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सैलरी 1 करोड़ से अधिक और काम कुछ न देने पर कंपनी पर ही कर दिया मुकदमा, जानें क्यों ?

डबलिन में एक कर्मचारी ने उसकी नियोक्ता रेल कंपनी पर ही कोर्ट में केस किया है। व्यक्ति ने कहा है कि कंपनी उसे सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक की सैलरी दे रही है, लेकिन इसके बदले कुछ भी काम नहीं कराती है। 

सैलरी 1 करोड़ से अधिक और काम कुछ न देने पर कंपनी पर ही कर दिया मुकदमा, जानें क्यों
सैलरी 1 करोड़ से अधिक और काम कुछ न देने पर कंपनी पर ही कर दिया मुकदमा, जानें क्यों

मान लिजिए आपको एक ऐसी नौकरी मिल गई है, जिसमें आपको सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा, लेकिन इसके लिए आपको कुछ काम नहीं करना है, तो आप क्या करेंगे। अधिकतर लोगों की यही चाहत होगी कि पैसे मिले फुल और काम रहे गुल। यानि पैसा पूरा दिया जाए और काम बिल्कुल भी नहीं लिया जाए।

 

कई लोगों के लिए यह ड्रीम जॉब से कम नहीं है। लोग चाहेंगे कि यदि नौकरी में अधिक रुपये के बदले काम नहीं करना पड़ रहा है, तो इससे बेहतर क्या हो सकता है। हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी होंगे, जो इससे खुश नहीं होंगे। कुछ इसी तरह का ताजा मामला डबलिन में सामने आया है, जब एक शख्स ने सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक का पैकेज देने के बदले कुछ काम नहीं करने देने को लेकर आइरिश रेल कंपनी पर मुकदमा कर दिया। 




डबलिन में आयरिश रेल में काम करने वाले डर्मोट एलेस्टेयर मिल्स ने अपने नियोक्ता पर उन्हें कोई काम नहीं देने के लिए मुकदमा दायर किया है। कंपनी उन्हें सालाना करीब 1.06 करोड़ रुपये का भुगतान करती है।



एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डबलिन में आयरिश रेल में काम करने वाले वित्त प्रबंधक डर्मोट एलिस्टेयर मिल्स ने प्रति वर्ष लगभग 1.06 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने के बावजूद काम न करने के लिए अपने नियोक्ता को अदालत में घसीटा है। कर्मचारी ने दावा किया है कि वह काम पर ज्यादातर समय अखबार पढ़ने, सैंडविच खाने और टहलने  में बिताते हैं। नौ साल पहले शख्स द्वारा कंपनी को लेकर एक संरक्षित खुलासा करने के बाद उनके काम में कमी आना शुरू हुई।

 

संरक्षित प्रकटीकरण अधिनियम 2014(Protected Disclosure Act 2014) के तहत अपनी शिकायत की सुनवाई में 1 दिसंबर को प्रस्तुत सुबूत के अनुसार, कर्मचारी ने आरोप लगाया है कि उसे आयरिश रेल के खिलाफ बोलने के लिए दंडित किया गया है, जो कि एक सजा है जिसकी वजह से उसे कोई काम नहीं दिया है।

 

मिल्स ने आयरलैंड में कार्यस्थल संबंध आयोग (WRC) को बताया, "मैं कहूंगा कि अगर मुझे ऐसा कुछ मिला है, जिसके लिए मुझे सप्ताह में एक बार काम करने की आवश्यकता होती है तो मैं रोमांचित हो जाऊंगा।" उनकी नौकरी के लिए अब उन्हें सप्ताह में तीन दिन कार्यालय जाना पड़ता है, जबकि दो दिन घर पर रहना पड़ता है।

 

उन्होंने कहा कि "मैं अपने क्यूबिकल में जाता हूं, मैं अपना कंप्यूटर चालू करता हूं, मैं ईमेल देखता हूं। काम से जुड़े कोई ईमेल नहीं हैं, कोई संदेश नहीं, कोई संचार नहीं, कोई सहकर्मी संचार नहीं है,"। 

 

मिल्स के मुताबिक, "मैं बैठकर अखबार पढ़ता हूं और मैं अपना सैंडविच खाता हूं। फिर लगभग 10.30 बजे, अगर कोई ईमेल आता है, जिसके लिए जवाब की आवश्यकता होती है, तो मैं उसका जवाब देता हूं। अगर इससे जुड़ा कोई काम है, तो मैं वह काम करता हूं,"।

 

वह एक या दो घंटे के लिए टहलने भी जाते हैं और अगर कुछ करने को नहीं होता है, तो वह घर चले जाते हैं। मिल्स के मुताबिक, "जब मैं कहता हूं कि मैं कुछ नहीं करता हूं, तो मेरा मतलब है कि मैं अपने कौशल का उपयोग नहीं करता हूं,"। मिल्स ने अदालत से कहा कि उन्हें प्रशिक्षण के अवसरों और कंपनी की बैठकों से भी रोक दिया गया है।