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इस मंदिर में भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े

भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां भगवान शिव को जिंदा केकड़ा चढ़ाए जाते हैं। इसके पीछे लोगों की अनूठी मान्यता है। कहां है यह मंदिर और क्या है मान्यता है, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।

इस मंदिर में भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े
इस मंदिर में भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े

भारत में हर राज्य में मंदिर है और हर मंदिर का अपना इतिहास है। हर मंदिर की अपनी मान्यता भी है। भगवान शिव के मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। लोग यहां पहुंचकर दूध, जल, चंदन और फूल समेत अन्य चीजें भगवान को चढ़ाते हैं।  लेकिन, क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां  श्रद्धालु भगवान शिव को जिंदा केकड़ा चढ़ाते हैं और इसके पीछे लोगों की अनूठी मान्यता भी है। यह सुनने में थोड़ा अजीब हो सकता है, लेकिन यह सच है और लोग इस मान्यता का पालन भी करते हैं। तो, आइये जानते हैं कहां है यह मंदिर और केकड़ा चढ़ाने के पीछे लोगों की क्या मान्यता है। जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें। 

 

इस राज्य में है यह मंदिर 

 

भगवान शिव का यह मंदिर गुजरात के सूरत में स्थित है, जो कि रामनाथ शिव घेला मंदिर है। यह मंदिर गुजरात समेत विभिन्न राज्यों में रह रहे लोगों की आस्था का केंद्र है, जहां अलग-अलग क्षेत्र से लोग भगवान शिव के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और जिंदा केकड़ा चढ़ाते हैं। 

 

सालों से चली आ रही है प्रथा

 

स्थानीय लोगों के मुताबिक, शिव मंदिर में केकड़ा चढ़ाने की प्रथा नई नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही है। लोग सुबह-सुबह यहां दूध व धतूरा के बदले हाथों में जिंदा केकड़ा लिए पहुंचते हैं, जो कि बारी-बारी से शिव पर केकड़ा चढ़ाते हैं। अपने इस अनूठे अनुष्ठान की वजह से यह मंदिर लोगों के बीच चर्चा का विषय रहता है। 

 

इसलिए चढ़ाते हैं केकड़ा

 

स्थानीय लोगों का मान्यता है कि शिव पर केकड़ा चढ़ाने की प्रथा को लेकर पुरानी मान्यता है, जिसके अनुसार बच्चों के कानों में दर्द या फिर कान से जुड़ी कोई भी समस्या नहीं रहती है। हालांकि, यह प्रथा हर दिन नहीं, बल्कि साल में एक बार होती है और इस दिन यहां भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती है। 

 

तापी नदी में छोड़ दिए जाते हैं केकड़ें

 

भगवान शिव को जिंदा केकड़ा चढ़ाए जाने के बाद इन्हें वही नहीं रखा जाता है, बल्कि वहां से हटा दिया जाता है। दरअसल, इन केकड़ों के अनुष्ठान पूरा होने के बाद तापी नदी में छोड़ दिया जाता है, जिसके बाद साल में एक बार फिर से केकड़ों को भगवान शिव पर चढ़ाने की प्रथा का पालन किया जाता है। यही वजह है कि सूरत में इस मंदिर के पास केकड़ों का महत्व रहता है। 

 

हम उम्मीद करते हैं कि आपको ऊपर दी गई जानकारी पसंद आई होगी। इसी तरह की और जानकारी जानने के लिए जागरण जोश की वेबसाइट पर लेख पढ़ते रहिएं।

 

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