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ASER 2022: कोविड के बाद स्कूलों में एडमिशन बढ़े, यूपी, बिहार और झारखंड में निजी ट्यूशन में हुई रिकार्ड बढ़ोतरी

असर रिपोर्ट 2022 के अनुसार, कोविड-19 के बाद स्कूलों में सभी आयु वर्गों के एडमिशन में रिकॉर्ड स्तर पर हुए हैं. ये 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की शुरुआत के बाद से अब तक के उच्चतम स्तर पर हुए हैं.

असर रिपोर्ट 2022
असर रिपोर्ट 2022

ASER 2022: एनुअल स्टेटस ऑफ़ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर) के अनुसार, कोविड-19 के दौरान जहाँ एक स्कूली शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई वहीँ इसके बाद वर्ष 2022 में सभी आयु वर्ग के स्कूल एडमिशन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है ये वर्ष 2009 में बने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के बाद से अब तक का उच्चतम स्तर है. उल्लेखनीय है कि कोविड-19 से पूर्व राष्ट्रीय एएसईआर ग्रामीण क्षेत्र सर्वेक्षण 2018 में आयोजित किया गया था, उस दौरान, 6 से 14 वर्ष के आयु वर्ग के लिए ऑल इंडिया एडमिशन 97.2 प्रतिशत था जबकि वर्ष 2022 के दौरान ये संख्या बढ़कर 98.4 फीसदी हो गई है.

एएसईआर 2022 रिपोर्ट में देश भर के 616 जिलों के सात लाख बच्चों को शामिल किया गया था साथ ही इस रिपोर्ट को तैयार करने में 27,536 स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों के अनुपात में 1.6 प्रतिशत की कमी आई है. साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि, देश भर में 11 से 14 वर्ष की आयु के वर्ग के सभी बच्चों का प्रतिशत वर्ष 2022 में 71.7 प्रतिशत हो गया है ये 2018 में 65 प्रतिशत था.

साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि, 2018 से 2022 के बीच निजी ट्यूशन में वृद्धि हुई है. जिससे कुछ बच्चों में अन्य की तुलना में बेहतर स्कोर करने में मदद मिली है. राष्ट्रीय स्तर पर पेड प्राइवेट ट्यूशन क्लास लेने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों का अनुपात 2018 में 26.4 प्रतिशत से बढ़कर 2022 में 30.5 प्रतिशत हो गया. उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में पेड प्राइवेट ट्यूशन लेने वाले बच्चों का अनुपात 2018 के स्तर से 8 प्रतिशत अधिक बढ़ा है. वहीँ बिहार और झारखंड हाईएस्ट ट्यूशन स्टेट्स हैं जहाँ 70 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने बिहार में और 45 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने झारखंड में वर्ष 2022 में ट्यूशन लिया है. जबकि हिमाचल प्रदेश में केवल 10 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 15 प्रतिशत छात्रों ने ट्यूशन लिया है.