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रेलवे ट्रैक के बीच पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं?

भारत में रेलगाड़ियों को परिवहन का मुख्य साधन माना जाता है. जब हम कभी रेल की पटरियों को देखते हैं तो पाते हैं कि रेल की पटरियों के बीच और दोनों तरफ छोटे-छोटे पत्थर बिछे रहते हैं. लेकिन कभी आपने सोचा है कि रेल की पटरियों के बीच और इसके दोनों किनारों पर पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं? इस लेख को पढ़ने के बाद आपको इस प्रश्न का उत्तर आसानी से मिल जाएगा.
Nov 7, 2019 11:30 IST
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भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग 2.5 करोड़ यात्रियों को इनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाती है. इसके अलावा भारतीय रेलवे ने 1.4 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार दिया हुआ है. इस प्रकार यह दुनिया के सबसे बड़े रोजगार दाताओं में से एक भी है. भारतीय रेलवे के पास आकार के हिसाब से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है. मार्च 2017 तक यहाँ पर ट्रैक की कुल लंबाई 121,407 किलोमीटर थी.

रेल की पटरियों के बीच छोटे-छोटे पत्थर बिछाए जाने का कारण

 railway track
Image source: Science ABC
रेल की पटरियों के बीच छोटे-छोटे पत्थर बिछाए जाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण हैl शुरूआती दौर में रेलवे ट्रैक का निर्माण इस्पात (steel) और लकड़ी के पटरों की मदद से किया जाता था, लेकिन आज के समय में लकड़ी के पटरों के बदले सीमेंट की आयताकार सिल्लियों का प्रयोग किया जाता है, जिसे “स्लीपर्स” कहा जाता हैl

वास्तव में रेल की पटरियों के बीच छोटे-छोटे पत्थर बिछाने का उद्देश्य लकड़ी के पटरों या सीमेंट की सिल्लियों को अपने स्थान पर मजबूती के साथ स्थिर रखना है ताकि ये सिल्लियां रेलवे ट्रैक को मजबूती के साथ पकड़े रहेl
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दरअसल जब ट्रेन चलती है तो उससे जमीन और पटरियों में कंपन पैदा होता है। इसके अलावा तेज धूप से पटरियां फैलती हैं और सर्दियों में सिकुड़ती हैं। इससे ट्रेन का पूरा भार लकड़ी या सीमेंट की सिल्लियों पर आ जाता है, लेकिन पटरियों के बीच पत्थर बिछे होने के कारण सारा भार इन पत्थरों पर चला जाता हैl जिसके कारण कंपन, पटरियों का सिकुड़ना, ट्रेन का भार सभी संतुलित हो जाते हैंl
crushed stones on railway track
Image source: Quora
इसके साथ ही रेल की पटरियों के बीच पत्थर बिछाने की एक वजह यह भी है कि जब रेलवे ट्रैक से होकर भारी-भरकम ट्रेन गुजरे तो उसके भार का संतुलन बना रहे और जमीन को कोई नुकसान ना पहुंचेl इसके अलावा रेल की पटरियों के बीच पत्थर बिछाने से बारिश का पानी आसानी से बहता है और रेल की पटरियों के बीच और उसके दोनों ओर कीचड़ नहीं होता हैl इसके अलावा रेल की पटरियों के बीच पत्थर बिछाने से ध्वनि प्रदूषण से भी बचाव होता हैl

रेल की पटरियों के बीच पत्थर बिछाने के पीछे एक कारण यह भी है कि यदि पत्थर नहीं बिछाई जाती है तो रेलवे पटरी के आस पास झाड़िया उग जाएंगी जिससे ट्रेन को गुजरने में कठिनाई उत्पन्न होगीl

आपकी जानकारी के लिए हम बताना चाहते हैं कि भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क हैl 2015-16 के अंत में जारी आकड़ों के अनुसार भारतीय रेलवे नेटवर्क 66,687 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है और इसके अंतर्गत 7,216 स्टेशन तथा 1,19,630 किमी ट्रैक शामिल हैl

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