक्षा के संस्थान खोलने और बंद करने के मानकों को निर्धारित करना

8). यूजीसी द्वारा अनुमोदित संस्थानों को अब HECI के साथ एक और स्क्रीन टेस्ट देना होगा और यह दिखाना होगा कि वे उनके द्वारा तय किये गए अकादमिक मानकों का पालन कर रहे हैं.

9). शिक्षा मंत्रालय; निम्न गुणवत्ता वाले उन शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश देगा जो कि HECI के गठन के 3 साल के भीतर तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं.

यदि कोई शिक्षा संस्थान आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने को नहीं भरता है तो ऐसे संस्थानों के मुख्य कार्यकारी और मैनेजमेंट बोर्ड को सदस्यों को भी आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत सजा (अधिकत्तम 3 साल तक) और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा.

यदि हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया को बनने की अनुमति संसद से मिल जाती है तो यह अपने वांछित कर्तव्यों को पूरा करने में कितना सफल होगा यह तो आने वाला कल ही बता पायेगा लेकिन कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि सरकार के इस कदम से देश के शिक्षा संस्थानों में सरकार की दखल बढ़ जाएगी जिससे शिक्षा का राजनीतिकरण होने की संभावना भी बढ़ जाएगी है.

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