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IAS Success Story: Google से छोड़ी नौकरी, अंतिम प्रयास में पहली रैंक प्राप्त कर IAS बने अनुदीप दुरीशेट्टी

IAS Success Story: सिविल सेवा को पास करने का सफर मुश्किल होता है। आज हम आपको अनुदीप दुरीशेट्टी की कहानी बताएंगे, जिन्होंने कई बार असफलता  देखने के बाद पांचवे प्रयास में पहली रैंक हासिल कर सफलता का स्वाद चखा। 

IAS Success Story:  Google से छोड़ी नौकरी, अंतिम प्रयास में पहली रैंक प्राप्त कर IAS बने अनुदीप  दुरीशेट्टी
IAS Success Story: Google से छोड़ी नौकरी, अंतिम प्रयास में पहली रैंक प्राप्त कर IAS बने अनुदीप दुरीशेट्टी

IAS Success Story: यूपीएससी सिविल सेवा का सफर मुश्किल होता है। इस सफर में कई बार असफलता का मुंह भी देखना पड़ता है। हालांकि, कुछ लोग असफलता का हाथ पकड़कर बाहर हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोग डटे रहकर अपने अंतिम प्रयास तक कोशिश करते रहते हैं और सफलता तक पहुंचते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स अनुदीप दुरीशेट्टी की कहानी बताएंगे, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा में पांच बार असफलता पाई, लेकिन हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पांचवे प्रयास में सभी असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए पहली रैंक हासिल कर अपने यूपीएससी सफर का खूबसूरत अंत किया। तो, आइये पढ़ते हैं अनुदीप दुरीशेट्टी का कहानी। 

 

अनुदीप का परिचयः

 

मूल रूप से तेलंगाना के रहने वाले अनुदीप दुरीशेट्टी ने 2011 में बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने बहुराष्ट्रीय कंपनी Google में नौकरी हासिल की। लेकिन, इसमें उनका मन नहीं लगा, क्योंकि दिमाग में सिविल सेवा नौकरी का ख्वाब पल रहा था। वह सिविल सेवा में अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे, इसलिए जब वह स्नातक की पढ़ाई कर रहे थे, तब उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने प्रीलिम्स और मेंस पास किए, लेकिन अपने पहले प्रयास में इंटरव्यू पास नहीं कर सके। हालांकि, इससे उन्होंने अपनी उम्मीद नहीं खोई, बल्कि गूगल कंपनी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करने के साथ यूपीएससी की तैयारी जारी रखी।




2013 में प्राप्त की 790 रैंक

 

अनुदीप पूरी मेहनत के साथ तैयारी करते रहे और साल 2013 में फिर से सिविल सेवा परीक्षा दी। इस बार उन्होंने परीक्षा को पास करने में सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन उन्होंने 790 रैंक प्राप्त की, जिससे उन्हें भारतीय राजस्व सेवा मिली। हालांकि, वह इससे खुश नहीं थे, क्योंकि दिमाग में आइएएस अधिकारी बनने का सपना था। वह सिविल सेवाओं की तैयारी में लगे रहे। 

 

 

अगले दो प्रयास में फिर हो गए थे असफल 

अनुदीप ने काफी मेहनत के साथ तैयारी की, लेकिन वह फिर से अपने अगले दो प्रयासों में असफल हो गए। लेकिन, इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कमियों को पहचानते हुए उन पर काम किया। उन्होंने अपने आखिरी प्रयास में 2017 में फिर से परीक्षा दी। यह उनका पांचवा प्रयास था, जिसमें न केवल उन्होंने सफलता हासिल की, बल्कि पहली रैंक के साथ परीक्षा को पास किया। यही नहीं वह यूपीएससी टॉप करने वाले तेलंगाना के पहले व्यक्ति भी बन गए।  

 

अपनी वेबसाइट के माध्यम से बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं दुरीशेट्टी

अनुदीप दुरीशेट्टी ने आइएएस अधिकारी बनने के बाद अपने नाम से एक वेबसाइट भी बनाई है, जिसमें वह सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को तैयारी से जुड़े टिप्स देते हैं। इसमें वह उत्तर लेखन से लेकर अन्य जरूरी चीजों को बारीकियों से समझाते हैं। 

 

अनुदीप के कहानी हमें बताती है कि यदि आपके अंदर धैर्य और दृढ़ता है, तो आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। इसके लिए शांत होकर अपनी तैयारी को जारी रखना होगा, जो आपको सफलता के शिखर तक पहुंचा सकती है। ऐसे में सिविल सेवा अभ्यर्थियों को यह कहानी प्रेरित कर सकती है। 

 

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