सेल्यूलर जेल या काला पानी की सजा इतनी खतरनाक क्यों थी?

सेल्यूलर जेल अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है. जो कैदी सजा पाकर इस जेल में पहुँचता था उसे ही काला पानी की सजा कहा जाता था. इस जेल के निर्माण का ख्याल अंग्रेजों के दिमाग में 1857 के विद्रोह के बाद आया था. कुल ‘696 सेल’ वाली इस जेल का निर्माण कार्य 1896 में शुरू हुआ था और 1906 में बनकर तैयार हो गई थी.
May 8, 2019 11:13 IST
    Cellular Jail

    भारत की आजादी के लिए लड़ रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कड़ी से कड़ी यातनाएं देने के लिए अंग्रेजों ने हर कदम उठाया था. इसी कड़ी में विद्रोही लोगों को सामान्य जनमानस से दूर रखने के लिए एक ऐसी जेल बनायीं थी जो कि पूरे भारत से हटकर हो. इसी जेल का नाम है 'सेल्यूलर जेल.

    'सेल्यूलर जेल’ अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है. इस जेल के निर्माण का ख्याल अंग्रेजों के दिमाग में 1857 के विद्रोह के बाद आया था. अर्थात इस जेल का निर्माण अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए किया गया था. इसका निर्माण कार्य 1896 में शुरू हुआ था और 1906 में यह बनकर तैयार हो गई थी. जिस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को इस सेल्यूलर जेल में भेजा जाता था उसे साधारण बोल चाल की भाषा में कहा जाता थी कि उसे काला पानी की सजा हुई है.

    इसे काला पानी इसलिए कहा जाता था क्योंकि यह जेल भारत की मुख्य भूमि से हजारों किलोमीटर दूर स्थित थी. राजधानी पोर्ट ब्लेयर में जिस जगह पर यह जेल बनी हुई थी उसके चारों ओर पानी ही पानी भरा रहता था क्योंकि यह पूरा क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के अंतर्गत आता है.
    भारत के 6 स्थान जहाँ भारतीयों का प्रवेश निषेध हैं
    सेल्यूलर जेल की संरचना के बारे में
    सेल्यूलर जेल में तीन मंजिल वाली 7 शाखाएं बनाई गईं थी, इनमें 696 सेल तैयार की गई थीं हर सेल का साइज 4.5 मीटर x 2.7 मीटर था. तीन मीटर की उंचाई पर खिड़कियां लगी हुई थी अर्थात अगर कोई कोई कैदी जेल से बाहर निकलना चाहे तो आसानी से निकल सकता था लेकिन चारों ओर पानी भरा होने के कारण कहीं भाग नही सकता था.

    इस सेल्यूलर जेल के निर्माण में करीब 5 लाख 17 हजार रुपये की लागत आई थी.इसका मुख्य भवन लाल इटों से बना है, ये ईंटे बर्मा से यहाँ लाई गई थीं जो कि आज म्यांमार के नाम से जाना जाता है. जेल की सात शाखाओं के बीच में एक टॉवर है. इस टॉवर से ही सभी कैदियों पर नजर रखी जाती थी. टॉवर के ऊपर एक बहुत बड़ा घंटा लगा था. जो किसी भी तरह का संभावित खतरा होने पर बजाया जाता था.
    (सेल्यूलर जेल की संरचना इस प्रकार थी)

    cellular jail structure
    image source:tripadvisor.in
    इस जेल को सेल्युलर क्यों कहा जाता था
    सेल्यूलर जेल आक्टोपस की तरह सात शाखाओं में फैली थी जिसमे कुल 696 सेल तैयार की गई थीं. यहाँ एक कैदी को दूसरे कैदी से बिलकुल अलग रख जाता था. जेल में हर कैदी के लिए अलग सेल होती थी. यहाँ पर कैदियों को एक दूसरे से अलग रखने का एक मकसद यह हो सकता है कि कैदी आपस में स्वतंत्रता आन्दोलन से जुडी कोई योजना ना बना सकें और अकेलापन के जीवन जीते जीते अन्दर से ही टूट जाएँ ताकि वे लोग सरकार के प्रति किसी भी तरह की बगावत करने की हालत में ना रहें.

    Punishment in cellular
    Image source:The Hindu
    इस जेल में बंद क्रांतिकारियों पर बहुत जुल्म ढाया जाता था. क्रांतिकारियों से कोल्हू से तेल पेरने का काम करवाया जाता था. हर कैदी को 30 पाउंड नारियल और सरसों को पेरना होता था. यदि वह ऐसा नहीं कर पाता था तो उन्हें बुरी तरह से पीटा जाता था और बेडिय़ों से जकड़ दिया जाता था.

    जानें भारत का पहला मानचित्र किसने बनाया था
    यहाँ पर कौन कौन क्रांतिकारियों ने सजा काटी है?
    सेल्यूलर जेल में सजा काटने वालों में कुछ बड़े नाम हैं- बटुकेश्वर दत्त,विनायक दामोदर सावरकर, बाबूराव सावरकर, सोहन सिंह, मौलाना अहमदउल्ला, मौवली अब्दुल रहीम सादिकपुरी, मौलाना फजल-ए-हक खैराबादी, S.चंद्र चटर्जी, डॉ. दीवान सिंह, योगेंद्र शुक्ला, वमन राव जोशी और गोपाल भाई परमानंद आदि.

    Savarkar Cell in Celluar Jail
    Image source:TopYaps

    सेल्यूलर जेल की दीवारों पर वीर शहीदों के नाम लिखे हैं. यहां एक संग्रहालय भी है जहां उन अस्त्रों को देखा जा सकता है जिनसे स्वतंत्रता सैनानियों पर अत्याचार किए जाते थे.

    भारत को आजादी मिलने के बाद इसकी दो और शाखाओं को ध्वस्त कर दिया गया था. शेष बची 3 शाखाओं और मुख्य टॉवर को 1969 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया. सन 1963 में यहाँ गोविन्द वल्लभ पंत अस्पताल खोला गया था. वर्तमान में यहाँ 500 बिस्तरों वाला अस्पताल है और 40 डॉक्टर यहाँ के निवासियों की सेवा कर रहे है.10 मार्च 2006 को सेल्युलर जेल का शताब्दी वर्ष समारोह मनाया गया था जिसमे यहाँ पर सजा काटने वाले क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी गयी थी.

    सेल्यूलर जेल और जेल संग्रहालय के लिए समय:
    09:00 पूर्वाह्न से 12:30 अपराह्न, 01:30 बजे से 04:45 बजे (राष्ट्रीय छुट्टियों को छोड़कर सभी दिन खुला)
    प्रवेश शुल्क (INR):रु. 30, कैमरा: रु. 200, वीडियो कैमरा: रु. 1000, फिल्म शूटिंग (पूर्व अनुमति के) रु. 10000 प्रति दिन
    (फ़ोन न. 03192- 230117)

    चीन का 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स प्रोजेक्ट' भारत की सुरक्षा को कैसे प्रभावित करेगा?

    Loading...

    Register to get FREE updates

      All Fields Mandatory
    • (Ex:9123456789)
    • Please Select Your Interest
    • Please specify

    • ajax-loader
    • A verifcation code has been sent to
      your mobile number

      Please enter the verification code below

    Loading...
    Loading...