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6.3 की तीव्रता वाले भूकंप से कांपे दिल्ली और नेपाल

बीती रात दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज़ झटके महसूस किये गये है. इस भूकंप का केंद्र नेपाल था. इन तेज़ झटको ने आधी रात में लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया. यहाँ पढ़ें पूरी जानकारी. 

6.3 magnitude earthquake tremors felt in delhi and nepal
6.3 magnitude earthquake tremors felt in delhi and nepal

नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ के पास हिमालयी क्षेत्र में 6.3 तीव्रता के भूकंप से बुधवार देर रात उत्तर भारत में तेज़ झटके महसूस किए गए। देर रात आए इस भूकंप से लोगों के बीच एक दहशत भरा माहौल बना हुआ है लोग आधी रात को घर से निकलकर बाहर खड़ें हो गये. 

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलोजी के अनुसार भूकंप का केंद्र नेपाल था . इस भूकंप के झटके 9 नवंबर रात 1.57 बजे महसूस किये गये हैं. 

दिल्ली-लखनऊ में भी हुए झटके महसूस 

भूकंप के इन तेज़ झटकों ने आधी रात को केवल नेपाल के लोगों की ही नींद ख़राब नही की बल्कि नेपाल के अलावा भूकंप के इन झटको को दिल्ली और आसपास के इलाके जैसे की गाज़ियाबाद , गुरुग्राम व लखनऊ तक भी महसूस किया गया है. गौरतलब है कि दिल्ली सिस्मिक ज़ोन 4 में है इससे ऊपर का भूकंप दिल्ली के लिए खतरनाक माना जाता है. 

बार-बार नेपाल में हो रहे हैं झटके महसूस 

नेपाल की धरती बार-बार इन झटको को महसूस कर रही है. 5 घंटे के अंदर नेपाल में 3 बार भूकंप के झटके महसूस किये गये है. नेपाल में पहला भूकंप रात 8 :52  मिनट पर आया था. इस भूकंप की तीव्रता 4.9 थी. इसके बाद दूसरा भूकंप रात 9: 41 पर आया जिसकी तीव्रता 3.5 थी और तीसरा भूकंप देर रात 1:57 पर आया जिसकी तीव्रता 6.3 थी. 

देर रात आये इस तेज़ भूकंप से लोगों की जान और सामान का काफी नुकसान भी हुआ है. 

क्या होता है भूकंप 

प्लेटो में तेज़ गति के कारण पृथ्वी की क्रस्ट में अचानक आघात आ जाने को भूकंप के रूप में परिभाषित किया जाता है. भूकंप अचानक ऊर्जा निकलने का परिणाम होता है जिससे भूकंपीय तरंगों का निर्माण होता है.

भूकंप के दौरान पृथ्वी की सतह का हिस्सा पीछे और ऊपर की ओर बढ़ने लगता है जिस कारण झटको को महसूस किया जाता है.

प्राकृतिक आपदाओं के लिए कितना तैयार है भारत 

भारत सरकार के अनुसार देश में अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम काम कर रहे हैं जो की बाढ़ और साइक्लोन के बारे में ६ से 24 घंटे पहले ही जानकारी दे देते हैं. मौसम विभाग अमेरिकी मदद से ये जानकारी देते हैं.

भूकंप के बाद आने वाली सूनामी या लैंड स्लाइड की जानकारी के लिए यह सिस्टम काम करते हैं. हालांकि बढ़ती आपदाओं को ध्यान में रखते हुए इन अर्ली वार्निंग सिस्टम को अपडेट करने के बारे  में सोचा जा रहा है.