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Blood glacier in Antarctica: ग्लेशियर से वर्षों से बह रहा है खून का झरना, वैज्ञानिक दे रहे हैं अलग-अलग तर्क

अंटार्टिका में वर्षो से एक ऐसा झरना बह रहा है जिसका रंग खून के जैसा लाल है, इस झरने के बारे में वैज्ञानिक अलग-अलग तर्क देते आ रहें हैं. आइये जानें इस झरने के बारे में 

Blood Falls Antarctica
Blood Falls Antarctica

पृथ्वी और उसके इकोसिस्टम के बारे में हमें कुछ न कुछ विशेष जानकरियां मिलती हैं जिनमें से कुछ के रहस्य वैज्ञानिकों ने  खोज लिए हैं जबकि कुछ अभी भी रहस्य ही बनी हैं. आज हम पृथ्वी के इकोसिस्टम के बारे में आपको एक ऐसी जानकारी देंगे जिससे आपको भी आश्चर्य होगा. विश्व में एक ऐसी जगह भी है जहाँ से बहने वाले झरने का रंग लाल है लेकिन इसका रंग लाल क्यों है ये अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं बता पाए हैं और इस पर विभिन्न वैज्ञानिक अपने अलग-अलग तर्क देते हैं. आइये जानें इस झरने के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें 

कहाँ है ये झरना 
ये खून का झरना पूर्वी अंटार्टिका में विक्टोरिया लैंड में स्थित टेलर ग्लेशियर पर है. ये जगह प्राचीन अत्यंत दुर्लभ और खतरनाक है. यहाँ दिन का तापमान -7 डिग्री तक कम हो जाता है. चारो तरह बर्फ ही बर्फ होती है और उसके बीच से ये झरना लाल रंग में बह रहा है जो देख कर अत्यंत ही डरावना लगता है. इस झरने को कुछ लोग खुनी झरना भी कहते हैं. लेकिन ये खून है या कुछ और ये अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. इस ग्लेशियर की खोज अमेरिकी वैज्ञानिक ग्रिफिथ टेलर ने 1911 में की थी. इसी का कारण इसका नाम टेलर ग्लेशियर है.

क्या है वैज्ञानिक मत?
इस लाल झरने के बारे में वैज्ञानिक समय-समय पर अलग-अलग तर्क देते रहे हैं. जब इस झरने के पानी का सैंपल लिया गया तब पता चला कि इसका स्वाद खारा है. इससे वैज्ञानिकों ने तर्क दिया कि, इसके लाल रंग का कारण एल्गी है लेकिन ये बात सही ण होने के कारण इस मान्यता को रद्द कर दिया गया. बाद में 1960 में वैज्ञानिकों के एक समूह ने कहा कि इस ग्लेशियर के नीचे लौह नमक यानी फेरिक हाइड्रोऑक्साइड है जो ऑक्सीजन के सम्पर्क में आ कर लाल रंग का हो जाता है जिसके कारण यहाँ से निकलने वाले पानी का रंग भी लाल हो जाता है. और ये यहाँ से ऐसे निकलता है जैसे किसी टयूब से कोई क्रीम या पेस्ट निकलता है.

कुछ समय बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि यहाँ कई ऐसे सूक्ष्म जीव हैं जो बिना सूर्य के प्रकाश के रह सकते हैं और इनके कारण ही इसका पानी लाल है. ये सूक्ष्म जीव यहाँ पर लगभग 15 से 20 लाख साल से रह रहें हैं. ये क्षेत्र अत्यंत बड़ा है मानव अभी तक इस क्षेत्र के एक छोटे से भाग को ही खोज पाया है. ये बहुत ही दुर्गम क्षेत्र है यहाँ जानें में बहुत अधिक समस्याएं हैं और इस पूरे क्षेत्र के इकोसिस्टम को जानने में वैज्ञानिकों को कई दशकों का समय लगेगा.   

इस ग्लेशियर में इकोसिस्टम के बैक्टीरिया हैं। जिनके विषय में वैज्ञानिकों को अभी तक कोई जानकारी नहीं है और किसी को नहीं पता की आखिर इतनी ज्यादा ठण्ड में ये अभी तक कैसे जीवित हैं. ये जीव ऐसी जगह जिन्दा हैं जहां पर ऑक्सीजन भी नहीं है. मतलब ये बैक्टीरिया बिना फोटोसिंथेसिस के ही जीवित हैं. इस पूरे ग्लेशियर का तापमान दिन में -7 डिग्री सेल्सियस तक रहता है ऐसे में ये खूनी झरना बहुत ही ठंडा है और अत्यधिक लवणता के कारण ये जम नहीं पाता और बहता रहता है.