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Cheetah in Bharat: चीतों की ट्रेकिंग के लिए लगाई गई है सॅटॅलाइट कॉलर आईडी, जानिये कैसे होते हैं ट्रेक

देश में एक लम्बे इंतजार के बाद नामीबिया से 8 चीतों का आगमन हो चुका है I भारत में ये चीते लम्बे समय से विलुप्त थे, इन्हें पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ देश में लाया गया हैI इन चीतों पर सॅटॅलाइट के माध्यम से नजर रखी जारही हैI आइये जानें कैसे हो रही है इनकी ट्रेकिंग

Cheetah In India
Cheetah In India

Cheetah in Bharat: देश में एक लम्बे समय के बाद नामीबिया से चीतों का आगमन हो चुका हैI देश में 1947 में अंतिम बार चीते देखें गए थे और वर्ष 1952 में भारत सरकार ने चीतों को देश में विलुप्त घोषित कर दिया थाI तब से ही चीतों को देश में लाने पर विचार हो रहा था और एक लम्बे समय के बाद चीते देश में वापस आ गए हैं I मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क को चीतों का नया आवास बनाया गया है, और यहाँ इनकी सुविधाओं और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा हैI सॅटॅलाइट के माध्यम से चीतों पर पल-पल नजर रखी जा रही हैI 

सॅटॅलाइट के माध्यम से कैसे रखी जा रही है चीतों पर नजर?
           
चीतों पर नजर रखने के लिए उनके गले में एक कॉलर आईडी लगाई गई हैI ये कॉलर आईडी एक सॅटॅलाइट कॉलर आईडी है जिसके माध्यम से चीतों पर एक महीने तक निगरानी रखी जाएगी और उसके बाद अगर सब सही रहा तो उन्हें जंगल में छोड़ दिया जायेगाI इस कॉलर आईडी से चीतों की लोकेशन ट्रेक की जाएगीI 

क्या है कॉलर आईडी और कैसे करती है काम ?

कॉलर आईडी जंगली जीवों पर निगरानी के लिए प्रयोग की जाती हैI इसे एनिमल माइग्रेशन ट्रेकिंग भी कहा जाता हैI इसे शेर, बाघ जैसे जंगली पशुओं पर निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता हैI इसे जीवों के गले में लगा कर उनपर नजर रखी जाती हैI ये कॉलर आईडी सॅटॅलाइट से जुडी होती है और जीवों की गतिविधियों पर पल-पल निगाह रखतीं हैं और यही आईडी चीतों के गले में लगाई गईं हैंI इससे जंगल में जानें के बाद भी उनपर नजर रखी जा सकेगी और इससे चीतों के स्वास्थ्य की भी देखभाल हो पाएगी I 

सॅटॅलाइट कॉलर आईडी किसी मोबाइल फ़ोन के GPS के समान ही कार्य करती है I इसमें एक जीपीएस चिप होती है जो सॅटॅलाइट के माध्यम से इससे निकलने वाले सिग्नल से जीवों को ट्रेक कर उनकी सही लोकेशन बताती हैI जिससे वन्य जीव अधिकारियों को इसकी सही जानकारी मिल पाती हैI